{"_id":"60dcb37f8ebc3edfe449be54","slug":"corona-farrukhabad-news-knp6374824100","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना में धरती के भगवान बने मिसाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना में धरती के भगवान बने मिसाल
विज्ञापन
फर्रुखाबाद। कोरोना महामारी में धरती के भगवान ने सेवा की मिसाल कायम की है। इस कठिन दौर में कुछ डॉक्टरों ने फोन से मरीजों को इलाज बताकर उनके घर की खुशियां लौटाईं तो कुछ ने घर-घर जाकर मरीजों की सेवा की। ऐसे डॉक्टरों का समाज में सम्मान बढ़ा है।
देश में एक जुलाई को राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस मनाया जाता है। यह दिवस बिहार प्रांत के जनपद पटना खजांची रोड बनकीपुर में जन्मे डॉ.बिधान चंद्र रॉय के सम्मान में मनाया जाता है। उनका जन्म व मृत्यु एक जुलाई को हुई थी। वह पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री थे। वर्ष 1961 में उन्हें भारत रत्न से सम्मनित किया गया था। उनका समाज की सेवा में अमूल्य योगदान रहा। इसलिए एक जुलाई को राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस (डाक्टर्स-डे) मनाया जाता है। ये तो दिवस विशेष है, वास्तव में कोरोना में तो हर दिन ही डॉक्टर्स डे रहा। तमाम डॉक्टरों ने सेवा की मिसाल कायम की और लोगों की जान बचाई।
सिविल अस्पताल लिंजीगंज में तैनात डॉ.नवनीत गुप्ता ने रैपिड रिस्पांस टीम की जिम्मेदारी संभाली। वह होम आइसोलेट मरीजों को फोन कर उनके हाल-चाल लेने के साथ इलाज की सलाह देते रहे। जरूरत पड़ने पर वह खुद दवाई लेकर मरीजों के घर पहुंचते थे। यह उनकी दिनचर्या में शामिल था। वह दो बार कोरोना की चपेट में आने के बाद भी मरीजों की सेवा में जुटे रहे।
विज्ञापन
निजी चिकित्सक भले ही स्वास्थ्य सेवाओं के लिए कई बार तरह-तरह की चर्चाओं में रहे हों, लेकिन डॉ.प्रशांत श्रीवास्तव अपने कर्तव्य पर डटे हैं। कोरोना महामारी में निजी अस्पतालों की भी ओपीडी बंद रही। तब फोन पर संक्रमितों को नि:शुल्क सलाह देने के साथ दवा बताते रहे। उनकी सेवा के लिए कई सामाजिक संस्थाओं ने सम्मानित भी किया। डॉ.प्रशांत कहते हैं तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए टीका जरूर लगवाएं।
एल-2 अस्पताल के नोडल अधिकारी रहे आयुष चिकित्सक डा.प्रभात त्रिपाठी ने कोरोना महामारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि कोरोना से जंग जीतने के लिए टीका अवश्य लगवाएं। हर व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य की रक्षा सर्वोपरि समझना चाहिए। इसके लिए योग, प्राणायाम व स्वस्थ खानपान ही सही रास्ता है।
आयुष चिकित्सक डॉ.रामशंकर यादव ने एक माह एल-2 अस्पताल में ड्यूटी कर मरीजों की जान बचाने में महत्वपूर्ण योगदान किया। लोगों को सलाह दी कि फास्ट फूट से बचकर मौसमी फल का सेवन करें। आयुर्वेदिक दवाएं अश्वगंधा, गुर्च, तुलसी, मुलैठी का सेवन कर शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं। इससे कोरोना ही नहीं अन्य बीमारियों से भी वह जंग जीत सकते हैं।
विज्ञापन
देश में एक जुलाई को राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस मनाया जाता है। यह दिवस बिहार प्रांत के जनपद पटना खजांची रोड बनकीपुर में जन्मे डॉ.बिधान चंद्र रॉय के सम्मान में मनाया जाता है। उनका जन्म व मृत्यु एक जुलाई को हुई थी। वह पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री थे। वर्ष 1961 में उन्हें भारत रत्न से सम्मनित किया गया था। उनका समाज की सेवा में अमूल्य योगदान रहा। इसलिए एक जुलाई को राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस (डाक्टर्स-डे) मनाया जाता है। ये तो दिवस विशेष है, वास्तव में कोरोना में तो हर दिन ही डॉक्टर्स डे रहा। तमाम डॉक्टरों ने सेवा की मिसाल कायम की और लोगों की जान बचाई।
विज्ञापन
सिविल अस्पताल लिंजीगंज में तैनात डॉ.नवनीत गुप्ता ने रैपिड रिस्पांस टीम की जिम्मेदारी संभाली। वह होम आइसोलेट मरीजों को फोन कर उनके हाल-चाल लेने के साथ इलाज की सलाह देते रहे। जरूरत पड़ने पर वह खुद दवाई लेकर मरीजों के घर पहुंचते थे। यह उनकी दिनचर्या में शामिल था। वह दो बार कोरोना की चपेट में आने के बाद भी मरीजों की सेवा में जुटे रहे।
विज्ञापन
निजी चिकित्सक भले ही स्वास्थ्य सेवाओं के लिए कई बार तरह-तरह की चर्चाओं में रहे हों, लेकिन डॉ.प्रशांत श्रीवास्तव अपने कर्तव्य पर डटे हैं। कोरोना महामारी में निजी अस्पतालों की भी ओपीडी बंद रही। तब फोन पर संक्रमितों को नि:शुल्क सलाह देने के साथ दवा बताते रहे। उनकी सेवा के लिए कई सामाजिक संस्थाओं ने सम्मानित भी किया। डॉ.प्रशांत कहते हैं तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए टीका जरूर लगवाएं।
एल-2 अस्पताल के नोडल अधिकारी रहे आयुष चिकित्सक डा.प्रभात त्रिपाठी ने कोरोना महामारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि कोरोना से जंग जीतने के लिए टीका अवश्य लगवाएं। हर व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य की रक्षा सर्वोपरि समझना चाहिए। इसके लिए योग, प्राणायाम व स्वस्थ खानपान ही सही रास्ता है।
आयुष चिकित्सक डॉ.रामशंकर यादव ने एक माह एल-2 अस्पताल में ड्यूटी कर मरीजों की जान बचाने में महत्वपूर्ण योगदान किया। लोगों को सलाह दी कि फास्ट फूट से बचकर मौसमी फल का सेवन करें। आयुर्वेदिक दवाएं अश्वगंधा, गुर्च, तुलसी, मुलैठी का सेवन कर शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं। इससे कोरोना ही नहीं अन्य बीमारियों से भी वह जंग जीत सकते हैं।