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तनाव न भय, रोज की तरह बीता छह दिसंबर
फैजाबाद
Updated Tue, 06 Dec 2016 10:52 PM IST
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हनुमानगढ़ी पर मंगलवार को भोर से भक्तों का तांता लगा रहा।
- फोटो : अमर उजाला
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24 साल बाद छह दिसंबर...तनाव, न खौफ, हर जगह बात अमन, तरक्की और रोजगार की। मंगलवार को सुबह से शाम तक रामनगरी अपनी ही रौ में दिखी। यौमेगम और विजय दिवस युवाओं को नहीं भाया। बुजुर्ग लोग भी युवाओं के साथ सवाल पूछते दिखे कि मुख्यमंत्री की स्मार्ट सिटी में शामिल अयोध्या का क्या हुआ? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां के लिए बड़ा दिल क्योें नहीं दिखाते? हर तरह के विवाद से किनारा कर सभी तरक्की पर सियासत की वकालत करते दिखे। बोले, राजनेता अब सुप्रीम कोर्ट पर छोड़ दें अयोध्या विवाद का हल।
अयोध्या में मंगलवार हमेशा खास होता है, बजरंगबली की प्रधानतम पीठ हनुमान गढ़ी पर भोर की आरती में शामिल होने के लिए साधु-संत हों या गृहस्थों की टोली, कोहरे और ठंड को मात देती हुई डुबकी लगाने पहुंच जाती है। यहां गूंज उठती है सरयू मैया की जयकार और सीताराम की धुन।
मठ-मंदिरों में दर्शनार्थियों का तांता लगने लगा तो दिन चढ़ने के साथ ही अवकाश की मस्ती छा गई। तमाम लोग परिवार समेत सरयू में नौका बिहार करते दिखे। तो किशोरों में गली-घाट से मैदान तक क्रिकेट व कबड्डी का जोश।
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सरयू घाट पर सुल्तानपुर के सतीश श्रीवास्तव कहते हैं कि रात में सीताराम विवाह का संगीत और रामायण मेले की प्रस्तुतियों ने उनका आना धन्य कर दिया। 1994 में छह दिसंबर को अयोध्या आए थे तो पूरा दिन खौफ में गुजर गया था, अब सब सामान्य है।
घाट पर तिलक सजा रहे बाराबंकी के बाबा रामसुरेश दास बोले, अब फसाद और फसादी नहीं चाहिए। अयोध्या विवाद सुप्रीम कोर्ट पर छोड़ दें। गोंडा से आई गायत्री कहती हैं कि कैसा छह दिसंबर, सब तो ठीक है..। परिवार के साथ कल से घूम रही हूं। लेकिन भइया बच्चों को सड़क पर शौच कराना पड़ता है। वैष्णो देवी में कितनी अच्छी व्यवस्था है।
हनुमानगढ़ी पर भोर में पहुंचे अंबेडकरनगर के गुरुप्रसाद चौंकते हुए कहते हैं कि क्या आज छह दिसंबर है? यहां तो खूब भीड़ है, कहीं रास्ते में भी चेकिंग नहीं हुई। मुजफ्फरपुर बिहार से आये विनय ठाकुर ने हनुमानगढ़ी में मत्था टेका।
परिवार के साथ बिहार से आई कामिनी कुमारी को भी सीता-राम विवाह के साथ सरयू तट स्थित रामकथा पार्क में रामायण मेला का सांस्कृतिक वैभव नहीं भूला। हनुमानगढ़ी के पुजारी रमेश दास कहते हैं कि छह दिसंबर का कोई असर नहीं है।
मंदिर-मस्जिद को अब सुप्रीम कोर्ट पर छोड़ देना चाहिए। अयोध्या स्मार्ट सिटी बननी चाहिए। साकेत छात्रसंघ राजनीति से जुड़े युवा पुजारी राजू दास कहते है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मोदी से आगे बढ़कर बीते साल अयोध्या को स्मार्ट सिटी बनाने की बात की थी, चीफ सेक्रेटरी तक यहां आकर दौरा किए, लेकिन हुआ कुछ नहीं।
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अयोध्या में मंगलवार हमेशा खास होता है, बजरंगबली की प्रधानतम पीठ हनुमान गढ़ी पर भोर की आरती में शामिल होने के लिए साधु-संत हों या गृहस्थों की टोली, कोहरे और ठंड को मात देती हुई डुबकी लगाने पहुंच जाती है। यहां गूंज उठती है सरयू मैया की जयकार और सीताराम की धुन।
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मठ-मंदिरों में दर्शनार्थियों का तांता लगने लगा तो दिन चढ़ने के साथ ही अवकाश की मस्ती छा गई। तमाम लोग परिवार समेत सरयू में नौका बिहार करते दिखे। तो किशोरों में गली-घाट से मैदान तक क्रिकेट व कबड्डी का जोश।
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सरयू घाट पर सुल्तानपुर के सतीश श्रीवास्तव कहते हैं कि रात में सीताराम विवाह का संगीत और रामायण मेले की प्रस्तुतियों ने उनका आना धन्य कर दिया। 1994 में छह दिसंबर को अयोध्या आए थे तो पूरा दिन खौफ में गुजर गया था, अब सब सामान्य है।
घाट पर तिलक सजा रहे बाराबंकी के बाबा रामसुरेश दास बोले, अब फसाद और फसादी नहीं चाहिए। अयोध्या विवाद सुप्रीम कोर्ट पर छोड़ दें। गोंडा से आई गायत्री कहती हैं कि कैसा छह दिसंबर, सब तो ठीक है..। परिवार के साथ कल से घूम रही हूं। लेकिन भइया बच्चों को सड़क पर शौच कराना पड़ता है। वैष्णो देवी में कितनी अच्छी व्यवस्था है।
हनुमानगढ़ी पर भोर में पहुंचे अंबेडकरनगर के गुरुप्रसाद चौंकते हुए कहते हैं कि क्या आज छह दिसंबर है? यहां तो खूब भीड़ है, कहीं रास्ते में भी चेकिंग नहीं हुई। मुजफ्फरपुर बिहार से आये विनय ठाकुर ने हनुमानगढ़ी में मत्था टेका।
परिवार के साथ बिहार से आई कामिनी कुमारी को भी सीता-राम विवाह के साथ सरयू तट स्थित रामकथा पार्क में रामायण मेला का सांस्कृतिक वैभव नहीं भूला। हनुमानगढ़ी के पुजारी रमेश दास कहते हैं कि छह दिसंबर का कोई असर नहीं है।
मंदिर-मस्जिद को अब सुप्रीम कोर्ट पर छोड़ देना चाहिए। अयोध्या स्मार्ट सिटी बननी चाहिए। साकेत छात्रसंघ राजनीति से जुड़े युवा पुजारी राजू दास कहते है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मोदी से आगे बढ़कर बीते साल अयोध्या को स्मार्ट सिटी बनाने की बात की थी, चीफ सेक्रेटरी तक यहां आकर दौरा किए, लेकिन हुआ कुछ नहीं।