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समाज सुधारक थे गोस्वामी तुलसीदास
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 23 Aug 2015 11:03 PM IST
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श्रीमणिराम दास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास ने गोस्वामी तुलसी दास जी के चित्र पर दीप प्रज्वलित कर व्याख्यान व प्रवचन सत्र का शुभारंभ किया।
अध्यक्षता करते हुए कहा कि गोस्वामी जी युगदृष्टा, श्रेष्ठ भक्त व समाज सुधारक थे। उन्होंने रामकथा के माध्यम से समाज में जीवन मूल्यों की स्थापना की। कहा कि गोस्वामी जी ने संपूर्ण श्री राम साहित्य में सत्संग और नाम वंदना की विशेष चर्चा की।
आज भी मानस के हर एक शब्द व पंक्तियां समाज को नई प्रेरणा व चेतना प्रदान करते हैं। गोष्ठी व प्रवचन के माध्यम से महंत रामानंद दास, महंत राम अवतार दास, महंत नारायणाचारी आदि ने गोस्वामी जी को भावांजलि अर्पित की। संचालन वैदिकादर्श संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डा. रामकृष्ण शास्त्री ने किया।
पंचमुखी गुजराती हनुमान मंदिर रामघाट व श्रीरामचरितमानस विद्यापीठ में आयोजित जयंती समारोह में महंत कमलादास ने कहा गोस्वामी जी का संपूर्ण जीवन लोकमंगल के लिए समर्पित था। कहा कि मानस के लिए जो यह कहा जाता है कि इसका प्रारंभ तो अयोध्या जी में हुआ पर समापन गोस्वामी जी ने काशी में किया।
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यह सर्वथा अतार्किक प्रतीत होता है। मानस में ही पर्याप्त प्रमाण है जिससे स्वत: सिद्ध होता है कि संपूर्ण श्रीरामचरितमानस, अयोध्या में ही रची गयी, जिस प्रकार श्री राम प्रभु सभी के हैं पर अयोध्या के विशेष रूप से हैं उसी प्रकार गोस्वामी जी व उनकी रचना भी सबकी होते हुए अयोध्या की ही विशेष रूप से है। जयंती पर आयोजित प्रतियोगिता में विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कृत कर सम्मानित किया गया।
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अध्यक्षता करते हुए कहा कि गोस्वामी जी युगदृष्टा, श्रेष्ठ भक्त व समाज सुधारक थे। उन्होंने रामकथा के माध्यम से समाज में जीवन मूल्यों की स्थापना की। कहा कि गोस्वामी जी ने संपूर्ण श्री राम साहित्य में सत्संग और नाम वंदना की विशेष चर्चा की।
आज भी मानस के हर एक शब्द व पंक्तियां समाज को नई प्रेरणा व चेतना प्रदान करते हैं। गोष्ठी व प्रवचन के माध्यम से महंत रामानंद दास, महंत राम अवतार दास, महंत नारायणाचारी आदि ने गोस्वामी जी को भावांजलि अर्पित की। संचालन वैदिकादर्श संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डा. रामकृष्ण शास्त्री ने किया।
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पंचमुखी गुजराती हनुमान मंदिर रामघाट व श्रीरामचरितमानस विद्यापीठ में आयोजित जयंती समारोह में महंत कमलादास ने कहा गोस्वामी जी का संपूर्ण जीवन लोकमंगल के लिए समर्पित था। कहा कि मानस के लिए जो यह कहा जाता है कि इसका प्रारंभ तो अयोध्या जी में हुआ पर समापन गोस्वामी जी ने काशी में किया।
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यह सर्वथा अतार्किक प्रतीत होता है। मानस में ही पर्याप्त प्रमाण है जिससे स्वत: सिद्ध होता है कि संपूर्ण श्रीरामचरितमानस, अयोध्या में ही रची गयी, जिस प्रकार श्री राम प्रभु सभी के हैं पर अयोध्या के विशेष रूप से हैं उसी प्रकार गोस्वामी जी व उनकी रचना भी सबकी होते हुए अयोध्या की ही विशेष रूप से है। जयंती पर आयोजित प्रतियोगिता में विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कृत कर सम्मानित किया गया।