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रामलला ने धारण किया सोने का मुकुट, लगा छप्पन भोग
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अयोध्या-रामलला को अर्पित किया गया छप्पन भोग।-संवाद
- फोटो : FAIZABAD
अयोध्या। वसंत पंचमी के पावन पर्व पर शनिवार को रामलला को नीले रंग का नवीन वस्त्र धारण कराया गया। सुबह सात बजे विधिविधान पूर्वक रामलला की पूजा-अर्चना के बाद सोने के मुकुट में सजे-धजे रामलला के विग्रह का दिव्य दर्शन कर भक्त निहाल हो उठे। इस अवसर पर रामलला केे छप्पन प्रकार के व्यंजनों का भोग भी लगाया गया। इसी तरह रामनगरी के अन्य मंदिरों में विविध अनुष्ठान हुए साथ ही साथ भगवान के विग्रह को अबीर-गुलाल अर्पित किया गया। वसंत पंचमी से ही रामनगरी में होलिकोत्सव का प्रतीकात्मक श्रीगणेश भी हो गया है।
वसंत पचंमी के पुनीत अवसर पर रामलला का भव्य शृंगार किया गया। श्रीरामजन्मभूमि के मुख्य अर्चक आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि सुबह विधिवत पूजन-अर्चन के बाद रामलला का नवीन वस्त्र धारण करते हुए सजाया-धजाया गया। इसके बाद पूर्वाह्न 11.30 बजे की आरती के बाद श्रीरामलला सरकार को छप्पन प्रकार के व्यंजनों का भोग भी लगाया गया। बताया कि यह भोग सागरिया पट्टी के महंत ज्ञानदास के शिष्यों द्वारा रामलला को अर्पित किया गया था। महंत ज्ञानदास के उत्तराधिकारी महंत संजय दास, संत हेमंत दास सहित अन्य शिष्यों ने रामजन्मभूमि पहुंचकर पुजारी को रामलला के लिए छप्पन भोग सौंपा, जिसे पुजारी द्वारा विधिविधान पूर्वक पूजा-अर्चना के बाद रामलला सहित चारों भाइयों को अर्पित किया गया।
आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि वसंत पंचमी के अवसर पर रामजन्मभूमि परिसर में मां सरस्वती की आराधना भी की गई। रामलला को छप्पन भोग अर्पित करने के बाद रामजन्मभूमि के सुरक्षाकर्मियों सहित अन्य को प्रसाद भी अर्पित किया गया। सत्येंद्र दास ने बताया कि वसंत पंचमी के अवसर पर रामनगरी के मठ-मंदिरों में विराजमान विग्रह को अबीर-गुलाल भी अर्पित किया गया है। इसी के साथ ही रामनगरी में 40 दिवसीय होलिकोत्सव का प्रतीकात्मक श्रीगणेश हो गया है।
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कई महीने पहले गायब हुआ सोने का मुकुट मिला
श्रावण मास में एक भक्त द्वारा रामलला सहित चारों भाइयों के लिए सोने का मुकुट बनवाकर श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपा गया था। श्रावण मास में ही रामलला को यह मुकुट धारण कराया गया, उसके बाद इसे निकालकर रख दिया गया था। रामजन्मभूमि के मुख्य अर्चक आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि तय हुआ कि विशेष अवसर, पर्व व त्योहारों पर रामलला को सोने का मुकुट पहनाया जाएगा, लेकिन उसके बाद मुकुट के गायब होने की सूचना मिली। बताया कि करीब तीन महीने बाद फिर यह मुकुट मिला है। जिसे वसंत पंचमी के अवसर पर रामलला सहित चारों भाइयों को पहनाया गया। सोने के मुकुट में रामलला की दिव्य छवि का दर्शन कर भक्त निहाल होते रहे। मुकुट कहां गायब हो गया था और कैसे मिला इसके बारे में मुख्य अर्चक को कोई जानकारी फिलहाल नहीं है।
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वसंत पचंमी के पुनीत अवसर पर रामलला का भव्य शृंगार किया गया। श्रीरामजन्मभूमि के मुख्य अर्चक आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि सुबह विधिवत पूजन-अर्चन के बाद रामलला का नवीन वस्त्र धारण करते हुए सजाया-धजाया गया। इसके बाद पूर्वाह्न 11.30 बजे की आरती के बाद श्रीरामलला सरकार को छप्पन प्रकार के व्यंजनों का भोग भी लगाया गया। बताया कि यह भोग सागरिया पट्टी के महंत ज्ञानदास के शिष्यों द्वारा रामलला को अर्पित किया गया था। महंत ज्ञानदास के उत्तराधिकारी महंत संजय दास, संत हेमंत दास सहित अन्य शिष्यों ने रामजन्मभूमि पहुंचकर पुजारी को रामलला के लिए छप्पन भोग सौंपा, जिसे पुजारी द्वारा विधिविधान पूर्वक पूजा-अर्चना के बाद रामलला सहित चारों भाइयों को अर्पित किया गया।
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आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि वसंत पंचमी के अवसर पर रामजन्मभूमि परिसर में मां सरस्वती की आराधना भी की गई। रामलला को छप्पन भोग अर्पित करने के बाद रामजन्मभूमि के सुरक्षाकर्मियों सहित अन्य को प्रसाद भी अर्पित किया गया। सत्येंद्र दास ने बताया कि वसंत पंचमी के अवसर पर रामनगरी के मठ-मंदिरों में विराजमान विग्रह को अबीर-गुलाल भी अर्पित किया गया है। इसी के साथ ही रामनगरी में 40 दिवसीय होलिकोत्सव का प्रतीकात्मक श्रीगणेश हो गया है।
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कई महीने पहले गायब हुआ सोने का मुकुट मिला
श्रावण मास में एक भक्त द्वारा रामलला सहित चारों भाइयों के लिए सोने का मुकुट बनवाकर श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपा गया था। श्रावण मास में ही रामलला को यह मुकुट धारण कराया गया, उसके बाद इसे निकालकर रख दिया गया था। रामजन्मभूमि के मुख्य अर्चक आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि तय हुआ कि विशेष अवसर, पर्व व त्योहारों पर रामलला को सोने का मुकुट पहनाया जाएगा, लेकिन उसके बाद मुकुट के गायब होने की सूचना मिली। बताया कि करीब तीन महीने बाद फिर यह मुकुट मिला है। जिसे वसंत पंचमी के अवसर पर रामलला सहित चारों भाइयों को पहनाया गया। सोने के मुकुट में रामलला की दिव्य छवि का दर्शन कर भक्त निहाल होते रहे। मुकुट कहां गायब हो गया था और कैसे मिला इसके बारे में मुख्य अर्चक को कोई जानकारी फिलहाल नहीं है।