{"_id":"656cc71f742be34687096514","slug":"steps-taken-towards-self-reliance-from-self-employmentbecame-an-example-faizabad-news-c-13-1-lko1045-516999-2023-12-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ayodhya News: स्वरोजगार से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाया कदम....बन गईं नजीर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ayodhya News: स्वरोजगार से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाया कदम....बन गईं नजीर
Sun, 03 Dec 2023 11:51 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sun, 03 Dec 2023 11:51 PM IST
विज्ञापन
शबीना
- फोटो : संवाद
सिर्फ 10 महिलाओं को जोड़कर एक समूह के गठन के साथ शुरू हुआ सफर 1300 से अधिक महिलाओं के लिए रोजगार व आर्थिक तरक्की का संबल बन गया
रुदौली। शबीना खातून ने खुद को स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाया तो वह अयोध्या ही नहीं, प्रदेश की तमाम महिलाओं के लिए नजीर बन गईं। आठ साल पहले सिर्फ 10 महिलाओं को जोड़कर स्वयं सहायता समूह के गठन के साथ शुरू हुआ सफर आज ग्रामीण परिवेश की 1300 से अधिक महिलाओं के लिए रोजगार और आर्थिक तरक्की का संबल बन गया है।
मवई के संडवा गांव की शबीना नई तकनीक का उपयोग करते हुए हाइड्राेपोनिक विधि से स्ट्राबेरी व शिमला मिर्च की खेती भी करती हैं। वक्त के साथ उनके जीवन में तमाम बदलाव दिखे। उनका मोहम्मद शाह बाबा महिला स्वयं सहायता समूह आज जिले के अन्य समूहों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है। समूह गठन के महज दो माह के भीतर ही उन्होंने 72 महिलाओं को जोड़कर 10 अन्य समूह भी तैयार कर दिए थे। फिर यह सफर सफलता के कदम चूमते हुए आगे बढ़ता ही गया।
उनकी कामयाबी की कहानी से अन्य महिलाओं को प्रेरित करने के लिए डिस्ट्रिक्ट रिसोर्स पर्सन का भी दायित्व मिला। वे अब जिलेभर के समूहों की महिलाओं को आत्मनिर्भर होने के गुर सीखा रही हैं। इनके समूह की कई महिलाएं टेंट का कारोबार कर अपने परिवार के लिए आर्थिक संबल बन गई हैं। इस बुलंदी को हासिल करने में वह संघर्ष से कभी पीछे नहीं हटीं।
विज्ञापन
मवई ब्लाॅक में रोजगार के लिए प्रेरित कर अब तक जिन 1300 से अधिक महिलाओं को समूह से जोड़ा है, उनमें से कई खेती व पशुपालन का काम कर रही हैं। अचार, मुरब्बा, दस्तकारी, मुंज के काम के साथ सिलाई-कढाई को भी महिलाओं के लिए स्वरोजगार का माध्यम बनाया। इसी कड़ी में अगरबत्ती, दोना-पत्तल, बेसन की बनी खाद्य सामग्री का निर्माण भी महिलाओं को भा रहा है।
मौजूदा समय में शबीना मवई ब्लाक के सभी समूहों की अध्यक्ष के रूप में कार्य कर रही हैं। इनका अपना एनजीओ नई उड़ान सामाजिक उत्थान सेवा समिति के नाम से चलता है। इन्हें प्रशासन की ओर से प्रदेश के कई जिलों में अपनी तरक्की और संघर्ष की प्रेरक कहानी अन्य महिलाओं से साझा करते हुए उन्हे प्रशिक्षित करने के लिए भेजा जाता है।
विज्ञापन
रुदौली। शबीना खातून ने खुद को स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाया तो वह अयोध्या ही नहीं, प्रदेश की तमाम महिलाओं के लिए नजीर बन गईं। आठ साल पहले सिर्फ 10 महिलाओं को जोड़कर स्वयं सहायता समूह के गठन के साथ शुरू हुआ सफर आज ग्रामीण परिवेश की 1300 से अधिक महिलाओं के लिए रोजगार और आर्थिक तरक्की का संबल बन गया है।
मवई के संडवा गांव की शबीना नई तकनीक का उपयोग करते हुए हाइड्राेपोनिक विधि से स्ट्राबेरी व शिमला मिर्च की खेती भी करती हैं। वक्त के साथ उनके जीवन में तमाम बदलाव दिखे। उनका मोहम्मद शाह बाबा महिला स्वयं सहायता समूह आज जिले के अन्य समूहों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है। समूह गठन के महज दो माह के भीतर ही उन्होंने 72 महिलाओं को जोड़कर 10 अन्य समूह भी तैयार कर दिए थे। फिर यह सफर सफलता के कदम चूमते हुए आगे बढ़ता ही गया।
विज्ञापन
उनकी कामयाबी की कहानी से अन्य महिलाओं को प्रेरित करने के लिए डिस्ट्रिक्ट रिसोर्स पर्सन का भी दायित्व मिला। वे अब जिलेभर के समूहों की महिलाओं को आत्मनिर्भर होने के गुर सीखा रही हैं। इनके समूह की कई महिलाएं टेंट का कारोबार कर अपने परिवार के लिए आर्थिक संबल बन गई हैं। इस बुलंदी को हासिल करने में वह संघर्ष से कभी पीछे नहीं हटीं।
विज्ञापन
मवई ब्लाॅक में रोजगार के लिए प्रेरित कर अब तक जिन 1300 से अधिक महिलाओं को समूह से जोड़ा है, उनमें से कई खेती व पशुपालन का काम कर रही हैं। अचार, मुरब्बा, दस्तकारी, मुंज के काम के साथ सिलाई-कढाई को भी महिलाओं के लिए स्वरोजगार का माध्यम बनाया। इसी कड़ी में अगरबत्ती, दोना-पत्तल, बेसन की बनी खाद्य सामग्री का निर्माण भी महिलाओं को भा रहा है।
मौजूदा समय में शबीना मवई ब्लाक के सभी समूहों की अध्यक्ष के रूप में कार्य कर रही हैं। इनका अपना एनजीओ नई उड़ान सामाजिक उत्थान सेवा समिति के नाम से चलता है। इन्हें प्रशासन की ओर से प्रदेश के कई जिलों में अपनी तरक्की और संघर्ष की प्रेरक कहानी अन्य महिलाओं से साझा करते हुए उन्हे प्रशिक्षित करने के लिए भेजा जाता है।

शबीना- फोटो : संवाद