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Ayodhya News: भगीरथ प्रयास की बाट जोह रही अयोध्या की गंगा
Fri, 15 Sep 2023 01:02 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Fri, 15 Sep 2023 01:02 AM IST
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राजेंद्र कुमार पांडेय
अयोध्या। पौराणिक तिलोदकी गंगा नदी अपने पुनरुद्धार के लिए भगीरथी प्रयासों की बाट जोह रही है। अयोध्या की गंगा को नया जीवन देने के लिए पिछले डेढ़ साल से इसकी खोदाई की जा रही है। काम मनरेगा के तहत कराया जा रहा है।
पौराणिक तिलोदकी अयोध्या में सरयू, तमसा, बिसुही के बाद सबसे बड़ी नदी है। प्रशासन से कराए गए सर्वे में इसकी लंबाई लगभग 47 किलोमीटर मिली। यह जिले के तीन ब्लाकों सोहावल, मसौधा, पूराबाजार के साथ नगर निगम क्षेत्र से निकलती है। पंडितपुर सहित पूराबाजार में कई स्थानों पर यह अभी पूरी नदी दिखती है। पश्चिम से पूरब की ओर बहते हुए रामनगरी में यह सरयू से संगम करती है। इसका बड़ा आध्यात्मिक महत्व है। अयोध्या के विश्व धार्मिक पर्यटन में इसका अहम स्थान है। पक्षी विहार समदा झील इसी के मार्ग में पड़ती है। इसका उद्गम सोहावल तहसील क्षेत्र के पंडितपुर गांव में स्थित ऋषि रमणक की तपस्थली से माना जाता है। यह तमसा से भी संगम करती है लेकिन पुराण में इसका स्वतंत्र अस्तित्व मिलता है।
आधी दूरी में हो चुका है पुनरुद्धार
पौराणिक तमसा की खुदाई पूरी होने और उसको दो राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त होने के बाद तत्कालीन डीएम अनुज कुमार झा और सीडीओ प्रथमेश कुमार ने इसका सर्वे कराया। तत्कालीन उपायुक्त मनरेगा नागेंद्र मोहन राम त्रिपाठी ने नेतृत्व में छह जनवरी 2022 को तिलोदकी-तमसा संगम पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच इसके पुनरुद्धार का काम शुरू हुआ था। डीएम नितीश कुमार व सीडीओ अनिता यादव ने इसका निरीक्षण कर काम आगे बढ़ाया। डीसी मनरेगा सविता सिंह के मुताबिक, अब तक नगर निगम क्षेत्र में पांच किमी. के साथ लगभग आधी दूरी में इसका पुनरुद्धार हो चुका है।
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स्कंदपुराण में तिलोदकी की धार्मिक मान्यता
स्कंदपुराण में कहा गया है कि यह सतत प्रवाहमान नदी है। इसका जल तिल के समान श्यामल होने के कारण इसे तिलोदकी कहा गया। अयोध्या में स्वर्णखनि से दक्षिण दिशा में इसे सिद्धगणों से सेवित संभेद तीर्थ कहा गया है। यह तीर्थ सरयू और तिलोदकी के संगम के कारण बना। यहां स्नान से व्यक्ति रजोगुण से रहित होकर दस अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य की प्राप्ति होती है। यहां अन्न के दान से मुक्ति प्राप्ति होती है। तिलोदकी के अन्य स्थानों पर स्नान से सात जन्मों के पाप से मुक्ति मिलने की भी कथा प्रचलित है।
अभिलेखों में बाहा तो कहीं दर्ज नाला
राजस्व अभिलेखों में नदी को बाहा तो कहीं नाला दर्ज किया गया है। कुछ स्थानों पर इसे गांव के लोग तिलैया के नाम से पुकारते हैं। तिलोदकी के अपभ्रंश तिलैया और त्रिलोचना भी आम लोगों में प्रचलित हैं।
मसौधा ब्लाक क्षेत्र में खोदाई में अवरोध
नदी की खुदाई को लेकर मसौधा ब्लाॅक में अवरोध बताया गया जिसके कारण यह अब तक पूरी नहीं हो पाई। इसे लेकर विकास विभाग, ब्लाॅक की ओर से एसडीएम सोहावल और थानाध्यक्ष पूराकलंदर को कई पत्र भी भेजे जा चुके हैं। फिलहाल बारिश के पहले से ही काम अवरुद्ध है। बारिश के बाद फिर काम शुरू होने की बात कही गई है।
अयोध्या विजन-2047 में हो चुकी खोदाई की समीक्षा
नगर निगम से इसकी खोदाई के दौरान इसे अयोध्या की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल किया गया था। समीक्षा में इसकी खुदाई को लेकर आंगणन शामिल किया गया था।
तिलोदकी के तट पर आज लगेगा मेला
तिलोदकी गंगा के उद्गम स्थल पंडितपुर में ऋषि रमणक की तपस्थली पर शुक्रवार को मेला लगेगा। यहां के लोगों का कहना है कि यह मेला कब से लग रहा है, उन्हें जानकारी नहीं है। मेला प्रबंधन की ओर से पंडितपुर के रहने वाले ओंकारनाथ पांडेय ने शांति व सुरक्षा को लेकर थानाध्यक्ष रौनाही को पत्र भेज दिया है।
वर्जन-
बारिश के बाद शुरू होगा काम
बारिश के चलते तिलोदकी गंगा पर काम इस समय रुका हुआ है। बारिश के बाद नदी के पुनरुद्धार के लिए खोदाई का काम फिर शुरु कराया जाएगा। इसके जीर्णोद्धार का काम पूरा होगा।
