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इस बार दो दिन मनाई जाएगी रामनवमी
Sat, 30 Mar 2019 11:13 PM IST
vivek vivek
amarujala Bureau/Faizabad
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Published by: vivek vivek
Updated Sat, 30 Mar 2019 11:13 PM IST
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वर्ष भर में दो बार वासंतिक व शारदीय नवरात्र मनाई जाती है। इसके साथ-साथ वर्ष में दो गुप्त नवरात्र भी होती हैं। चैत्र नवरात्र का अधिक महत्व है, क्योंकि यह नवरात्र भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। रामनगरी मेें उत्सव का माहौल होता है।
लाखों श्रद्धालु इस उत्सव में शामिल होने अयोध्या पहुंचते हैं। इस वर्ष अष्टमी व नवमी तिथि एक ही दिन होने के कारण नवरात्र आठ दिनों की होगी। नवरात्र का शुभारंभ छह अप्रैल से होगा। इसी दिन से हिंदू नववर्ष का भी प्रारंभ हो जाता है। रामनवमी इस बार दो दिन 13 व 14 अप्रैल को मनेगी। इस साल देवी मां घोड़े पर सवार होकर आ रही हैं, जबकि हाथी पर सवार होकर विदा होंगी।
पंडित कौशल्यानंदन वर्धन ने बताया कि छह अप्रैल को सूर्योदय 5:47 बजे से नवरात्र का शुभ पर्व प्रारंभ हो जाएगा। 12 अप्रैल को सुबह 10.18 बजे से 13 अप्रैल को सुबह दिन में 8.16 बजे तक अष्टमी तिथि होगी। इसके बाद चैत्र रामनवमी की नवमी तिथि लग जाएगी। 13 अप्रैल को महानवमी का व्रत होगा। उन्होंने बताया कि इस वर्ष रामजन्मोत्सव का पर्व भी दो दिन मनाया जाएगा।
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अधिकांश मंदिरों में 13 अप्रैल को रामनवमी मनाई जाएगी। चूंकि 14 अप्रैल की सुबह छह बजे तक नवमी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए उदया तिथि की मान्यता वाले मंदिरों में 14 अप्रैल को भी रामनवमी की धूम होगी। नवरात्र का पारण 14 अप्रैल को प्रात:काल छह बजे के बाद किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस साल देवी मां घोड़े पर सवार होकर आ रही हैं, जबकि मां हाथी की सवारी करते हुए पृथ्वी से विदा लेंगी।
नवरात्र का प्रमुख नक्षत्रों व योगों के साथ आने का मतलब होता है] मनुष्य जीवन पर कोई खास प्रभाव पड़ना। इस साल देवी मां घोड़े पर सवार होकर आ रही हैं और इसे युद्ध का प्रतीक माना जाता है। इससे शासन और सत्ता पर बुरा असर व सरकार को विरोध का भी सामना करना पड़ सकता है, लेकिन जिन लोगों पर देवी मां की असीम कृपा होगी, वह अपने जीवन में घोड़े की रफ्तार की तरह की सफलता को प्राप्त करेंगे।
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लाखों श्रद्धालु इस उत्सव में शामिल होने अयोध्या पहुंचते हैं। इस वर्ष अष्टमी व नवमी तिथि एक ही दिन होने के कारण नवरात्र आठ दिनों की होगी। नवरात्र का शुभारंभ छह अप्रैल से होगा। इसी दिन से हिंदू नववर्ष का भी प्रारंभ हो जाता है। रामनवमी इस बार दो दिन 13 व 14 अप्रैल को मनेगी। इस साल देवी मां घोड़े पर सवार होकर आ रही हैं, जबकि हाथी पर सवार होकर विदा होंगी।
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पंडित कौशल्यानंदन वर्धन ने बताया कि छह अप्रैल को सूर्योदय 5:47 बजे से नवरात्र का शुभ पर्व प्रारंभ हो जाएगा। 12 अप्रैल को सुबह 10.18 बजे से 13 अप्रैल को सुबह दिन में 8.16 बजे तक अष्टमी तिथि होगी। इसके बाद चैत्र रामनवमी की नवमी तिथि लग जाएगी। 13 अप्रैल को महानवमी का व्रत होगा। उन्होंने बताया कि इस वर्ष रामजन्मोत्सव का पर्व भी दो दिन मनाया जाएगा।
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अधिकांश मंदिरों में 13 अप्रैल को रामनवमी मनाई जाएगी। चूंकि 14 अप्रैल की सुबह छह बजे तक नवमी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए उदया तिथि की मान्यता वाले मंदिरों में 14 अप्रैल को भी रामनवमी की धूम होगी। नवरात्र का पारण 14 अप्रैल को प्रात:काल छह बजे के बाद किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस साल देवी मां घोड़े पर सवार होकर आ रही हैं, जबकि मां हाथी की सवारी करते हुए पृथ्वी से विदा लेंगी।
नवरात्र का प्रमुख नक्षत्रों व योगों के साथ आने का मतलब होता है] मनुष्य जीवन पर कोई खास प्रभाव पड़ना। इस साल देवी मां घोड़े पर सवार होकर आ रही हैं और इसे युद्ध का प्रतीक माना जाता है। इससे शासन और सत्ता पर बुरा असर व सरकार को विरोध का भी सामना करना पड़ सकता है, लेकिन जिन लोगों पर देवी मां की असीम कृपा होगी, वह अपने जीवन में घोड़े की रफ्तार की तरह की सफलता को प्राप्त करेंगे।