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सूखे की आशंका से किसानों के होश उड़े
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 05 Aug 2015 11:00 PM IST
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लेकिन प्रशासन की तैयारी केवल कागजों में है। बिजली और नलकूप धोखा दे रहे हैं। सूखे की इस आशंका से किसानों के होश उड़ गए हैं।
किसान अब तक की बरसात को लेकर परेशान हो रहा है। जून से जुलाई तक हुई बारिश के आंकड़े भी अब इस ओर इशारा कर रहे हैं। वास्तव में जून से जुलाई तक अच्छी बारिश मानी जाती है।
अगस्त से बारिश का औसत गिरने लगता है। लेकिन जून और जुलाई में इस बार औसत बारिश भी नहीं हुई है।जिले में बिजली आपूर्ति के हालात बद से बदतर हो गई है।
दो शिफ्टों में की जा रही आपूर्ति में कहने के लिए तो दस घंटे की आपूर्ति की जा रही है। लेकिन कटौती के बाद घंटे ही नहीं कम होते बल्कि सिंचाई के लिए रातों की नींद उड़ानी पड़ती है।
जिले के दर्जनों सरकारी नलकूप यांत्रिक या विद्युत दोष के चलते बंद पड़े हैं। माइनरों की टेल तक पानी न पहुंचने की शिकायतें आम हैं। ऐसे में बारिश न होने से सूखे के संकेत साफ दिख रहे हैं।
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शासन व प्रशासन से अब तक सूखे को लेकर कार्ययोजना चाहे कुछ भी हो लेकिन कार्रवाई अभी जमीन पर नहीं है। किसान ओम प्रकाश सिंह कहते है कि बारिश न होने से सूखे के लक्षण स्पष्ट होने लगे हैं।
यदि अगले तीन-चार दिन में अच्छी बारिश न हुई तो नुकसान होना शुरू हो जाएगा। राम अकबाल वर्मा कहते हैं कि अगले कुछ दिनों में बारिश न हुई तो किसानों को नुकसान होगा।
जिला कृषि अधिकारी डॉ. राजेश कुमार यादव का कहना है कि औसत बारिश मानक से काफी रिकार्ड होने से सूखे के हालात बन गए हैं। लेकिन अभी अगस्त में बारिश होने पर हालात सुधर सकते हैं। जिला प्रशासन सूखा से निपटने के लिए सतर्क है, हर संभव वैकल्पिक इंतजाम किए जा रहे हैं।
मौसम वैज्ञानिक डॉ. अमरनाथ मिश्र ने बताया कि बारिश मानक के अनुसार नहीं हो रही है। जिला सूखे की ओर बढ़ रहा है। अगस्त में ही बारिश कम होने के आसार दिख रहे हैं, ऐसे में सूखे की मार किसान को झेलनी पड़ सकती है।
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किसान अब तक की बरसात को लेकर परेशान हो रहा है। जून से जुलाई तक हुई बारिश के आंकड़े भी अब इस ओर इशारा कर रहे हैं। वास्तव में जून से जुलाई तक अच्छी बारिश मानी जाती है।
अगस्त से बारिश का औसत गिरने लगता है। लेकिन जून और जुलाई में इस बार औसत बारिश भी नहीं हुई है।जिले में बिजली आपूर्ति के हालात बद से बदतर हो गई है।
दो शिफ्टों में की जा रही आपूर्ति में कहने के लिए तो दस घंटे की आपूर्ति की जा रही है। लेकिन कटौती के बाद घंटे ही नहीं कम होते बल्कि सिंचाई के लिए रातों की नींद उड़ानी पड़ती है।
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जिले के दर्जनों सरकारी नलकूप यांत्रिक या विद्युत दोष के चलते बंद पड़े हैं। माइनरों की टेल तक पानी न पहुंचने की शिकायतें आम हैं। ऐसे में बारिश न होने से सूखे के संकेत साफ दिख रहे हैं।
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शासन व प्रशासन से अब तक सूखे को लेकर कार्ययोजना चाहे कुछ भी हो लेकिन कार्रवाई अभी जमीन पर नहीं है। किसान ओम प्रकाश सिंह कहते है कि बारिश न होने से सूखे के लक्षण स्पष्ट होने लगे हैं।
यदि अगले तीन-चार दिन में अच्छी बारिश न हुई तो नुकसान होना शुरू हो जाएगा। राम अकबाल वर्मा कहते हैं कि अगले कुछ दिनों में बारिश न हुई तो किसानों को नुकसान होगा।
जिला कृषि अधिकारी डॉ. राजेश कुमार यादव का कहना है कि औसत बारिश मानक से काफी रिकार्ड होने से सूखे के हालात बन गए हैं। लेकिन अभी अगस्त में बारिश होने पर हालात सुधर सकते हैं। जिला प्रशासन सूखा से निपटने के लिए सतर्क है, हर संभव वैकल्पिक इंतजाम किए जा रहे हैं।
मौसम वैज्ञानिक डॉ. अमरनाथ मिश्र ने बताया कि बारिश मानक के अनुसार नहीं हो रही है। जिला सूखे की ओर बढ़ रहा है। अगस्त में ही बारिश कम होने के आसार दिख रहे हैं, ऐसे में सूखे की मार किसान को झेलनी पड़ सकती है।