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Farrukhabad News: 96 माह से वेतन न मिलने से क्षुब्ध शिक्षक ने जहर खाया

Wed, 27 Sep 2023 11:45 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 27 Sep 2023 11:45 PM IST
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Angered by not getting salary for 96 months, teacher consumes poison
फर्रुखाबाद। 96 माह से वेतन नहीं मिलने पर शिक्षक ने जहर खाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया। गंभीर हालत में शिक्षक को कायमगंज सीएचसी से रेफर कर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। हाईकोर्ट ने शिक्षक को सवेतन बहाल करने के आदेश दिए थे। उसके बाद भी वेतन नहीं दिया जा रहा था। शिक्षक ने आत्महत्या से पहले लिए सुसाइड नोट में एबीएसए सहित कई पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है।
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कायमगंज कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला काजम खां निवासी अनिल कुमार त्रिपाठी प्राथमिक स्कूल झब्बूपुर में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात थे। वह पिता गिरीश चंद्र की मृत्यु के बाद मृतक आश्रित में भर्ती हुए थे। जनवरी 2016 में फर्जी दस्तावेज से भर्ती होने के आरोप में अनिल को बर्खास्त कर दिया गया था। अनिल कुमार ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में रिट दायर की थी। हाईकोर्ट ने 11 मार्च 2016 में अनिल कुमार त्रिपाठी काे वेतन सहित बहाल करने के आदेश दिए थे। तत्कालीन बीएसए संदीप चौधरी ने खंड शिक्षा अधिकारी कायमगंज को अनिल कुमार त्रिपाठी का नियमित वेतन भुगतान करने के आदेश दिए थे। अनिल 17 मार्च 2016 को प्राथमिक स्कूल में योगदान आख्या देने गई। उनको स्टाफ ने हस्ताक्षर नहीं करने दिए।
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इस संबंध में अनिल ने अधिकारियों से पत्राचार किया। उसके बाद से शिक्षक प्रतिदिन स्कूल जाते रहे। लेकिन उनको वेतन का भुगतान नहीं किया गया। डीएम से लेकर अन्य अधिकारियों को प्रार्थना पत्र भी दिए। अनिल ने बुधवार को एसडीएम कायमगंज को हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी 96 माह से वेतन नहीं मिलने के संबंध में प्रार्थना पत्र दिया। इसमें एबीएसए कायमगंज व प्रधानाध्यापक सहित कई लोगों पर उत्पीड़न करने का आरोप लगाया।
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सुनवाई नहीं होने पर शिक्षक अनिल ने सुसाइड नोट लिखकर शाम को जहर खा लिया। अपनी मौत पर एबीएसए, लिपिक को जिम्मेदार होना बताया। गंभीर हालत में परिजनों ने शिक्षक को सीएचसी कायमगंज में भर्ती कराया। वहां हालत गंभीर होने पर डॉक्टर ने शिक्षक को लोहिया अस्पताल रेफर कर दिया। लोहिया अस्पताल में शिक्षक का उपचार चल रहा है।

बीएसए गौतम प्रसाद ने बताया कि शिक्षक अनिल ने 20 दिन पहले इस संबंध में उनको अवगत कराया था। चूकिं हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी शिक्षक ने योगदान आख्या नहीं दी थी। आदेश को आठ वर्ष होने जा रहे हैं। पांच वर्ष तक उनको शिक्षक को नियुक्त कर वेतन बहाल करने का अधिकार है। इस संबंध में सचिव को पत्र भेजकर मार्गदर्शन मांगा है। वह स्वयं दो दिन बाद मुख्यालय जाकर मार्गदर्शन लेंगे।
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