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Farrukhabad News: मजरा पंखियन की मढ़ैया में 10 मकान गंगा की तेज धार में समाए, सड़कें कटीं
Sat, 23 Aug 2025 11:57 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Sat, 23 Aug 2025 11:57 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
फर्रुखाबाद (कंपिल)। गंगा के मुहाने पर बसे पंखियन की मड़ैया में दो दिन में ग्राम प्रधान समेत 10 लोगों के मकान तेज धार में समा गए। शनिवार को दो पक्के और दो झोपड़ी कट गईं। जिस स्थान पर पक्की सड़क थी, वहां अथाह जल बह रहा है। इससे ग्रामीणों में दहशत है।
उधर, प्रभावित इलाकों में सरकारी इंतजाम घुटनों पर हैं। पीडि़तों ने बताया कि मदद न मिलने से उधार लेकर पन्नी खरीदनी पड़ रही है। लोग घरों की छतों और सड़क किनारे तंबू डालकर रह रहे हैं।
सदर तहसील के गांव धर्मपुर कटरी के मजरा पंखियन की मढ़ैया पर गंगा का कहर जारी है। दो दिन में कटान ने पकड़ी तेजी के चलते ग्राम प्रधान शहनाज के पति शाहिद अली, अब्दुल रहमा्न, इदरीश, सलहर खातून, यार मोहम्मद समेत 10 मकान गंगा की धार में समा चुके।
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गंगा की धार का कटान इतना विकराल है कि चार घंटे में करीब 15 मीटर दूर प्रधान के मकान तक पहुंच गया। प्रधान पुत्र शान अली ने बताया कि इस बार गंगा सीधा कटान नहीं कर रही हैं।
प्रधान पुत्र ने बताया कि वन विभाग का पूरा वन क्षेत्र खत्म हो चुका है। यदि इसी तरह कटान होता रहा, तो देर रात तक आधा गांव खत्म हो जाएगा। पूरा गांव पानी से घिरा है। लोग छतों पर समय गुजार रहे हैं। ऐसे में घरों को खाली करके लोग गांव के दूसरी ओर बने मकानों में शरण लेने को मजबूर हैं। ग्रामीण रातें जागकर गुजारने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों ने छतों पर डाला डेरा कई सड़कों पर गुजर-बसर कर रहे : कंपिल में जल विभाग की ओर से गंगा का जलस्तर बढ़ने की सूचना के बाद बाढ़ प्रभावित गांवों के ग्रामीण दहशत में हैं। ग्रामीणों का कहना है की बाढ़ के कारण 15 दिनों से परेशानी उठा रहे हैं। जलस्तर बढ़ा तो और परेशानी बढ़ेगी।
वहीं कंपिल-बदायू मार्ग तीन स्थानों पर कटा होने से, लोग अटैनाघाट तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। घरों में पानी भरने से ग्रामीण छतों पर रह रहे हैं। वहीं कुछ ग्रामीण सड़क पर रहने को मजबूर हैं। ग्रामीण बताते हैं, कि इस बार सरकार की ओर से पन्नी, मोमबत्ती भी नहीं दी गई। लोगों से उधार लेकर वह पन्नी लेकर आए। सड़क किनारे डालकर परिवार के साथ रह रहे हैं। राशन न बांटे जाने से भी ग्रामीण परेशान हैं। कस्बे के मोहल्ला पट्टी मदारी निवासी कलक्टर (35) की 10 अगस्त क़ो, राईपुर चिंघटपुर के पास, तथा बृहस्पतिवार को गांव इकलहरा निवासी सिफा (12) की बाढ़ के पानी में डूबने से मौत हो गई थी।
खुरपका, मुंहपका की चपेट में आए जानवर : बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कीचड़, पानी में बंधे जानवरों के पैरों में खुरपका, मुंहपका, जैसी बीमारियों हो रहीं हैं। पशुओं के लिए कोई दवाई न बांटे जाने से ग्रामीणों में रोष है। ग्रामीणों ने बताया कि पशुओं के लिए झोपड़ी में रखा भूसा भी बाढ़ के पानी में बह गया। इससे दूर-दराज के खेतों में जाकर घास लानी पड़ रही है। उधर, शनिवार को स्वास्थ्य विभाग ने छह स्थानों पर शिविर लगाकर 207 मरीजों को दवाएं बांटी।
