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हत्या में किशोर को दोषी पाकर तीन साल को संप्रेक्षण गृह भेजा
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फर्रुखाबाद। बैंक मैनेजर के पुत्र का अपहरण कर हत्या करने के मुकदमे में इंटर कालेज के संस्थापक व शीतगृह मालिक के पुत्र को किशोर न्याय बोर्ड ने दोषी करार दिया है। प्रधान मजिस्ट्रेट ने दोषसिद्ध किशोर को तीन साल के लिए विशेष गृह इटावा भेजा है।
फतेहगढ़ कोतवाली के मोहल्ला नवदिया निवासी कमल कुमार कटियार की पत्नी लीना कटियार इलाहाबाद बैंक शाखा बढ़पुर में मैनेजर हैं। उनके 20 वर्षीय पुत्र मधुसूदन ने वर्ष 2007 में ब्लूवेल स्कूल से 12 की परीक्षा दी थी। 11 अप्रैल 2007 को मधुसूदन को कुछ लोगों ने फोन कर घर के बाहर बुलाया। बाहर जाने के बाद वह घर नहीं लौटा। मां लीना कटियार ने 12 अप्रैल को पुत्र की गुमशुदगी दर्ज कराने के लिए फतेहगढ़ कोतवाली में प्रार्थना पत्र दिया। पुत्र के न मिलने पर 27 अप्रैल को मां लीना कटियार ने एसपी को प्रार्थना पत्र दिया। तब अपहरण में रिपोर्ट दर्ज की गई। बाद में फिरौती की मांग होने पर पुलिस सक्रिय हुई।
मुकदमा दर्ज होने के करीब 21 दिन बाद मधुसूदन का शव एक बाग में जमीन में गड़ा हुआ मिला था। इसमें एक विद्यालय के संस्थापक व शीतगृह मालिक के नाबालिग पुत्र और उसके साथियों का नाम प्रकाश में आया। पुलिस ने जांच कर विद्यालय संस्थापक के पुत्र के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया।
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विशेष अदालत एंटी डकैती कोर्ट से आरोपी को किशोर अपचारी घोषित किया गया। उसके मुकदमे की सुनवाई को पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड भेजी गई। मुकदमे की सुनवाई के बाद किशोर न्याय बोर्ड की प्रधान मजिस्ट्रेट शगुन पवार, सदस्य शकुंतला शाक्य व सदस्य रामनिवास यादव ने अपहरण, हत्या व साक्ष्य मिटाने के जुर्म में किशोर अपचारी को दोषी करार दिया। उसको किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम के तहत तीन साल के लिए विशेष गृह इटावा में सुधार के लिए भेजा है। इस मामले एक अन्य को सेशन अदालत से आजीवन कारावास की पहले ही सजा हो चुकी है। बाकी को दोष मुक्त होने पर छोड़ दिया गया था। एक अन्य अभी भी फरार चल रहा है।
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फतेहगढ़ कोतवाली के मोहल्ला नवदिया निवासी कमल कुमार कटियार की पत्नी लीना कटियार इलाहाबाद बैंक शाखा बढ़पुर में मैनेजर हैं। उनके 20 वर्षीय पुत्र मधुसूदन ने वर्ष 2007 में ब्लूवेल स्कूल से 12 की परीक्षा दी थी। 11 अप्रैल 2007 को मधुसूदन को कुछ लोगों ने फोन कर घर के बाहर बुलाया। बाहर जाने के बाद वह घर नहीं लौटा। मां लीना कटियार ने 12 अप्रैल को पुत्र की गुमशुदगी दर्ज कराने के लिए फतेहगढ़ कोतवाली में प्रार्थना पत्र दिया। पुत्र के न मिलने पर 27 अप्रैल को मां लीना कटियार ने एसपी को प्रार्थना पत्र दिया। तब अपहरण में रिपोर्ट दर्ज की गई। बाद में फिरौती की मांग होने पर पुलिस सक्रिय हुई।
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मुकदमा दर्ज होने के करीब 21 दिन बाद मधुसूदन का शव एक बाग में जमीन में गड़ा हुआ मिला था। इसमें एक विद्यालय के संस्थापक व शीतगृह मालिक के नाबालिग पुत्र और उसके साथियों का नाम प्रकाश में आया। पुलिस ने जांच कर विद्यालय संस्थापक के पुत्र के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया।
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विशेष अदालत एंटी डकैती कोर्ट से आरोपी को किशोर अपचारी घोषित किया गया। उसके मुकदमे की सुनवाई को पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड भेजी गई। मुकदमे की सुनवाई के बाद किशोर न्याय बोर्ड की प्रधान मजिस्ट्रेट शगुन पवार, सदस्य शकुंतला शाक्य व सदस्य रामनिवास यादव ने अपहरण, हत्या व साक्ष्य मिटाने के जुर्म में किशोर अपचारी को दोषी करार दिया। उसको किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम के तहत तीन साल के लिए विशेष गृह इटावा में सुधार के लिए भेजा है। इस मामले एक अन्य को सेशन अदालत से आजीवन कारावास की पहले ही सजा हो चुकी है। बाकी को दोष मुक्त होने पर छोड़ दिया गया था। एक अन्य अभी भी फरार चल रहा है।