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अयोध्या: फर्जी अंकपत्र मामले में भाजपा विधायक खब्बू तिवारी को 29 साल बाद सजा, पांच साल का कारावास

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अयोध्या Published by: लखनऊ ब्यूरो Updated Tue, 19 Oct 2021 12:22 PM IST
सार

अयोध्या से भाजपा विधायक खब्बू तिवारी को फर्जी अंकपत्र मामले में पांच साल कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। उन पर 13 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

भाजपा विधायक इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ खब्बू तिवारी।
भाजपा विधायक इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ खब्बू तिवारी। - फोटो : amar ujala
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विस्तार

फर्जी मार्क्सशीट के आधार पर अगली कक्षा में प्रवेश लेने के करीब 29 साल आठ माह पुराने एक मामले में कोर्ट ने गोसाईगंज विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ खब्बू समेत तीन लोगों को पांच-पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक पर 13-13 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। फैसला अपर जिला जज/विशेष न्यायाधीश एमपी एमएलए कोर्ट पूजा सिंह की अदालत से सोमवार को हुआ। विधायक के अधिवक्ता ने उच्च न्यायालय जाने की बात कही है।


अपर जिला शासकीय अधिवक्ता अरुण प्रकाश तिवारी ने बताया की घटना 1992 की है। साकेत महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर यदुवंश राम त्रिपाठी ने 18 फरवरी 1992 को इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ खब्बू, फूलचंद यादव और कृपा निधान तिवारी के खिलाफ फर्जी मार्क्सशीट के आधार पर अगली कक्षा में प्रवेश लेने की एफआईआर रामजन्मभूमि थाने में लिखाई थी।


मामले में विवेचना के बाद विवेचक ने सभी लोगों के खिलाफ 419, 420 समेत आईपीसी की अन्य धाराओं में आरोप पत्र अदालत में प्रस्तुत किया। निचली अदालत ने वर्ष 2018 में मामले को विचारण के लिए सेशन के सुपुर्द किया। इतने लंबे अंतराल के दौरान वादी प्रोफेसर यदुवंश राम त्रिपाठी की मौत हो गई। इसके अलावा मामले में अन्य गवाह भी मर गए।

तब मामले में दूसरे गवाह प्रस्तुत किए गए। जिन्होंने घटना का समर्थन किया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने तीनों को दोषी पाते हुए सोमवार को पांच-पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। प्रत्येक पर 13-13 हजार रुपये जुर्माना भी किया है। सुनवाई के समय तीनों कोर्ट में मौजूद थे। सजा भुगतने के लिए कोर्ट ने तीनों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया।

साकेत महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर यदुवंश राम त्रिपाठी द्वारा दर्ज कराई गई रिपोर्ट में आरोप था कि इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ खब्बू (वर्तमान में गोसाईगंज से भाजपा विधायक) ने 1990 में बीएससी प्रथम वर्ष की मार्कशीट में कूट रचना करके बीएससी द्वितीय वर्ष में प्रवेश लिया। फूलचंद यादव (पूर्व अध्यक्ष साकेत महाविद्यालय) ने 1986 में बीएससी प्रथम वर्ष की मार्कशीट में कूटरचना करके बीएससी द्वितीय वर्ष में प्रवेश लिया। वहीं कृपा निधान तिवारी (संरक्षक चाणक्य परिषद) ने 1989 में बीए तृतीय वर्ष की मार्कशीट में कूट रचना करके एलएलबी में प्रवेश लिया था।

राह्मण नेता के रूप में प्रदेश भर में है पहचान

बाहुबली विधायक एवं ब्राह्मण नेता के रूप में प्रदेश भर में खब्बू की पहचान है। अपर जिला जज तृतीय पूजा सिंह ने 420, 468 471 धारा के तहत 5 वर्ष की सजा सुनाई है। इन्द्रप्रताप तिवारी उर्फ खब्बू तिवारी सपा व बसपा से भी विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। विधायक के अधिवक्ता पवन तिवारी ने बताया कि अब वह उच्च न्यायालय की शरण लेंगे।

उन्होंने बताया कि 1992 में छात्र संघ साकेत महाविद्यालय के महामंत्री के दौरान तत्कालीन प्रधानाचार्य के द्वारा नकल अध्यादेश के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया था जिसको लेकर 30 साल बाद आज सुनवाई के दौरान सजा सुनाई गई है। मामले की चार्जशीट 13 साल बाद अदालत भेजी गई थी। अदालत में मुकदमे की पत्रावली से कई मूल दस्तावेज भी गायब हो गए।

अदालत में सभी दस्तावेजों की द्वितीय प्रतियां तैयार कराकर सुनवाई आगे बढ़ाई गई। वादी यदुवंशराम त्रिपाठी की मृत्यु भी केस परीक्षण के दौरान हो गई। साकेत महाविद्यालय के तत्कालीन अधिष्ठाता महेंद्र कुमार अग्रवाल, गोपनीय कार्यालय के रामबहादुर सिंह व अन्य गवाहों ने अदालत में गवाही दी।

सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अरुण प्रकाश त्रिपाठी ने अभियुक्तों को कड़ी से कड़ी सजा देने की दलीलें दीं। अदालत ने तीनों अभियुक्तों को कूटरचना के आरोप में पांच साल की जेल व आठ-आठ हजार रुपये जुर्माना तथा धोखाधड़ी के मामले में तीन-तीन साल की जेल व छह-छह हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। सोमवार की शाम सुनाए गए फैसले के समय विधायक व अन्य अभियुक्त कोर्ट में मौजूद रहे।
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