{"_id":"656cc82e50248420200b313c","slug":"sometimes-the-chirping-started-in-november-this-time-there-is-silence-even-in-december-faizabad-news-c-13-knp1002-516341-2023-12-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ayodhya News: कभी नवंबर में शुरू हो जाती थी चहचहाहट, इस बार दिसंबर में भी सन्नाटा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ayodhya News: कभी नवंबर में शुरू हो जाती थी चहचहाहट, इस बार दिसंबर में भी सन्नाटा
Sun, 03 Dec 2023 11:55 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sun, 03 Dec 2023 11:55 PM IST
विज्ञापन
रुदौली में स्थित पचलो झील।
- फोटो : संवाद
रुदौली। पर्यावरण के साथ खिलवाड़ की आंच अब परिंदों तक जा पहुंची है। हर वर्ष सर्दी शुरू होते ही विदेशी पक्षियों का कुनबा रुदौली तहसील के पचलो गांव के पास स्थित झील में आ जाता था। झील भी विदेशी मेहमानों के स्वागत के लिए तैयार हो जाती थी। साइबेरियन सारस का यहां अहम ठिकाना हुआ करता था। यह सिलसिला नवंबर आते ही शुरू हो जाता था, लेकिन इस बार यहां सन्नाटा है।
विदेशी मेहमानों के मोहभंग के पीछे झील की दुर्दशा भी है। झील के संरक्षण की ओर किसी जिम्मेदार ने ध्यान नहीं दिया। इस लिए पक्षियों की चहचहाहट यहां से गायब हो रही है। हालांकि, वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस बार सर्दी कम पड़ रही है। पहले की तुलना में अब रात में गांव में अधिक उजाला होने लगा है। इससे पक्षियों को वह माहौल नहीं मिलता जो कुछ वर्षों पहले मिलता था।
ग्रामीण कुंदन जायसवाल, सईद अहमद, आशीष कुमार बताते हैं कि दो-तीन साल पहले तक तमाम तरह के पक्षी इस झील में आते थे। इन्हें देखने के लिए पर्यटक भी दूरदराज से आते थे। सुनील कुमार और राजेश मौर्य ने बताया कि अब झील में उनके खाने का उचित प्रबंध नहीं है। अगल-बगल के खेतों में कीटनाशक दवाओं का इस्मेमाल होने से भी वह अब यहां नजर नहीं आते।
विज्ञापन
वरिष्ठ साहित्यकार और पक्षी प्रेमी डॉ. अनवर हुसैन खां ने बताया कि पक्षी हवा में उड़ते समय ही देख लेते हैं कि खाने और रहने की कैसी व्यवस्था है। यहां तालाब और झील में पानी का जलस्तर कम है। इनकी साफ-सफाई भी नहीं होती। ऐसा ही रहा तो आने वाले वर्षों में झील का पानी भी खत्म हो जाएगा। विदेशी पक्षी अपने समय से आते थे। तीन-चार महीने प्रवास के बाद चले जाते थे।
तालाब के आसपास आवारा जानवरों का घूमना, झील में कीट-पतंगों की कमी, जंगली जानवर आदि भी पक्षियों के मोहभंग का कारण हैं। फॉरेस्टर नरेंद्र राव ने बताया कि यह झील गांव के किनारे स्थित है। यहां रात में उजाला अधिक होने के कारण पक्षी नहीं ठहरते हैं। पक्षी जलवायु के हिसाब से विचरण करते हैं। जिन देशों में ठंडक हो रही है, वहां प्रवास कर गए होंगे। पक्षी जब झीलों में आ जाते हैं तो उनकी सुरक्षा के लिए वन कर्मियों की टीम लगाई जाती है।
विज्ञापन
विदेशी मेहमानों के मोहभंग के पीछे झील की दुर्दशा भी है। झील के संरक्षण की ओर किसी जिम्मेदार ने ध्यान नहीं दिया। इस लिए पक्षियों की चहचहाहट यहां से गायब हो रही है। हालांकि, वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस बार सर्दी कम पड़ रही है। पहले की तुलना में अब रात में गांव में अधिक उजाला होने लगा है। इससे पक्षियों को वह माहौल नहीं मिलता जो कुछ वर्षों पहले मिलता था।
विज्ञापन
ग्रामीण कुंदन जायसवाल, सईद अहमद, आशीष कुमार बताते हैं कि दो-तीन साल पहले तक तमाम तरह के पक्षी इस झील में आते थे। इन्हें देखने के लिए पर्यटक भी दूरदराज से आते थे। सुनील कुमार और राजेश मौर्य ने बताया कि अब झील में उनके खाने का उचित प्रबंध नहीं है। अगल-बगल के खेतों में कीटनाशक दवाओं का इस्मेमाल होने से भी वह अब यहां नजर नहीं आते।
विज्ञापन
वरिष्ठ साहित्यकार और पक्षी प्रेमी डॉ. अनवर हुसैन खां ने बताया कि पक्षी हवा में उड़ते समय ही देख लेते हैं कि खाने और रहने की कैसी व्यवस्था है। यहां तालाब और झील में पानी का जलस्तर कम है। इनकी साफ-सफाई भी नहीं होती। ऐसा ही रहा तो आने वाले वर्षों में झील का पानी भी खत्म हो जाएगा। विदेशी पक्षी अपने समय से आते थे। तीन-चार महीने प्रवास के बाद चले जाते थे।
तालाब के आसपास आवारा जानवरों का घूमना, झील में कीट-पतंगों की कमी, जंगली जानवर आदि भी पक्षियों के मोहभंग का कारण हैं। फॉरेस्टर नरेंद्र राव ने बताया कि यह झील गांव के किनारे स्थित है। यहां रात में उजाला अधिक होने के कारण पक्षी नहीं ठहरते हैं। पक्षी जलवायु के हिसाब से विचरण करते हैं। जिन देशों में ठंडक हो रही है, वहां प्रवास कर गए होंगे। पक्षी जब झीलों में आ जाते हैं तो उनकी सुरक्षा के लिए वन कर्मियों की टीम लगाई जाती है।

रुदौली में स्थित पचलो झील।- फोटो : संवाद