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गर्मी में पेट दर्द के बढ़े मरीज, डॉक्टर मिले गैर हाजिर
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भोलेपुर सीएचसी में डॉक्टर की खाली पड़ी कुर्सी। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर रविवार को लगे आरोग्य मेलों में पेट दर्द, बुखार व खांसी जुकाम के मरीज बढ़े। वहीं, डॉक्टर नदारद रहे। इससे फार्मासिस्टों के भरोसे मरीजों का इलाज हुआ। अधिकांश पीएचसी पर आयुष चिकित्सकों से एलोपैथिक का इलाज कराया गया।
शासन के आदेश पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर लगने वाले मुख्यमंत्री आरोग्य मेले स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से मखौल बनते जा रहे हैं। सीएमओ कार्यालय से लगाई गई एमबीबीएस डॉक्टरों की ड्यूटी कागजों तक ही सीमित है।
जबकि आयुष चिकित्सक व फार्मासिस्टों के भरोसे मरीजों का इलाज किया जा रहा है। पीएचसी पर इलाज के लिए आयुष चिकित्सक तैनात किए गए, लेकिन कोई भी आयुर्वेदिक दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। इससे वह मरीजों को अंग्रेजी दवाएं ही दे रहे हैं। भोलेपुर पीएचसी पर तीन सप्ताह से कोई डॉक्टर नहीं पहुंच रहा है। डॉ. स्मिता शाक्य अवकाश पर हैं, जबकि डॉ. संध्या वर्मा कभी ड्यूटी पर आती ही नहीं हैं।
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यह मामला संज्ञान में होने के बावजूद सीएमओ ने न तो कोई कार्रवाई की और न ही किसी अन्य डॉक्टर की ड्यूटी लगाई। एसीएमओ डॉ. दलवीर सिंह निरीक्षण करने गए तो दोनों डॉक्टर व सीएचओ गैरहाजिर मिले। फार्मासिस्ट अखिलेश मरीजों को देखकर दवा दे रहे थे।
एलटी विनय कुमार मरीजों की जांच करते मिले। पीएचसी पर मौजूद आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने एसीएमओ से गर्भवती की गोदभराई व बच्चे का अन्नप्राशन कार्यक्रम कराया। ओपीडी में पहुंचे कुल 34 मरीजों में सर्वाधिक पेट दर्द से संबंधित थे।
साहबगंज पीएचसी पर भी नहीं मिलीं डॉक्टर
शहर के पीएचसी साहबगंज का एसीएमओ डॉ. दलवीर सिंह निरीक्षण करने पहुंचे तो वहां डॉ. अंजुला गोस्वामी मौजूद नहीं थीं। फार्मासिस्ट ने मरीजों को देखा। नौलक्खा पीएचसी पर डॉ. मधु अग्रवाल कभी ड्यूटी करने आईं ही नहीं।
आयुष चिकित्सक नवनीत गुप्ता ने कुल 15 मरीजों को देखकर अंग्रेजी दवाएं दीं। उन्होंने बताया कि पीएचसी में आयुर्वेदिक दवाएं हैं ही नहीं, इसलिए अंग्रेजी दवाएं देना मजबूरी है। एसीएमओ ने बताया कि अनुपस्थित डॉक्टरों व कर्मचारियों का एक-एक दिन का वेतन काटने की संस्तुति की गई है।
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शासन के आदेश पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर लगने वाले मुख्यमंत्री आरोग्य मेले स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से मखौल बनते जा रहे हैं। सीएमओ कार्यालय से लगाई गई एमबीबीएस डॉक्टरों की ड्यूटी कागजों तक ही सीमित है।
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जबकि आयुष चिकित्सक व फार्मासिस्टों के भरोसे मरीजों का इलाज किया जा रहा है। पीएचसी पर इलाज के लिए आयुष चिकित्सक तैनात किए गए, लेकिन कोई भी आयुर्वेदिक दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। इससे वह मरीजों को अंग्रेजी दवाएं ही दे रहे हैं। भोलेपुर पीएचसी पर तीन सप्ताह से कोई डॉक्टर नहीं पहुंच रहा है। डॉ. स्मिता शाक्य अवकाश पर हैं, जबकि डॉ. संध्या वर्मा कभी ड्यूटी पर आती ही नहीं हैं।
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यह मामला संज्ञान में होने के बावजूद सीएमओ ने न तो कोई कार्रवाई की और न ही किसी अन्य डॉक्टर की ड्यूटी लगाई। एसीएमओ डॉ. दलवीर सिंह निरीक्षण करने गए तो दोनों डॉक्टर व सीएचओ गैरहाजिर मिले। फार्मासिस्ट अखिलेश मरीजों को देखकर दवा दे रहे थे।
एलटी विनय कुमार मरीजों की जांच करते मिले। पीएचसी पर मौजूद आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने एसीएमओ से गर्भवती की गोदभराई व बच्चे का अन्नप्राशन कार्यक्रम कराया। ओपीडी में पहुंचे कुल 34 मरीजों में सर्वाधिक पेट दर्द से संबंधित थे।
साहबगंज पीएचसी पर भी नहीं मिलीं डॉक्टर
शहर के पीएचसी साहबगंज का एसीएमओ डॉ. दलवीर सिंह निरीक्षण करने पहुंचे तो वहां डॉ. अंजुला गोस्वामी मौजूद नहीं थीं। फार्मासिस्ट ने मरीजों को देखा। नौलक्खा पीएचसी पर डॉ. मधु अग्रवाल कभी ड्यूटी करने आईं ही नहीं।
आयुष चिकित्सक नवनीत गुप्ता ने कुल 15 मरीजों को देखकर अंग्रेजी दवाएं दीं। उन्होंने बताया कि पीएचसी में आयुर्वेदिक दवाएं हैं ही नहीं, इसलिए अंग्रेजी दवाएं देना मजबूरी है। एसीएमओ ने बताया कि अनुपस्थित डॉक्टरों व कर्मचारियों का एक-एक दिन का वेतन काटने की संस्तुति की गई है।