गड्ढे में फंसा ट्रक, 14 घंटे बाद निकाला : राजेपुर में बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुई कस्बा की सड़क में गड्ढे हो गए हैं। गड्ढों में फंसे ट्रकों को 14 घंटे बाद क्रेन और जेसीबी से निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। अमृतपुर से रात 10 बजे डबरी की ओर जा रहा एक ट्रक राजेपुर तिराहे के पास बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़क में फंस गया।
चालक ने ट्रक को निकालने का काफी प्रयास किया। बाद में एक क्रेन और मंगाई गई। जेसीबी और क्रेन से ट्रक को दोपहर 12 बजे बाहर निकाला गया। स्थानीय लोगों ने सड़क की मरम्मत कराने की मांग की।
तेज धार में कट रहीं सड़कें, संकट में ग्रामीण : अमृतपुर। गंगा की तेज धार से क्षेत्र की सड़कें काट रही है। शनिवार को तहसील क्षेत्र के गांव भुड़िया भेड़ा निवासी कौशल अग्निहोत्री, भूरे सोमवंशी, जयवीर कश्यप, संजीव कश्यप सुबह करीब आठ बजे राजेपुर जा रहे थे। गंगा के तेज बहाव के चलते अलीगढ़-इमादपुर सोमवंशी की सड़क नासा नाला की पुलिया के पास कट गई। ग्रामीणों के आने जाने लिए प्रशासन द्वारा नाव चलाई जा रही है। चारों लोग नाव पर सवार होकर कटी सड़क को पार कर रहे थे।
पानी का तेज बहाव होने के कारण नाव पलट गई। जिससे लोग बहने लगे। सड़क पर मौजूद ग्रामीणों ने चीखपुकार सुनकर बहते हुए लोगों को बचाने के लिए छलांग लगा दी। ग्रामीणाें ने सभी को सकुशल बाहर निकाल लिया।
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फर्रुखाबाद (कंपिल)। गंगा के मुहाने पर बसे पंखियन की मड़ैया में दो दिन में ग्राम प्रधान समेत 10 लोगों के मकान तेज धार में समा गए। शनिवार को दो पक्के और दो झोपड़ी कट गईं। जिस स्थान पर पक्की सड़क थी, वहां अथाह जल बह रहा है। इससे ग्रामीणों में दहशत है।
उधर, प्रभावित इलाकों में सरकारी इंतजाम घुटनों पर हैं। पीडि़तों ने बताया कि मदद न मिलने से उधार लेकर पन्नी खरीदनी पड़ रही है। लोग घरों की छतों और सड़क किनारे तंबू डालकर रह रहे हैं।
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सदर तहसील के गांव धर्मपुर कटरी के मजरा पंखियन की मढ़ैया पर गंगा का कहर जारी है। दो दिन में कटान ने पकड़ी तेजी के चलते ग्राम प्रधान शहनाज के पति शाहिद अली, अब्दुल रहमा्न, इदरीश, सलहर खातून, यार मोहम्मद समेत 10 मकान गंगा की धार में समा चुके।
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गंगा की धार का कटान इतना विकराल है कि चार घंटे में करीब 15 मीटर दूर प्रधान के मकान तक पहुंच गया। प्रधान पुत्र शान अली ने बताया कि इस बार गंगा सीधा कटान नहीं कर रही हैं।
