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खिलाड़ी राष्ट्र की पहचान, डोपिंग से बचें : रचना
Wed, 27 Mar 2019 11:27 PM IST
vivek vivek
न्यूज डेस्क, अमर उजाला अयोध्या
न्यूज डेस्क, अमर उजाला अयोध्या
Published by: vivek vivek
Updated Wed, 27 Mar 2019 11:27 PM IST
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अयोध्या अवध विवि में एक दिवसीय नेशनल कांफ्रेस में मंचस्थ मुख्य अतिथि व कुलपति।
- फोटो : अमर उजाला
भारतीय खेल प्राधिकरण की कार्यकारी निदेशक व अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित रचना गोविल ने कहा कि खिलाड़ी विश्व स्तर पर राष्ट्र की पहचान का निर्माण करता है। इसके लिए वो सदैव अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का प्रयत्न करता है। बदलते परिवेश में खेल जगत डोपिंग जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। आवश्यकता इस बात की है कि खेल में श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए ड्रग्स के सेवन से बचें।
वे बुधवार को डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के संत कबीर सभागार में एक दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस ‘एंटी डोपिंग इन स्पोर्ट्स’ में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहीं थीं। यह कॉन्फ्रेंस इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल एजूकेशन फाउंडेशन एंड स्पोर्ट्स सांइसेज, अवध विश्वविद्यालय, नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (नाडा) दिल्ली एवं फिजिकल एजूकेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया नई दिल्ली, एनएन पीजी कॉलेज नवाबगंज गोंडा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई।
गोविल ने कहा कि शक्तिवर्धक दवाओं के सेवन से खिलाड़ियों के स्वास्थ्य पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है तो दूसरी तरफ जांच में डोपिंग के दोषी पाये जाने पर खिलाड़ी पर प्रतिबंध भी लग जाता है। ऐसी स्थिति में खिलाड़ी, संस्था, देश को शर्मसार होना पड़ता है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी राष्ट्र की पहचान होते हैं। खेल की एक ट्रेनिंग प्रक्रिया होती है। इसका कोई शॉर्टकट नहीं होता।
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खेल में यदि जीत हासिल करनी है अपने दम पर जीतें, ड्रग्स के सेवन से हर संभव बचाव ही श्रेयष्कर है। अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने कहा कि खिलाड़ियों को प्रदर्शन के लिए प्राकृतिक तरीके ही अपनाने होंगे। डोपिंग खिलाड़ियों के लिए एक अभिशाप है। विश्वस्तर के विख्यात खिलाड़ियों में शुमार कई खिलाड़ियों का खेल जीवन डोपिंग की वजह से समाप्त हो गया।
आज उनका कोई नाम लेने वाला नहीं है। कहा प्राकृतिक रूप से शारीरिक क्षमता बनाये रखना एक मात्र विकल्प है। नशे के सेवन से बचना खिलाड़ियों का प्रथम दायित्व है। विशिष्ट अतिथि व फिजिकल एजूकेशन नई दिल्ली की महासचिव डॉ. पीयूष जैन ने कहा कि विश्व स्तर पर भारत का खेल प्रदर्शन अभी उत्साहजनक नहीं है।
खिलाड़ियों को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए स्वयं को प्रशिक्षित करना होगा। शारीरिक क्षमता की वृद्धि के लिए किसी भी प्रकार की डोपिंग से स्वयं को दूर रहना होगा मुख्य वक्ता डॉ. अंकुश गुप्ता ने कहा कि डोपिंग से खिलाड़ियों को सजग रहने की आवश्यकता है। डोपिंग के क्या कुप्रभाव हैं? इसके लिए खेल प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है।
ताकि खिलाड़ी ड्रग्स के नुकसान से परिचित हो सके। कार्यक्रम का स्वागत उद्बोधन इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल एजूकेशन फाउंडेशन एंड स्पोर्ट्स सांइसेज के निदेशक प्रो. एमपी सिंह ने किया। कार्यक्रम के सचिव डॉ. मुकेश वर्मा ने खिलाड़ियों के अच्छे प्रदर्शन के लिए डोपिंग से बचाव के उपाय सुझाए। इस कार्यक्रम में 150 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है।
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वे बुधवार को डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के संत कबीर सभागार में एक दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस ‘एंटी डोपिंग इन स्पोर्ट्स’ में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहीं थीं। यह कॉन्फ्रेंस इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल एजूकेशन फाउंडेशन एंड स्पोर्ट्स सांइसेज, अवध विश्वविद्यालय, नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (नाडा) दिल्ली एवं फिजिकल एजूकेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया नई दिल्ली, एनएन पीजी कॉलेज नवाबगंज गोंडा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई।
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गोविल ने कहा कि शक्तिवर्धक दवाओं के सेवन से खिलाड़ियों के स्वास्थ्य पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है तो दूसरी तरफ जांच में डोपिंग के दोषी पाये जाने पर खिलाड़ी पर प्रतिबंध भी लग जाता है। ऐसी स्थिति में खिलाड़ी, संस्था, देश को शर्मसार होना पड़ता है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी राष्ट्र की पहचान होते हैं। खेल की एक ट्रेनिंग प्रक्रिया होती है। इसका कोई शॉर्टकट नहीं होता।
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खेल में यदि जीत हासिल करनी है अपने दम पर जीतें, ड्रग्स के सेवन से हर संभव बचाव ही श्रेयष्कर है। अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने कहा कि खिलाड़ियों को प्रदर्शन के लिए प्राकृतिक तरीके ही अपनाने होंगे। डोपिंग खिलाड़ियों के लिए एक अभिशाप है। विश्वस्तर के विख्यात खिलाड़ियों में शुमार कई खिलाड़ियों का खेल जीवन डोपिंग की वजह से समाप्त हो गया।
आज उनका कोई नाम लेने वाला नहीं है। कहा प्राकृतिक रूप से शारीरिक क्षमता बनाये रखना एक मात्र विकल्प है। नशे के सेवन से बचना खिलाड़ियों का प्रथम दायित्व है। विशिष्ट अतिथि व फिजिकल एजूकेशन नई दिल्ली की महासचिव डॉ. पीयूष जैन ने कहा कि विश्व स्तर पर भारत का खेल प्रदर्शन अभी उत्साहजनक नहीं है।
खिलाड़ियों को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए स्वयं को प्रशिक्षित करना होगा। शारीरिक क्षमता की वृद्धि के लिए किसी भी प्रकार की डोपिंग से स्वयं को दूर रहना होगा मुख्य वक्ता डॉ. अंकुश गुप्ता ने कहा कि डोपिंग से खिलाड़ियों को सजग रहने की आवश्यकता है। डोपिंग के क्या कुप्रभाव हैं? इसके लिए खेल प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है।
ताकि खिलाड़ी ड्रग्स के नुकसान से परिचित हो सके। कार्यक्रम का स्वागत उद्बोधन इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल एजूकेशन फाउंडेशन एंड स्पोर्ट्स सांइसेज के निदेशक प्रो. एमपी सिंह ने किया। कार्यक्रम के सचिव डॉ. मुकेश वर्मा ने खिलाड़ियों के अच्छे प्रदर्शन के लिए डोपिंग से बचाव के उपाय सुझाए। इस कार्यक्रम में 150 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है।