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नरेंद्र गिरि की मौत से सनातन संस्कृति को लगा धक्का: ऋतेश्वर

Wed, 29 Sep 2021 01:03 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 29 Sep 2021 01:03 AM IST
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Sanatan culture was shocked by the death of Narendra Giri: Riteshwar
पत्रकारों से वार्ता करते ऋतेश्वर महाराज - फोटो : FAIZABAD
अयोध्या। वृंदावन से अयोध्या दर्शन-पूजन के लिए मंगलवार को पहुंचे ऋतेश्वर महाराज ने अखाड़ा परिषद अध्यक्ष नरेंद्र गिरि की मौत पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र गिरि ने आत्महत्या की है या फिर उनकी हत्या हुई है।
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दोनों ही स्थितियों में सनातन संस्कृति को धक्का लगा है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। साथ ही देश में समान नागरिक संहिता कानून व सनातन संस्कृति की शिक्षा व्यवस्था लागू करने की भी मांग उठाई है।
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वे जानकी महल ट्रस्ट में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। उन्होंने नरेंद्र गिरि की मौत पर कहा कि जो संत समाज और सनातन संस्कृति राष्ट्र को मार्ग दिखाता है, तनाव से मुक्ति देता है, लोभ से ऊपर उठने की बात करता है।
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यदि उसी पीठ से ऐसी घटना हो तो निश्चित ही वह निंदनीय है। कहा कि यदि उन्होंने आत्महत्या की है, तो यह गलत है। हम आत्महत्या का समर्थन नहीं कर सकते। जिन्होंने उन्हें ऐसे करने पर मजबूर किया होगा उन्हें कठोर से कठोर सजा देनी चाहिए।
यदि हत्या हुई है तो यह बड़ी बात नहीं है। आज आश्रमों में जो भी लोग पढ़ कर आ रहे हैं व कॉन्वेंट के पढ़े हैं, गुरुकुल से शिक्षा नहीं ली है। ऐसे लोगों की दृष्टि धन, नारी व सत्ता पर रहती है। तमाम ऐसी घटनाएं लगातार हो रही हैं।
आश्रम पर कब्जे किए जा रहे हैं। नारी को खड़ा करके संतों को बदनाम किया जाता है। उन्हें ब्लैकमेल किया जाता है। यह पहली घटना नहीं है। कहा कि संत समाज व सनातन धर्मावलंबी इस घटना से आहत है।
अब आश्रम में शिष्यों का आगमन कैसे हो, उन्हें कैसे शिष्य बनाया जाए इस पर मंथन करना होगा। उन्होंने कहा कि देश में अलग-अलग कानून बनाने के बजाय केवल एक कानून समान नागरिक संहिता लागू किए जाने की आवश्यकता है।
साथ ही लार्ड मैकाले की शिक्षा व्यवस्था को ध्वस्त कर सनातन संस्कृति की शिक्षा व्यवस्था को लागू किया जाना चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो अगले 20 सालों में सनातन सरकारें नहीं आएंगी। मठ-मंदिर पर कब्जे होते रहेंगे।

मां-बाप व गुरू की हत्याएं होती रहेंगी, क्योंकि मैकाले की शिक्षा व्यवस्था ने अंग्रेजियत का बीज बोया है। जहां लाशों के ऊपर भी बस सफलता चाहिए। वसुधैव कुटुंबकम की अवधारणा गुरुकुल की शिक्षा से ही मूर्त रूप लेगी।
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