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हर एकादशी को व्रत रहते रामलला, लगता फलाहार का भोग
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अयोध्या-गुरुवार को सजा रामलला का विग्रह।-संवाद
- फोटो : FAIZABAD
अयोध्या। रामलला भले ही अस्थाई गर्भगृह में अभी विराजमान हैं पर उनके ठाठ-बांट में कोई कमी नहीं है। रामलला प्रतिदिन नए वस्त्र धारण करते हैं।उन्हें देशी घी में बने पकवानों का भोग लगाया जाता है।
बाल रूप में होते हुए भी रामलला हर माह की एकादशी को व्रत रहते हैं । उन्हें भोग में केवल फलाहार दिया जाता है। करीब तीन दशक तक मंदिर-मस्जिद विवाद के चलते रामलला टेंट में विराजमान रहे।
इस दौरान उन्होंने बहुत सारी समस्याएं झेलीं। नौ नवंबर 2019 को रामलला के हक में सुप्रीम कोर्ट से निर्णय आते ही रामलला के अच्छे दिन शुरू हो गए। 24-25 मार्च की रात सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने हाथों से रामलला को अस्थायी भव्य गर्भगृह में विराजित किया।
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इसके बाद तमाम सुविधाओं से महरूम रहने वाले रामलला के ठाठ-बांट में निरंतर इजाफा होता गया। उत्सव-समैया पर जहां रामलला का दरबार सूना रहता था। आज उत्सवों पर रामलला की रौनक बढ़ जाती है।
प्रतिदिन उनकी सुबह पंचमेवा, पेड़ा और मिठाई से होती है। यह उन्हें बाल भोग में दिया जाता है। इसके अलावा बाल भोग में काजू, किशमिश, बादाम आदि भी दिया जाता है। रामलला को हर दिन खीर का भी भोग लगता है।
हालांकि महीने में वे दो बार व्रत भी रहते हैं। महीने की हर एकादशी को रामलला को व्रत रखा जाता है। आषाढ़ मास की पहली एकादशी आज यानि की 24 जून को है, इसलिए रामलला व्रत रहेगें।
उन्हें फलाहार का भोग लगाया जाएगा। फलाहार में उन्हें कुट्टू, सिंघाड़े के आटे की पूड़ी, पकौड़ी एवं सेंधा नमक से बनी सब्जी परोसी जाती है। रामलला का भोग शुद्ध देशी घी से बनता है।
रामलला को दिन में तीन बार भोग लगाया जाता है। सुबह उन्हें बाल भोग लगाया जाता है। दोपहर राजभोग अर्पित किया जाता है। राजभोग में उन्हें दाल, चावल, रोटी-सब्जी अर्पित की जाती है।
इसके साथ खीर या अन्य कोई मिष्ठान भी होता है। संध्या भोग में उन्हें पूड़ी, सब्जी और खीर अर्पित की जाती है। साथ ही विशेष अवसर व उत्सव समैया पर अब रामलला को छप्पन भोग भी लगाया जाता है।
रामलला के भोग राग में तीन वस्तुएं निषिद्ध भी हैं। उनके भोग में लहसुन-प्याज व मसूर की दाल कभी शामिल नहीं होती।
पांच बार होती रामलला की आरती
मंगला आरती सुबह 5 से 6 बजे के बीच
श्रृंगार आरती सुबह 6 से 6:50 बजे के बीच
भोग आरती पूर्वाह्न 11 से 11:30 बजे के बीच
संध्या आरती शाम 6 से 6:30 बजे के बीच
शयन आरती शाम सात बजे
रामलला के ठाठ-बांट में अब कोई कमी नहीं है। रामलला चारों भाईयों के साथ चांदी के सिंहासन पर विराजते हैं। दिन के हिसाब से हर रोज नए वस्त्र उन्हें पहनाएं जाते हैं। उत्सव-समैया पर अब रामलला का दरबार भी सजता है। गर्मी में एसी तो ठंडी में उनके लिए ब्लोअर की व्यवस्था रहती है। पहले उनके राग-भोग में स्वयं का धन लगाना पड़ता था लेकिन अब ट्रस्ट सारी व्यवस्थाएं करता हैं।-सत्येंद्र दास, मुख्य अर्चक, रामजन्मभूमि
