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राम नाम है नीको सुनो रे मोरे भाई..
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01-अयोध्या-विश्वविख्यात मृदंगाचार्य डॉ.रामशंकर दास उपाख्य स्वामी पागल दास के पुण्यतिथि के अवसर प?
- फोटो : FAIZABAD
अयोध्या। विश्वविख्यात मृदंगाचार्य डॉ. रामशंकर दास उपाख्य स्वामी पागल दास की पुण्यतिथि के अवसर पर हनुमत विश्वकला संगीताश्रम में संगीत संध्या का भव्य आयोजन महंत विजयराम दास के संयोजन में किया गया। संगीत संध्या की प्रथम प्रस्तुति मंगल वाद्य मृदंग की गर्जना से हुई। मास्टर वैभव रामदास ने पंचमान ताल में सर्वप्रथम गणेश वंदना, पारंपरिक परन, रेला आदि के साथ अंत में त्रय गुरुवंदना के माध्यम से उपस्थित श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
संगीत संध्या की दूसरी कड़ी में कुशल कुमार उपाध्याय ने राग मुल्तानी में झपताल राम, राम, राजा राम..व स्वामी जी द्वारा रचित पदावली राम नाम है नीको सुनो रे मोरे भाई.. की प्रस्तुति से संगीत संध्या में चार चांद लगा दिए। अगली प्रस्तुति अयोध्या के उदीयमान गायक मानवेंद्र दास मानस ने सद्गुरु तुम्हारे प्यार ने जीना सिखा दिया..व राग पहाड़ी में न सुर है, न सरगम है, न लय है न तराना है.. सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। इसके बाद अयोध्या के वयोवृद्घ सिद्ध हस्त कलाकर पंडित गौरीशंकर महाराज गवैय्या ने अप्रचलित राग सिंधुरा में झपताल व तीनताल में निबद्ध रचना व तराना सुनाकर अपनी सिद्ध हस्तता का परिचय दिया। सुप्रसिद्घ गायक पंडित देवप्रसाद पांडेय ने ठुमरी गायन किया तो सभी मंत्रमुग्ध हो उठे।
अंतिम प्रस्तुति में संत मिथिला बिहारी दास ने मेरे पहुना को नजरिया ना लागे.. सुुनाकर संगीत संध्या को विराम दिया। मंच संचालन कौशिकी झा ने किया। इससे पूर्व संगीत संध्या का शुभारंभ हरिधाम इंदौर के महंत शुकदेव दास, निर्वाणी अनी अखाड़ा उज्जैन के महंत दिग्विजय दास व निर्वाणी अनी अखाड़ा के महासचिव महंत गौरीशंकर दास ने किया। कार्यक्रम में पंडित राजकुमार झा, अजय रामदास, अवधेश सिंह, राजीव श्रीवास्तव, श्याम दास, संजय पांडेय, संजय झा, चंद्रेश दास, राजीव रंजन पांडेय सहित अन्य मौजूद रहे।
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संगीत संध्या की दूसरी कड़ी में कुशल कुमार उपाध्याय ने राग मुल्तानी में झपताल राम, राम, राजा राम..व स्वामी जी द्वारा रचित पदावली राम नाम है नीको सुनो रे मोरे भाई.. की प्रस्तुति से संगीत संध्या में चार चांद लगा दिए। अगली प्रस्तुति अयोध्या के उदीयमान गायक मानवेंद्र दास मानस ने सद्गुरु तुम्हारे प्यार ने जीना सिखा दिया..व राग पहाड़ी में न सुर है, न सरगम है, न लय है न तराना है.. सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। इसके बाद अयोध्या के वयोवृद्घ सिद्ध हस्त कलाकर पंडित गौरीशंकर महाराज गवैय्या ने अप्रचलित राग सिंधुरा में झपताल व तीनताल में निबद्ध रचना व तराना सुनाकर अपनी सिद्ध हस्तता का परिचय दिया। सुप्रसिद्घ गायक पंडित देवप्रसाद पांडेय ने ठुमरी गायन किया तो सभी मंत्रमुग्ध हो उठे।
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अंतिम प्रस्तुति में संत मिथिला बिहारी दास ने मेरे पहुना को नजरिया ना लागे.. सुुनाकर संगीत संध्या को विराम दिया। मंच संचालन कौशिकी झा ने किया। इससे पूर्व संगीत संध्या का शुभारंभ हरिधाम इंदौर के महंत शुकदेव दास, निर्वाणी अनी अखाड़ा उज्जैन के महंत दिग्विजय दास व निर्वाणी अनी अखाड़ा के महासचिव महंत गौरीशंकर दास ने किया। कार्यक्रम में पंडित राजकुमार झा, अजय रामदास, अवधेश सिंह, राजीव श्रीवास्तव, श्याम दास, संजय पांडेय, संजय झा, चंद्रेश दास, राजीव रंजन पांडेय सहित अन्य मौजूद रहे।
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