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Farrukhabad News: सीएम के दरबार में पहुंची सीएमओ के भ्रष्टाचार की शिकायत
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फर्रुखाबाद। सीएमओ के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत अब मुख्यमंत्री के दरबार में पहुंच गई है। इसमें सीएमओ पर वसूली के लिए ट्रांसफर-पोस्टिंग करने व जनप्रतिनिधियों के लिए भी अभद्र भाषा का प्रयोग करने का आरोप लगाया गया है।
राजेपुर क्षेत्र के गांव फरीदपुर सैथरा निवासी भाजपा नेता प्रमोद कुमार ने मुख्यमंत्री से शिकायत की। कहा कि सीएमओ द्वारा जनप्रतिनिधियों के लिए अभद्र व अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया जाता है। वह सरकारी योजनाओं में रुचि न लेकर निजी स्वार्थ के कार्यों में लगे रहते हैं। वसूली के लिए कर्मचारियों का स्थानांतरण फिर दलालों के माध्यम से उगाही कर आदेश निरस्त किया जाता है। शिकायतकर्ता ने स्थानांतरण के रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की। कहा कि सीएमओ के नाम तीन सरकारी गाड़ियां हैं। इन गाड़ियों में डीजल-पेट्रोल लेकर वह अपने निजी कार्यों में खर्च करते हैं। पुरानी एंबेसडर की मरम्मत पर एक लाख रुपये खर्च किए गए, जो एक दिन भी नहीं चली और आठ माह से खड़ी है।
वहीं, एक आरटीआई कार्यकर्ता ने डीजल व गाड़ियों की सूचना मांगी तो उसे धमकी दी। चहेती फर्मों को टेंडर देकर महंगी दरों पर खरीद की जा रही है। इस मामले की एमएलसी प्रांशुदत्त द्विवेदी ने शासन में शिकायत की थी। इसके बाद जांच दबा दी गई। एक पटल सहायक ने अभद्रता से क्षुब्ध हाेकर आत्महत्या का प्रयास किया। इसकी शिकायत वित्तमंत्री सुरेश खन्ना से करने पर एडी ने जांच की और कार्रवाई शासन स्तर पर लंबित है। सीएमओ ने आयुष्मान कर्मचारी रवि प्रताप के साथ चौराहे पर मारपीट व गाली गलौज की। इसकी भी जांच लंबित है। कमीशनखोरी के चलते मोबियाबिंद ऑपरेशन का भुगतान 2018 से 2024 तक नहीं किया गया। इसकी भी जांच आवश्यक है।
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ड्रग वेयरहाउस के नए भवन का हस्तांतरण कमीशन के खेल में छह माह से लटका है। नेत्र परीक्षक की फर्जी भर्ती कर धन उगाही की गई। बाद में नियुक्तियां ही रद करवा दीं। शिकायत में आरोप लगाया गया कि करीब 30 माह से जमे सीएमओ के भ्रष्टाचार की जांचों को दबा दिया जाता है। प्रमोद कुमार की शिकायत पर एक सत्ताधारी विधायक ने जांच कराने और सीएमओ का स्थानांतरण करने की सिफारिश मुख्यमंत्री से की है। सीएमओ डॉ. अवनेंद्र कुमार ने शिकायत के संबंध में कुछ भी कहने से मना कर दिया।
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राजेपुर क्षेत्र के गांव फरीदपुर सैथरा निवासी भाजपा नेता प्रमोद कुमार ने मुख्यमंत्री से शिकायत की। कहा कि सीएमओ द्वारा जनप्रतिनिधियों के लिए अभद्र व अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया जाता है। वह सरकारी योजनाओं में रुचि न लेकर निजी स्वार्थ के कार्यों में लगे रहते हैं। वसूली के लिए कर्मचारियों का स्थानांतरण फिर दलालों के माध्यम से उगाही कर आदेश निरस्त किया जाता है। शिकायतकर्ता ने स्थानांतरण के रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की। कहा कि सीएमओ के नाम तीन सरकारी गाड़ियां हैं। इन गाड़ियों में डीजल-पेट्रोल लेकर वह अपने निजी कार्यों में खर्च करते हैं। पुरानी एंबेसडर की मरम्मत पर एक लाख रुपये खर्च किए गए, जो एक दिन भी नहीं चली और आठ माह से खड़ी है।
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वहीं, एक आरटीआई कार्यकर्ता ने डीजल व गाड़ियों की सूचना मांगी तो उसे धमकी दी। चहेती फर्मों को टेंडर देकर महंगी दरों पर खरीद की जा रही है। इस मामले की एमएलसी प्रांशुदत्त द्विवेदी ने शासन में शिकायत की थी। इसके बाद जांच दबा दी गई। एक पटल सहायक ने अभद्रता से क्षुब्ध हाेकर आत्महत्या का प्रयास किया। इसकी शिकायत वित्तमंत्री सुरेश खन्ना से करने पर एडी ने जांच की और कार्रवाई शासन स्तर पर लंबित है। सीएमओ ने आयुष्मान कर्मचारी रवि प्रताप के साथ चौराहे पर मारपीट व गाली गलौज की। इसकी भी जांच लंबित है। कमीशनखोरी के चलते मोबियाबिंद ऑपरेशन का भुगतान 2018 से 2024 तक नहीं किया गया। इसकी भी जांच आवश्यक है।
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ड्रग वेयरहाउस के नए भवन का हस्तांतरण कमीशन के खेल में छह माह से लटका है। नेत्र परीक्षक की फर्जी भर्ती कर धन उगाही की गई। बाद में नियुक्तियां ही रद करवा दीं। शिकायत में आरोप लगाया गया कि करीब 30 माह से जमे सीएमओ के भ्रष्टाचार की जांचों को दबा दिया जाता है। प्रमोद कुमार की शिकायत पर एक सत्ताधारी विधायक ने जांच कराने और सीएमओ का स्थानांतरण करने की सिफारिश मुख्यमंत्री से की है। सीएमओ डॉ. अवनेंद्र कुमार ने शिकायत के संबंध में कुछ भी कहने से मना कर दिया।