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रथयात्रा में शामिल हुईं तेलंगाना की राज्यपाल
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अयोध्या। रामनगरी स्थित दक्षिण परंपरा के मद्रासी मंदिर में इन दिनों अनुष्ठानों की धूम है। तमिलनाडु के समृद्ध नागरथर समुदाय द्वारा सांस्कृतिक उत्सव एवं रथयात्रा महोत्सव के क्रम में शुक्रवार को मंदिर से रथयात्रा निकाली गई।
इसमें तेलंगाना की राज्यपाल तमिलसाई सुंदर राजन भी शामिल हुईं। रथयात्रा में शामिल तेलंगाना की राज्यपाल तमिलसाई सुंदर राजन ने कहा कि अयोध्या आकर रामलला के दर्शन-पूजन करने सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
हमने देश की सुरक्षा और करोना के समापन के लिए भगवान से कामना की है। अयोध्या से तेलंगाना की परंपरा करीब 60 वर्षों से जुड़ी हुई है। भव्य राममंदिर बनने से अयोध्या की गौरव-महिमा में वृद्धि हो रही है। उन्होंने हनुमानगढ़ी में भी दर्शन-पूजन किया।
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इससे पहले सुबह भगवान श्रीराम, सीता, तीनों अनुजों व हनुमानजी महाराज का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन-अर्चन किया गया। इसके बाद रथ पर सवार कर मद्रासी मंदिर से भव्य रथयात्रा निकाली गई।
रथयात्रा मुख्यमार्ग से होते हुए सरयू तट पहुंची। जहां पूजन-अर्चन के बाद वापस मंदिर आकर रथयात्रा का समापन हुआ। रथयात्रा भक्तों की श्रद्धा का केंद्र बनी। रथयात्रा का जगह-जगह पुष्प अर्पित कर स्वागत किया गया।
रथयात्रा के साथ ही वार्षिक उत्सव के रूप में आयोजित हो रहा सांस्कृतिक उत्सव का भी समापन शुक्रवार को हो गया। वहीं गुरुवार शाम हुए कार्यक्रम में मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एम चोक्कलिंगम भी शामिल हुए।
उन्होंने प्रवचन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि अयोध्या से दक्षिण का संबंध अटूट है। राम ने मर्यादा, मित्रता, वीरता आदि के जो मानक स्थापित किए वह आज भी अनुकरणीय हैं। इस दौरान पल्लारामा स्वामी, वी नागप्पन, एम मुत्थु कुमार आदि मौजूद रहे।
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इसमें तेलंगाना की राज्यपाल तमिलसाई सुंदर राजन भी शामिल हुईं। रथयात्रा में शामिल तेलंगाना की राज्यपाल तमिलसाई सुंदर राजन ने कहा कि अयोध्या आकर रामलला के दर्शन-पूजन करने सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
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हमने देश की सुरक्षा और करोना के समापन के लिए भगवान से कामना की है। अयोध्या से तेलंगाना की परंपरा करीब 60 वर्षों से जुड़ी हुई है। भव्य राममंदिर बनने से अयोध्या की गौरव-महिमा में वृद्धि हो रही है। उन्होंने हनुमानगढ़ी में भी दर्शन-पूजन किया।
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इससे पहले सुबह भगवान श्रीराम, सीता, तीनों अनुजों व हनुमानजी महाराज का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन-अर्चन किया गया। इसके बाद रथ पर सवार कर मद्रासी मंदिर से भव्य रथयात्रा निकाली गई।
रथयात्रा मुख्यमार्ग से होते हुए सरयू तट पहुंची। जहां पूजन-अर्चन के बाद वापस मंदिर आकर रथयात्रा का समापन हुआ। रथयात्रा भक्तों की श्रद्धा का केंद्र बनी। रथयात्रा का जगह-जगह पुष्प अर्पित कर स्वागत किया गया।
रथयात्रा के साथ ही वार्षिक उत्सव के रूप में आयोजित हो रहा सांस्कृतिक उत्सव का भी समापन शुक्रवार को हो गया। वहीं गुरुवार शाम हुए कार्यक्रम में मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एम चोक्कलिंगम भी शामिल हुए।
उन्होंने प्रवचन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि अयोध्या से दक्षिण का संबंध अटूट है। राम ने मर्यादा, मित्रता, वीरता आदि के जो मानक स्थापित किए वह आज भी अनुकरणीय हैं। इस दौरान पल्लारामा स्वामी, वी नागप्पन, एम मुत्थु कुमार आदि मौजूद रहे।