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बाल रूप में होते हुए भी रामलला हर माह की एकादशी को व्रत रहते हैं । उन्हें भोग में केवल फलाहार दिया जाता है। करीब तीन दशक तक मंदिर-मस्जिद विवाद के चलते रामलला टेंट में विराजमान रहे।
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इस दौरान उन्होंने बहुत सारी समस्याएं झेलीं। नौ नवंबर 2019 को रामलला के हक में सुप्रीम कोर्ट से निर्णय आते ही रामलला के अच्छे दिन शुरू हो गए। 24-25 मार्च की रात सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने हाथों से रामलला को अस्थायी भव्य गर्भगृह में विराजित किया।
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इसके बाद तमाम सुविधाओं से महरूम रहने वाले रामलला के ठाठ-बांट में निरंतर इजाफा होता गया। उत्सव-समैया पर जहां रामलला का दरबार सूना रहता था। आज उत्सवों पर रामलला की रौनक बढ़ जाती है।
प्रतिदिन उनकी सुबह पंचमेवा, पेड़ा और मिठाई से होती है। यह उन्हें बाल भोग में दिया जाता है। इसके अलावा बाल भोग में काजू, किशमिश, बादाम आदि भी दिया जाता है। रामलला को हर दिन खीर का भी भोग लगता है।
हालांकि महीने में वे दो बार व्रत भी रहते हैं। महीने की हर एकादशी को रामलला को व्रत रखा जाता है। आषाढ़ मास की पहली एकादशी आज यानि की 24 जून को है, इसलिए रामलला व्रत रहेगें।
उन्हें फलाहार का भोग लगाया जाएगा। फलाहार में उन्हें कुट्टू, सिंघाड़े के आटे की पूड़ी, पकौड़ी एवं सेंधा नमक से बनी सब्जी परोसी जाती है। रामलला का भोग शुद्ध देशी घी से बनता है।
रामलला को दिन में तीन बार भोग लगाया जाता है। सुबह उन्हें बाल भोग लगाया जाता है। दोपहर राजभोग अर्पित किया जाता है। राजभोग में उन्हें दाल, चावल, रोटी-सब्जी अर्पित की जाती है।
इसके साथ खीर या अन्य कोई मिष्ठान भी होता है। संध्या भोग में उन्हें पूड़ी, सब्जी और खीर अर्पित की जाती है। साथ ही विशेष अवसर व उत्सव समैया पर अब रामलला को छप्पन भोग भी लगाया जाता है।
रामलला के भोग राग में तीन वस्तुएं निषिद्ध भी हैं। उनके भोग में लहसुन-प्याज व मसूर की दाल कभी शामिल नहीं होती।
पांच बार होती रामलला की आरती
मंगला आरती सुबह 5 से 6 बजे के बीच
श्रृंगार आरती सुबह 6 से 6:50 बजे के बीच
भोग आरती पूर्वाह्न 11 से 11:30 बजे के बीच
संध्या आरती शाम 6 से 6:30 बजे के बीच
शयन आरती शाम सात बजे
रामलला के ठाठ-बांट में अब कोई कमी नहीं है। रामलला चारों भाईयों के साथ चांदी के सिंहासन पर विराजते हैं। दिन के हिसाब से हर रोज नए वस्त्र उन्हें पहनाएं जाते हैं। उत्सव-समैया पर अब रामलला का दरबार भी सजता है। गर्मी में एसी तो ठंडी में उनके लिए ब्लोअर की व्यवस्था रहती है। पहले उनके राग-भोग में स्वयं का धन लगाना पड़ता था लेकिन अब ट्रस्ट सारी व्यवस्थाएं करता हैं।-सत्येंद्र दास, मुख्य अर्चक, रामजन्मभूमि