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जमीन के लालच में भांजे ने खत्म कर दिया था खानदान, दी गई फांसी की सजा
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अयोध्या-सजा होने के बाद मौजूद फांसी व अजीवन कारावास के अभियुक्त।-संवाद
- फोटो : FAIZABAD
अयोध्या। जमीन के लालच में सगे मामा-मामी व उनके तीन मासूमों की हत्या के मामले में भांजे पवन कुमार को फांसी की सजा सुनाई गई है। हत्याकांड के बाद हुई एफआईआर के बाद पुलिस ने विवेचना कर चारों लोगों के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में प्रस्तुत किया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने सजा दी है।
सजा सुनाते हुए अपर जिला जज अमित कुमार पांडेय ने अपने निर्णय में लिखा कि पवन कुमार द्वारा सुनियोजित ढंग से सह अभियुक्तों के समर्थन से सामान्य आशय की पूर्ति में संपत्ति को हड़पने की नीयत से अपने सगे मामा-मामी और तीन छोटे बच्चों की निर्दयता से धारदार हथियार से गंभीर चोट पहुंचाते हुए हत्या की गई है।
एक के बाद एक हत्या करते वक्त अभियुक्त का आचरण अत्यधिक क्रूर प्रकृति का था। हर एक हत्या अभियुक्त पवन द्वारा अत्यधिक अमानवीय तरीके से प्रताड़ना देकर की गई। यह अपराध दो वयस्क पति-पत्नी एवं तीन असहाय और मासूम बच्चों के साथ बिना किसी प्रकोप के जघन्य तरीके से किया गया है, जिसने पूरी सामाजिक व्यवस्था को झकझोर दिया। 10 वर्षीय अंशिका, छह वर्षीय शक्ति व चार वर्षीय ध्रुव की हत्या धारदार हथियार से कई वार करके की गई। इन बच्चों में घटना का प्रतिरोध करने की क्षमता भी नहीं थी। वह सबसे सुरक्षित स्थान अपने माता-पिता के साथ थे, लेकिन हैवानियत और लालच ने उनके सुरक्षा घेरे को तोड़कर उनका जीवन छीन लिया।
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उन्होंने लिखा कि घटना के समय तक इन अबोध बच्चों ने न ढंग से दुनिया देखी थी और ना ही वह अपना प्राकृतिक जीवन जी सके थे। यह घटना संपत्ति के विवाद को लेकर की गई थी। यह विवाद ऐसा था, जिसकी संभवत: बच्चों को कोई जानकारी ही नहीं रही होगी। उन्हें संपत्ति से कोई मतलब ही नहीं था। वह इतने अबोध थे कि उन्हें इस बात का भी ज्ञान नहीं रहा होगा कि वास्तव में उनके हितेषी कौन हैं और उनके विरोधी कौन हैं।
अपर जिला जज अमित कुमार पांडेय ने अपने निर्णय में लिखा है कि अभियुक्त पवन द्वारा सिर्फ अपने मामा और मामी तथा बच्चों की हत्या नहीं की गई है, बल्कि संपत्ति के लालच में एक वंश का नाश कर दिया गया है।
जिस प्रकार से चोटें पहुंचाई गई हैं, वह स्वत: परिलक्षित करती हैं कि अभियुक्त प्रत्येक दशा में यह सुनिश्चित करना चाहता था कि जिन्हें वह मार रहा है, उनकी मृत्यु प्रत्येक दशा में हो जाए। जिससे कि संपत्ति का कोई हकदार ना बचे। इसी के साथ अदालत ने मुख्य आरोपी को फांसी पर तब तक लटकाए जाने को कहा है, जब तक उसकी मृत्यु ना हो जाए।
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सजा सुनाते हुए अपर जिला जज अमित कुमार पांडेय ने अपने निर्णय में लिखा कि पवन कुमार द्वारा सुनियोजित ढंग से सह अभियुक्तों के समर्थन से सामान्य आशय की पूर्ति में संपत्ति को हड़पने की नीयत से अपने सगे मामा-मामी और तीन छोटे बच्चों की निर्दयता से धारदार हथियार से गंभीर चोट पहुंचाते हुए हत्या की गई है।
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एक के बाद एक हत्या करते वक्त अभियुक्त का आचरण अत्यधिक क्रूर प्रकृति का था। हर एक हत्या अभियुक्त पवन द्वारा अत्यधिक अमानवीय तरीके से प्रताड़ना देकर की गई। यह अपराध दो वयस्क पति-पत्नी एवं तीन असहाय और मासूम बच्चों के साथ बिना किसी प्रकोप के जघन्य तरीके से किया गया है, जिसने पूरी सामाजिक व्यवस्था को झकझोर दिया। 10 वर्षीय अंशिका, छह वर्षीय शक्ति व चार वर्षीय ध्रुव की हत्या धारदार हथियार से कई वार करके की गई। इन बच्चों में घटना का प्रतिरोध करने की क्षमता भी नहीं थी। वह सबसे सुरक्षित स्थान अपने माता-पिता के साथ थे, लेकिन हैवानियत और लालच ने उनके सुरक्षा घेरे को तोड़कर उनका जीवन छीन लिया।
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उन्होंने लिखा कि घटना के समय तक इन अबोध बच्चों ने न ढंग से दुनिया देखी थी और ना ही वह अपना प्राकृतिक जीवन जी सके थे। यह घटना संपत्ति के विवाद को लेकर की गई थी। यह विवाद ऐसा था, जिसकी संभवत: बच्चों को कोई जानकारी ही नहीं रही होगी। उन्हें संपत्ति से कोई मतलब ही नहीं था। वह इतने अबोध थे कि उन्हें इस बात का भी ज्ञान नहीं रहा होगा कि वास्तव में उनके हितेषी कौन हैं और उनके विरोधी कौन हैं।
अपर जिला जज अमित कुमार पांडेय ने अपने निर्णय में लिखा है कि अभियुक्त पवन द्वारा सिर्फ अपने मामा और मामी तथा बच्चों की हत्या नहीं की गई है, बल्कि संपत्ति के लालच में एक वंश का नाश कर दिया गया है।
जिस प्रकार से चोटें पहुंचाई गई हैं, वह स्वत: परिलक्षित करती हैं कि अभियुक्त प्रत्येक दशा में यह सुनिश्चित करना चाहता था कि जिन्हें वह मार रहा है, उनकी मृत्यु प्रत्येक दशा में हो जाए। जिससे कि संपत्ति का कोई हकदार ना बचे। इसी के साथ अदालत ने मुख्य आरोपी को फांसी पर तब तक लटकाए जाने को कहा है, जब तक उसकी मृत्यु ना हो जाए।