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जिला जेल में उपद्रव, पथराव व आगजनी करने में चार साल की सजा
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फर्रुखाबाद। विशेष अदालत एससी-एसटी एक्ट के न्यायाधीश महेंद्र सिंह ने वर्ष 2017 में जिला कारागार फतेहगढ़ में हुए उपद्रव, पथराव, तोड़फोड़ और आगजनी के मुकदमे में एक बंदी को दोषी पाकर चार साल कैद की सजा सुनाई है।
10 हजार रुपये जुर्माना किया है। जुर्माना अदा न करने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया गया है। कुल 33 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किए गए थे। इनमें 32 आरोपियों की पत्रावलियां अलग की गईं थीं, जिसमें सुनवाई चल रही है।
जिला कारागार फतेहगढ़ में वर्ष 2017 में बंदी अतुल व सतीश जेल अस्पताल में भर्ती थे। अवैध गतिविधियों की वजह से दोनों की अस्पताल से छुट्टी कर दी गई थी। इससे अतुल और सतीश नाराज हो गए। अतुल और सतीश के नेतृत्व में बंदियों ने जिला कारागार में उपद्रव कर दिया था। बंदी रक्षक संतोष दोहरे और गुलाब सिंह के साथ मारपीट की थी। इसकी जानकारी पर जेलर धर्मपाल सिंह मौके पर पहुंचे थे। बंदियों ने उनकी एक नहीं सुनी और पथराव शुरू कर दिया।
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रोशनदान से जेलर के कार्यालय में घुस कर अलमारी और बाक्स क्षतिग्रस्त कर दिए थे। उसमें रखे 10 से 15 हजार रुपये और सिक्योरिटी बांड के जेवर, घड़ी, मोबाइल लूट लिए थे। जेलर का लैपटॉप तोड़कर पत्रावलियां फाड़ दी थीं। जेल अस्पताल के स्टोर में घुस कर दवा लूटी और फर्नीचर, गद्दों व सरकारी अभिलेखों को आग के हवाले कर किया था।
फोर्स के साथ बंदियों को समझाने गए तत्कालीन जेल अधीक्षक राकेश कुमार, तत्कालीन सीडीओ एनपी पांडेय, तत्कालीन फतेहगढ़ कोतवाल अनूप कुमार पर बंदियों ने पथराव कर दिया था। इससे जेल अधीक्षक, सीडीओ पत्थर लगने से घायल हो गए थे। जेल अधीक्षक, सीडीओ और बंदी रक्षक संतोष दोहरे को लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कोतवाल अनूप कुमार निगम के हल्की चोटें आईं थीं।
बंदियों का हंगामा शांत होने के बाद जेलर धर्मपाल सिंह ने नामजद व अज्ञात में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने 33 बंदियों के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया था। आरोपियों की अनुपस्थिति के कारण सुभाष चंद्र की पत्रावली अलग कर सुनवाई हुई।
बचाव पक्ष के वकील व विशेष लोक अभियोजक अशोक कटियार, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अनुज प्रताप सिंह ने दलीलें पेश कीं। सुनवाई के बाद न्यायाधीश ने सुभाष निवासी अकराबाद थाना कंपिल को सरकारी कार्य में बांधा डालने, आगजनी, पथराव, अधिकारियों को घायल करने के जुर्म में दोषी पाकर सजा और जुर्माने से दंडित किया है।
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10 हजार रुपये जुर्माना किया है। जुर्माना अदा न करने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया गया है। कुल 33 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किए गए थे। इनमें 32 आरोपियों की पत्रावलियां अलग की गईं थीं, जिसमें सुनवाई चल रही है।
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जिला कारागार फतेहगढ़ में वर्ष 2017 में बंदी अतुल व सतीश जेल अस्पताल में भर्ती थे। अवैध गतिविधियों की वजह से दोनों की अस्पताल से छुट्टी कर दी गई थी। इससे अतुल और सतीश नाराज हो गए। अतुल और सतीश के नेतृत्व में बंदियों ने जिला कारागार में उपद्रव कर दिया था। बंदी रक्षक संतोष दोहरे और गुलाब सिंह के साथ मारपीट की थी। इसकी जानकारी पर जेलर धर्मपाल सिंह मौके पर पहुंचे थे। बंदियों ने उनकी एक नहीं सुनी और पथराव शुरू कर दिया।
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रोशनदान से जेलर के कार्यालय में घुस कर अलमारी और बाक्स क्षतिग्रस्त कर दिए थे। उसमें रखे 10 से 15 हजार रुपये और सिक्योरिटी बांड के जेवर, घड़ी, मोबाइल लूट लिए थे। जेलर का लैपटॉप तोड़कर पत्रावलियां फाड़ दी थीं। जेल अस्पताल के स्टोर में घुस कर दवा लूटी और फर्नीचर, गद्दों व सरकारी अभिलेखों को आग के हवाले कर किया था।
फोर्स के साथ बंदियों को समझाने गए तत्कालीन जेल अधीक्षक राकेश कुमार, तत्कालीन सीडीओ एनपी पांडेय, तत्कालीन फतेहगढ़ कोतवाल अनूप कुमार पर बंदियों ने पथराव कर दिया था। इससे जेल अधीक्षक, सीडीओ पत्थर लगने से घायल हो गए थे। जेल अधीक्षक, सीडीओ और बंदी रक्षक संतोष दोहरे को लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कोतवाल अनूप कुमार निगम के हल्की चोटें आईं थीं।
बंदियों का हंगामा शांत होने के बाद जेलर धर्मपाल सिंह ने नामजद व अज्ञात में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने 33 बंदियों के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया था। आरोपियों की अनुपस्थिति के कारण सुभाष चंद्र की पत्रावली अलग कर सुनवाई हुई।
बचाव पक्ष के वकील व विशेष लोक अभियोजक अशोक कटियार, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अनुज प्रताप सिंह ने दलीलें पेश कीं। सुनवाई के बाद न्यायाधीश ने सुभाष निवासी अकराबाद थाना कंपिल को सरकारी कार्य में बांधा डालने, आगजनी, पथराव, अधिकारियों को घायल करने के जुर्म में दोषी पाकर सजा और जुर्माने से दंडित किया है।