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नगर निगम को उधार लेकर चुकाना पड़ा कर्मियों का वेतन
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अयोध्या। नगर निगम अयोध्या की वित्तीय हालत खराब है। कर्मचारियों की लंबी फौज को वेतन के लाले हैं। दूसरे मद से उधारी के जरिए कर्मियों को वेतन का भुगतान करना पड़ा है।
नगर निगम के सृजन को पांच साल से ज्यादा का समय बीत चुका है। नगर निगम बनने के बाद यहां अफसरों व कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ी। सफाई कर्मियों के साथ ही अन्य की संख्या में इजाफा हुआ।
निगम प्रशासन नागरिक सुविधाएं बढ़ाने के लिए प्रयासरत है। निगम के क्षेत्र में विस्तार भी कर दिया गया लेकिन निगम अब भी सरकार के बजट पर ज्यादा आश्रित है।
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जानकारों के मुताबिक अभी निगम की अपनी आय अपेक्षा के अनुरूप बढ़ नहीं पाई है लेकिन विश्व पर्यटन नगरी के रूप में विकसित करने के लिए अचानक सुविधाओं बढ़ाने का दबाव है। ऐसे में निगम की अर्थव्यवस्था मजबूत नहीं हो पा रही है।
ऐसा भी नहीं है कि निगम को पैसा नहीं मिल पा रहा है। विकास योजनाओं के लिए भरपूर पैसे मिलने की बात बताई जा रही है, लेकिन वेतन के मद में खस्ताहाली की स्थिति है।
पिछले दिनों वेतन बकाए को लेकर सफाई कर्मियों ने आंदोलन किया तो निगम प्रशासन को दूसरे मद से उधार लेकर कर्मचारियों को वेतन भुगतान करना पड़ा है।
सूत्रों के मुताबिक निगम को वेतन सहित अन्य खर्चों के लिए प्रतिमाह लगभग छह करोड़ 60 लाख रुपये की जरूरत होती है। पहले तो गाड़ी जैसे-तैसे चल रही थी, लेकिन पिछले वित्तीय साल के मार्च महीने से हालत इसलिए ज्यादा खराब हो गई कि सरकार से इस मद में जरूरत के मुताबिक बजट का पर्याप्त आवंटन नहीं हो पा रहा है।
बताया गया है कि पिछले मार्च में लगभग साढ़े तीन करोड़ रुपये का आवंटन निगम को मिला। अप्रैल में लगभग साढ़े चार करोड़ रुपये मिले। मई में भी स्थिति कुछ ऐसी ही स्थिति रही।
जिसके कारण लगातार बकाए के चलते वेतन बकाया हो गया और निगम प्रशासन को दूसरे मद से उधारी के जरिए सफाईकर्मियों को वेतन भुगतान किया गया। इस माह भी लगभग पांच करोड़ 64 लाख का आवंटन बताया गया है।
अब भी निगम में कर्मचारियों के वेतन सहित अन्य खर्चों के लिए लगभग एक करोड़ रुपये की कमी है। साथ पिछले बकाए की भरपाई करने के लिए निगम प्रशासन को ज्यादा पैसे की जरूरत है।
सफाईकर्मियों के वेतन भुगतान के लिए दूसरे मद से उधार लेना पड़ा। पिछले कई महीनों से कम बजट आवंटन के चलते वित्तीय स्थिति प्रभावित हुई है। इसके कारण समस्याएं उत्पन्न हुई हैं। निगम प्रशासन इसे दुरुस्त करने के लिए लगाता प्रयास कर रहा है।-नगेंद्र सिंह, वित्त नियंत्रक, नगर निगम अयोध्या
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नगर निगम के सृजन को पांच साल से ज्यादा का समय बीत चुका है। नगर निगम बनने के बाद यहां अफसरों व कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ी। सफाई कर्मियों के साथ ही अन्य की संख्या में इजाफा हुआ।
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निगम प्रशासन नागरिक सुविधाएं बढ़ाने के लिए प्रयासरत है। निगम के क्षेत्र में विस्तार भी कर दिया गया लेकिन निगम अब भी सरकार के बजट पर ज्यादा आश्रित है।
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जानकारों के मुताबिक अभी निगम की अपनी आय अपेक्षा के अनुरूप बढ़ नहीं पाई है लेकिन विश्व पर्यटन नगरी के रूप में विकसित करने के लिए अचानक सुविधाओं बढ़ाने का दबाव है। ऐसे में निगम की अर्थव्यवस्था मजबूत नहीं हो पा रही है।
ऐसा भी नहीं है कि निगम को पैसा नहीं मिल पा रहा है। विकास योजनाओं के लिए भरपूर पैसे मिलने की बात बताई जा रही है, लेकिन वेतन के मद में खस्ताहाली की स्थिति है।
पिछले दिनों वेतन बकाए को लेकर सफाई कर्मियों ने आंदोलन किया तो निगम प्रशासन को दूसरे मद से उधार लेकर कर्मचारियों को वेतन भुगतान करना पड़ा है।
सूत्रों के मुताबिक निगम को वेतन सहित अन्य खर्चों के लिए प्रतिमाह लगभग छह करोड़ 60 लाख रुपये की जरूरत होती है। पहले तो गाड़ी जैसे-तैसे चल रही थी, लेकिन पिछले वित्तीय साल के मार्च महीने से हालत इसलिए ज्यादा खराब हो गई कि सरकार से इस मद में जरूरत के मुताबिक बजट का पर्याप्त आवंटन नहीं हो पा रहा है।
बताया गया है कि पिछले मार्च में लगभग साढ़े तीन करोड़ रुपये का आवंटन निगम को मिला। अप्रैल में लगभग साढ़े चार करोड़ रुपये मिले। मई में भी स्थिति कुछ ऐसी ही स्थिति रही।
जिसके कारण लगातार बकाए के चलते वेतन बकाया हो गया और निगम प्रशासन को दूसरे मद से उधारी के जरिए सफाईकर्मियों को वेतन भुगतान किया गया। इस माह भी लगभग पांच करोड़ 64 लाख का आवंटन बताया गया है।
अब भी निगम में कर्मचारियों के वेतन सहित अन्य खर्चों के लिए लगभग एक करोड़ रुपये की कमी है। साथ पिछले बकाए की भरपाई करने के लिए निगम प्रशासन को ज्यादा पैसे की जरूरत है।
सफाईकर्मियों के वेतन भुगतान के लिए दूसरे मद से उधार लेना पड़ा। पिछले कई महीनों से कम बजट आवंटन के चलते वित्तीय स्थिति प्रभावित हुई है। इसके कारण समस्याएं उत्पन्न हुई हैं। निगम प्रशासन इसे दुरुस्त करने के लिए लगाता प्रयास कर रहा है।-नगेंद्र सिंह, वित्त नियंत्रक, नगर निगम अयोध्या