प्रधान पुत्र ने बताया कि वन विभाग का पूरा वन क्षेत्र खत्म हो चुका है। यदि इसी तरह कटान होता रहा, तो देर रात तक आधा गांव खत्म हो जाएगा। पूरा गांव पानी से घिरा है। लोग छतों पर समय गुजार रहे हैं। ऐसे में घरों को खाली करके लोग गांव के दूसरी ओर बने मकानों में शरण लेने को मजबूर हैं। ग्रामीण रातें जागकर गुजारने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों ने छतों पर डाला डेरा कई सड़कों पर गुजर-बसर कर रहे : कंपिल में जल विभाग की ओर से गंगा का जलस्तर बढ़ने की सूचना के बाद बाढ़ प्रभावित गांवों के ग्रामीण दहशत में हैं। ग्रामीणों का कहना है की बाढ़ के कारण 15 दिनों से परेशानी उठा रहे हैं। जलस्तर बढ़ा तो और परेशानी बढ़ेगी।
वहीं कंपिल-बदायू मार्ग तीन स्थानों पर कटा होने से, लोग अटैनाघाट तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। घरों में पानी भरने से ग्रामीण छतों पर रह रहे हैं। वहीं कुछ ग्रामीण सड़क पर रहने को मजबूर हैं। ग्रामीण बताते हैं, कि इस बार सरकार की ओर से पन्नी, मोमबत्ती भी नहीं दी गई। लोगों से उधार लेकर वह पन्नी लेकर आए। सड़क किनारे डालकर परिवार के साथ रह रहे हैं। राशन न बांटे जाने से भी ग्रामीण परेशान हैं। कस्बे के मोहल्ला पट्टी मदारी निवासी कलक्टर (35) की 10 अगस्त क़ो, राईपुर चिंघटपुर के पास, तथा बृहस्पतिवार को गांव इकलहरा निवासी सिफा (12) की बाढ़ के पानी में डूबने से मौत हो गई थी।
खुरपका, मुंहपका की चपेट में आए जानवर : बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कीचड़, पानी में बंधे जानवरों के पैरों में खुरपका, मुंहपका, जैसी बीमारियों हो रहीं हैं। पशुओं के लिए कोई दवाई न बांटे जाने से ग्रामीणों में रोष है। ग्रामीणों ने बताया कि पशुओं के लिए झोपड़ी में रखा भूसा भी बाढ़ के पानी में बह गया। इससे दूर-दराज के खेतों में जाकर घास लानी पड़ रही है। उधर, शनिवार को स्वास्थ्य विभाग ने छह स्थानों पर शिविर लगाकर 207 मरीजों को दवाएं बांटी।
गड्ढे में फंसा ट्रक, 14 घंटे बाद निकाला : राजेपुर में बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुई कस्बा की सड़क में गड्ढे हो गए हैं। गड्ढों में फंसे ट्रकों को 14 घंटे बाद क्रेन और जेसीबी से निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। अमृतपुर से रात 10 बजे डबरी की ओर जा रहा एक ट्रक राजेपुर तिराहे के पास बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़क में फंस गया।
चालक ने ट्रक को निकालने का काफी प्रयास किया। बाद में एक क्रेन और मंगाई गई। जेसीबी और क्रेन से ट्रक को दोपहर 12 बजे बाहर निकाला गया। स्थानीय लोगों ने सड़क की मरम्मत कराने की मांग की।
तेज धार में कट रहीं सड़कें, संकट में ग्रामीण : अमृतपुर। गंगा की तेज धार से क्षेत्र की सड़कें काट रही है। शनिवार को तहसील क्षेत्र के गांव भुड़िया भेड़ा निवासी कौशल अग्निहोत्री, भूरे सोमवंशी, जयवीर कश्यप, संजीव कश्यप सुबह करीब आठ बजे राजेपुर जा रहे थे। गंगा के तेज बहाव के चलते अलीगढ़-इमादपुर सोमवंशी की सड़क नासा नाला की पुलिया के पास कट गई। ग्रामीणों के आने जाने लिए प्रशासन द्वारा नाव चलाई जा रही है। चारों लोग नाव पर सवार होकर कटी सड़क को पार कर रहे थे।
पानी का तेज बहाव होने के कारण नाव पलट गई। जिससे लोग बहने लगे। सड़क पर मौजूद ग्रामीणों ने चीखपुकार सुनकर बहते हुए लोगों को बचाने के लिए छलांग लगा दी। ग्रामीणाें ने सभी को सकुशल बाहर निकाल लिया।