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महिला अस्पताल में प्रसूताओं से उगाही, अभद्रता पर सीएमएस का घेराव

Fri, 17 Apr 2020 06:21 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 17 Apr 2020 06:21 PM IST
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CMS siege on indecency, extortion from maternity
लोहिया महिला अस्पताल सीएमएस का घेराव करते फार्मासिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारी। - फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। डा. राममनोहर लोहिया महिला अस्पताल में प्रसव के लिए आने वाले मरीजों से जांच के नाम पर धन उगाही और अभद्रता से गुस्साए डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन के लोगों ने शुक्रवार को सीएमएस का घेराव कर लिया। पदाधिकारियों ने रातभर बिना डॉक्टर इमरजेंसी चलने और लॉकडाउन के वक्त भी गरीब गर्भवती को अभद्रता कर भगा देने का आरोप लगाया। इस दौरान कई बार दोनों पक्षों में जमकर नोकझोंक भी हुई। सीएमएस लिखित शिकायत करने पर जांच की बात कहते रहे।
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शुक्रवार को डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन के मंत्री चीफ फार्मासिस्ट जितेंद्र सिंह, ब्रजेश, मंजू शाक्य, अभिषेक शुक्ला, मुकेश दीक्षित और गरिमा सचान महिला अस्पताल के सीएमएस डा. कैलाश दुल्हानी के कक्ष में पहुंचे। उनका घेराव कर आरोप लगाया कि प्रसव के नाम पर जमकर उगाही हो रही है।
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जितेंद्र सिंह ने कहा कि बीते सप्ताह एक गरीब व्यक्ति उनके पास आया और एक हजार रुपये मांगे। रुपये देते वक्त पूछने पर उसने बताया कि बच्चा भर्ती है। उसकी 600 रुपये की जांच बाहर से लिखी गई है। दूसरे दिन वही व्यक्ति फिर आया। बोला, 400 रुपये दूसरी जांच के लिए ले लिए। फार्मासिस्टों ने बाहर से जांच कराने पर सवाल उठाया।
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चीफ फार्मासिस्ट मंजू शाक्य ने आरोप लगाया कि उनके घर काम करने आने वाली महिला को प्रसव होना था। उन्होंने खुद उसे भर्ती कराया। डॉक्टर ने ऑपरेशन को कहा। उन्होंने सामान्य प्रसव का आग्रह किया, मगर अभद्रता की गई। दर्द से कराहती गरीब गर्भवती को रात 11 बजे अस्पताल से ले जाना पड़ा। निजी अस्पताल में सामान्य प्रसव हो गया।
चीफ फार्मासिस्ट ने आरोप लगाया कि अस्पताल के ही चालक कौशलेंद्र मिश्र की रिश्तेदार को भी अस्पताल से भगा दिया गया था। अस्पताल कैंपस में ही उनके घर में प्रसव कराना पड़ा। इससे ज्यादा और क्या ज्यादती हो सकती है।
सीएमएस ने जब अस्पताल के स्टाफ का पक्ष लिया, तो फार्मासिस्ट भड़क गए। इससे दोनों पक्षों में काफी देर तक तूतू-मैमै होती रही। पदाधिकारियों ने कहा कि जब स्टाफ के लोगों का ये हाल है, तो अन्य लोगों के साथ क्या होता होगा? इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। अंत में एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि सीएमएस ने जांच नहीं कराई, तो वह उच्चाधिकारियों तक मामला ले जाएंगे।
आरोप निराधार, लिखित शिकायत आई तो होगी जांच: सीएमएस
सीएमएस डा. कैलाश दुल्हानी ने कहा कि फार्मासिस्टों के आरोप निराधार हैं। बच्चे की बाहर से जांच कराने के मामले में का कि जरूरी जांच थी। परिजनों की सहमति से बाहर से जांच कराई गई। बच्चे का सात दिन इलाज किया गया। गर्भवती के निजी अस्पताल में प्रसव मामले में कहा कि ऑपरेशन की सहमति दिन में ही मांगी थी, मगर परिजनों ने नहीं दी।

रात में सैफई रेफर करने को कहा गया, फिर भी वह तैयार नहीं हुए। बाद में खुद बाहर ले गए। चालक कौशलेंद्र के रिश्तेदार के मामले में बताया कि चालक ने जानकारी दी थी कि अस्पताल ले जाने से पहले ही घर पर प्रसव हो गया था। फिर भी यदि लिखित शिकायत आई, तो जांच कराएंगे।
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