सविता सिंह, उपायुक्त मनरेगा
अयोध्या।
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अयोध्या। पौराणिक तिलोदकी गंगा नदी अपने पुनरुद्धार के लिए भगीरथी प्रयासों की बाट जोह रही है। अयोध्या की गंगा को नया जीवन देने के लिए पिछले डेढ़ साल से इसकी खोदाई की जा रही है। काम मनरेगा के तहत कराया जा रहा है।
पौराणिक तिलोदकी अयोध्या में सरयू, तमसा, बिसुही के बाद सबसे बड़ी नदी है। प्रशासन से कराए गए सर्वे में इसकी लंबाई लगभग 47 किलोमीटर मिली। यह जिले के तीन ब्लाकों सोहावल, मसौधा, पूराबाजार के साथ नगर निगम क्षेत्र से निकलती है। पंडितपुर सहित पूराबाजार में कई स्थानों पर यह अभी पूरी नदी दिखती है। पश्चिम से पूरब की ओर बहते हुए रामनगरी में यह सरयू से संगम करती है। इसका बड़ा आध्यात्मिक महत्व है। अयोध्या के विश्व धार्मिक पर्यटन में इसका अहम स्थान है। पक्षी विहार समदा झील इसी के मार्ग में पड़ती है। इसका उद्गम सोहावल तहसील क्षेत्र के पंडितपुर गांव में स्थित ऋषि रमणक की तपस्थली से माना जाता है। यह तमसा से भी संगम करती है लेकिन पुराण में इसका स्वतंत्र अस्तित्व मिलता है।
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आधी दूरी में हो चुका है पुनरुद्धार
पौराणिक तमसा की खुदाई पूरी होने और उसको दो राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त होने के बाद तत्कालीन डीएम अनुज कुमार झा और सीडीओ प्रथमेश कुमार ने इसका सर्वे कराया। तत्कालीन उपायुक्त मनरेगा नागेंद्र मोहन राम त्रिपाठी ने नेतृत्व में छह जनवरी 2022 को तिलोदकी-तमसा संगम पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच इसके पुनरुद्धार का काम शुरू हुआ था। डीएम नितीश कुमार व सीडीओ अनिता यादव ने इसका निरीक्षण कर काम आगे बढ़ाया। डीसी मनरेगा सविता सिंह के मुताबिक, अब तक नगर निगम क्षेत्र में पांच किमी. के साथ लगभग आधी दूरी में इसका पुनरुद्धार हो चुका है।
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स्कंदपुराण में तिलोदकी की धार्मिक मान्यता
स्कंदपुराण में कहा गया है कि यह सतत प्रवाहमान नदी है। इसका जल तिल के समान श्यामल होने के कारण इसे तिलोदकी कहा गया। अयोध्या में स्वर्णखनि से दक्षिण दिशा में इसे सिद्धगणों से सेवित संभेद तीर्थ कहा गया है। यह तीर्थ सरयू और तिलोदकी के संगम के कारण बना। यहां स्नान से व्यक्ति रजोगुण से रहित होकर दस अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य की प्राप्ति होती है। यहां अन्न के दान से मुक्ति प्राप्ति होती है। तिलोदकी के अन्य स्थानों पर स्नान से सात जन्मों के पाप से मुक्ति मिलने की भी कथा प्रचलित है।
अभिलेखों में बाहा तो कहीं दर्ज नाला
राजस्व अभिलेखों में नदी को बाहा तो कहीं नाला दर्ज किया गया है। कुछ स्थानों पर इसे गांव के लोग तिलैया के नाम से पुकारते हैं। तिलोदकी के अपभ्रंश तिलैया और त्रिलोचना भी आम लोगों में प्रचलित हैं।
मसौधा ब्लाक क्षेत्र में खोदाई में अवरोध
नदी की खुदाई को लेकर मसौधा ब्लाॅक में अवरोध बताया गया जिसके कारण यह अब तक पूरी नहीं हो पाई। इसे लेकर विकास विभाग, ब्लाॅक की ओर से एसडीएम सोहावल और थानाध्यक्ष पूराकलंदर को कई पत्र भी भेजे जा चुके हैं। फिलहाल बारिश के पहले से ही काम अवरुद्ध है। बारिश के बाद फिर काम शुरू होने की बात कही गई है।
अयोध्या विजन-2047 में हो चुकी खोदाई की समीक्षा
नगर निगम से इसकी खोदाई के दौरान इसे अयोध्या की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल किया गया था। समीक्षा में इसकी खुदाई को लेकर आंगणन शामिल किया गया था।
तिलोदकी के तट पर आज लगेगा मेला
तिलोदकी गंगा के उद्गम स्थल पंडितपुर में ऋषि रमणक की तपस्थली पर शुक्रवार को मेला लगेगा। यहां के लोगों का कहना है कि यह मेला कब से लग रहा है, उन्हें जानकारी नहीं है। मेला प्रबंधन की ओर से पंडितपुर के रहने वाले ओंकारनाथ पांडेय ने शांति व सुरक्षा को लेकर थानाध्यक्ष रौनाही को पत्र भेज दिया है।
वर्जन-
बारिश के बाद शुरू होगा काम
बारिश के चलते तिलोदकी गंगा पर काम इस समय रुका हुआ है। बारिश के बाद नदी के पुनरुद्धार के लिए खोदाई का काम फिर शुरु कराया जाएगा। इसके जीर्णोद्धार का काम पूरा होगा।
सविता सिंह, उपायुक्त मनरेगा
अयोध्या।