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Ayodhya News: आइकोनोग्राफी से मूर्ति उकेरने का ट्रायल शुरू
Thu, 01 Jun 2023 12:07 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Thu, 01 Jun 2023 12:07 AM IST
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अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि में निर्माणाधीन राममंदिर वास्तुकला की दृष्टि से भी अनुपम होगा। राममंदिर के स्तंभों सहित परकोटा में रामकथा व अलग-अलग कलाकृतियों का चित्रण होना है। इसके लिए तीन मूर्तिकारों का चयन किया गया है। आइकोनोग्राफी (प्रतिमा विज्ञान) तकनीक से पत्थरों पर मूर्तियां उकेरने का ट्रायल भी मूर्तिकारों ने शुरू कर दिया है।
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बुधवार को बताया कि पूरे मंदिर में धार्मिक चित्रांकन किया जाना है। इसके लिए इंजीनियरों ने आइकोनोग्राफी तकनीक अपनाने का सुझाव दिया है। दशावतार, नवग्रह, शक्तिपीठ, शुभता के संकेत कलश, पुष्प, स्वास्तिक आदि का चित्रण होना है। हमारे शास्त्रों व पौराणिक ग्रंथों में मंदिर में बनने वाली मूर्तियों का जो वर्णन है, उसकी जानकारी एकत्र की गई है। बताया कि आइकोनोग्राफी को हिंदी में प्रतिमा विज्ञान कहा जाता है। किसी भी प्रतिमा को किस तरह बनाया गया है, उसके आधार पर हम उसका अध्ययन करते हैं। इस तकनीक से मूर्तियों को मनचाहा आकार देने में आसानी होती है। उनके टूटने का खतरा कम रहता है। आइकोनोग्राफी से मूर्ति पर चित्रण करने से यह मूर्ति किस काल की बनी है, यह भी पता लगाया जा सकता है।
चंपत राय ने बताया कि मूर्ति निर्माण के लिए अलग-अलग ब्लॉक बनाए जाएंगे। हर एक ब्लॉक पांच से छह फीट लंबा होगा। मोटाई 2.5 फीट होगी। पहले मूर्तिकार ड्राइंग बनाएंगे। उसके बाद मिट्टी व फाइबर पर मूर्ति बनेगी। फाइनल स्वरूप तय होने पर मूर्ति बनाने के लिए राजस्थान भेजा जाएगा, वहां से मूर्ति बनकर आएगी।
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श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बुधवार को बताया कि पूरे मंदिर में धार्मिक चित्रांकन किया जाना है। इसके लिए इंजीनियरों ने आइकोनोग्राफी तकनीक अपनाने का सुझाव दिया है। दशावतार, नवग्रह, शक्तिपीठ, शुभता के संकेत कलश, पुष्प, स्वास्तिक आदि का चित्रण होना है। हमारे शास्त्रों व पौराणिक ग्रंथों में मंदिर में बनने वाली मूर्तियों का जो वर्णन है, उसकी जानकारी एकत्र की गई है। बताया कि आइकोनोग्राफी को हिंदी में प्रतिमा विज्ञान कहा जाता है। किसी भी प्रतिमा को किस तरह बनाया गया है, उसके आधार पर हम उसका अध्ययन करते हैं। इस तकनीक से मूर्तियों को मनचाहा आकार देने में आसानी होती है। उनके टूटने का खतरा कम रहता है। आइकोनोग्राफी से मूर्ति पर चित्रण करने से यह मूर्ति किस काल की बनी है, यह भी पता लगाया जा सकता है।
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चंपत राय ने बताया कि मूर्ति निर्माण के लिए अलग-अलग ब्लॉक बनाए जाएंगे। हर एक ब्लॉक पांच से छह फीट लंबा होगा। मोटाई 2.5 फीट होगी। पहले मूर्तिकार ड्राइंग बनाएंगे। उसके बाद मिट्टी व फाइबर पर मूर्ति बनेगी। फाइनल स्वरूप तय होने पर मूर्ति बनाने के लिए राजस्थान भेजा जाएगा, वहां से मूर्ति बनकर आएगी।
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