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किसानों की आय बढ़ाने के लिए समन्वय जरूरी-कुलपति
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मसौधा। पर्यावरण को संतुलित करने एवं किसानों की आय को दूना करने के लिए समन्वय जरूरी है। इसके लिए कृषि विभाग से संबंधित सभी इकाइयों एवं कृषि विश्वविद्यालय के अधीनस्थ संचालित कृषि विज्ञान केंद्रों के बीच सामंजस्य स्थापित करने की जरूरत है।
तभी वैज्ञानिक सलाहकारों के बीच समन्वय स्थापित होगा और नई-नई तकनीक इजात होंगी। जिसे किसानों के बीच में ले जाने की जरूरत है।
जब तक किसान उत्पादन बढ़ाने की बारीकियों को नहीं समझेगा, तब तक उसे लाभकारी मूल्य नहीं अर्जित हो सकेगा। न ही किसानों की आय दूना किया जा सकता है। ये बातें नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय कुमारगंज के कुलपति प्रोफेसर जेएस संधू ने गुरुवार को कृषि विज्ञान केंद्र मसौधा में कृषि वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक में कही।
उन्होंने कहा कि विभिन्न जिलों के कृषि विज्ञान केंद्र के मानदंडों के अनुसार तकनीकी विधि को अपनाना अब नितांत आवश्यक हो गया है। यदि कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही टेक्नोलॉजी को किसान नहीं अपनाएगा तो किसान की माली हालत में सुधार नहीं आ सकता।
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ऐसी स्थिति में सबसे पहले कृषि विभाग के वैज्ञानिकों और कृषि विज्ञान केंद्रों के प्रशिक्षकों में समन्वय स्थापित हो और तकनीकी का आदान-प्रदान हो सके। सफल तकनीकी को किसान तक पहुंचाया जाए और उसे तकनीकी विधि से खेती करने की सलाह दी जाए, तभी उसकी आय को दोगुना किया जा सकता है। बैठक में जिला कृषि अधिकारी बीके सिंह, केबीके प्रभारी अधिकारी डॉ शशिकांत यादव आदि मौजूद रहे।
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तभी वैज्ञानिक सलाहकारों के बीच समन्वय स्थापित होगा और नई-नई तकनीक इजात होंगी। जिसे किसानों के बीच में ले जाने की जरूरत है।
जब तक किसान उत्पादन बढ़ाने की बारीकियों को नहीं समझेगा, तब तक उसे लाभकारी मूल्य नहीं अर्जित हो सकेगा। न ही किसानों की आय दूना किया जा सकता है। ये बातें नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय कुमारगंज के कुलपति प्रोफेसर जेएस संधू ने गुरुवार को कृषि विज्ञान केंद्र मसौधा में कृषि वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक में कही।
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उन्होंने कहा कि विभिन्न जिलों के कृषि विज्ञान केंद्र के मानदंडों के अनुसार तकनीकी विधि को अपनाना अब नितांत आवश्यक हो गया है। यदि कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही टेक्नोलॉजी को किसान नहीं अपनाएगा तो किसान की माली हालत में सुधार नहीं आ सकता।
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ऐसी स्थिति में सबसे पहले कृषि विभाग के वैज्ञानिकों और कृषि विज्ञान केंद्रों के प्रशिक्षकों में समन्वय स्थापित हो और तकनीकी का आदान-प्रदान हो सके। सफल तकनीकी को किसान तक पहुंचाया जाए और उसे तकनीकी विधि से खेती करने की सलाह दी जाए, तभी उसकी आय को दोगुना किया जा सकता है। बैठक में जिला कृषि अधिकारी बीके सिंह, केबीके प्रभारी अधिकारी डॉ शशिकांत यादव आदि मौजूद रहे।