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Farrukhabad News: शृंगीरामपुर में इस साल 20 हजार अधिक श्रद्धालु आए

Tue, 04 Aug 2026 11:41 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 04 Aug 2026 11:41 PM IST
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20,000 more devotees visited Shringirampur this year.
फर्रुखाबाद/कमालगंज। देवाधिदेव महादेव के प्रिय श्रावण मास में श्रद्धा व भक्ति के उल्लास का उत्सव शुरू हो चुका है। पहले सोमवार को जलाभिषेक के लिए करीब एक लाख कांवड़ियों ने तीर्थनगरी शृंगीरामपुर में जल भरकर आस्था की कांवड़ उठाई। पिछली साल पहले सोमवार को जलाभिषेक के लिए करीब 80 हजार श्रद्धालु पहुंचे थे।
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गंगा तट पर बसी ऋषि शृंगी की तपस्थली शृंगीरामपुर में एक माह चलने वाला कांवड़ यात्रा उत्सव चल रहा है। सोमवार को महादेव के जलाभिषेक के लिए शुक्रवार से कांवड़िया आने लगते हैं। रविवार को सबसे ज्यादा भीड़ होती है। जल भरकर दौड़ते हुए ले जाने वाली डाक कांवड़ प्रायः रविवार को ही उठाई जाती है।
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इस बार रविवार को कांवड़ यात्रियों के रूप में श्रद्धा और भक्ति का सैलाब उमड़ा। आचार्य विजयकांत ने बताया कि इस साल पहले सोमवार के लिए करीब एक लाख भक्तों ने कांवड़ उठाई। जबकि पिछले साल 80 हजार लोग आए थे। कांवड़ यात्रियों की संख्या में हर साल बढ़ोतरी हो रही है। अमूमन पहले सोमवार की अपेक्षा दूसरे, तीसरे व चौथे सोमवार पर जलार्पण के लिए कांवड़ उठाने वालों की संख्या ज्यादा रहती है लेकिन इस बार पहला सोमवार भी संख्या के हिसाब से भारी रहा।
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वहीं, डाक कांवड़ पिछले वर्ष 80 से 100 रुपये थोक में उपलब्ध थी, जो अब बढ़कर 140 रुपये तक पहुंच गई है। इससे फुटकर बिक्री 250 रुपये जा पहुंची है। दुकानदार अवनीश कुमार कहते हैं कि कलश कांवड़ थोक का भाव 150 रुपये था। इस बार 190 रुपये पहुंच गया है। बांस की कांवड़ में भी महंगाई आई है। यह 40 रुपये बढ़कर दो सौ से तीन सौ रुपये तक पहुंच गई है। इसके अलावा पीतल के घुंघरुओं के भी दाम बढ़ गए हैं। शृंगीरामपुर में मध्य प्रदेश के ग्वालियर, भिंड व मुरैना, दतिया के अलावा इटावा, मैनपुरी व औरैया, कन्नौज से कांवड़ यात्री आते हैं। दिल्ली, मुरादाबाद व मथुरा से दुकानदार माल लेकर आए हैं।

लाल, पीली बनियान का जमाना गया
- मधुर पाठक का कहना है कि पहले लाल, पीली व अन्य रंग की बनियान चलती थी। इस बार पूरी तरह सफेद रंग की महाकाल वाली बनियान व काला नेकर छाया हुआ है। बनियान के थोक भाव करीब 20 प्रतिशत बढ़े हैं। रविवार रात डेढ़ किलोमीटर मेला क्षेत्र में भीड़ ही भीड़ दिख रही थी।
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