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Ayodhya News: पत्थरों में होंगे रामकथा के दर्शन, मूर्तिकार का चयन
Tue, 28 Feb 2023 12:37 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Tue, 28 Feb 2023 12:37 AM IST
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अयोध्या। राममंदिर निर्माण में देश के तकनीकी विशेषज्ञ, इंजीनियर, चित्रकार, मूर्तिकारों का सहयोग लिया जा रहा है। अब राममंदिर के परकोटे में रामकथा प्रसंग के चित्रण के लिए भी महाराष्ट्र के प्रख्यात मूर्तिकार का चयन किया गया है। 800 मीटर लंबे परकोटे में रामायण के 100 प्रसंग उकेरे जाने हैं।
राममंदिर के परकोटे को आकार देने का काम शुरू हो चुका है। राममंदिर का परकोटा 14 फीट चौड़ा होगा। परकोटे में वंशीपहाड़पुर के पत्थरों पर रामकथा के 100 प्रसंग उकेरे जाएंगे। इससे रामजन्मभूमि परिसर में प्रवेश करते ही राममय अनुभूति भक्तों को होगी। इसके लिए महाराष्ट्र के प्रख्यात चित्रकार, मूर्तिकार, प्रमोद कांबले का चयन श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने किया है।
प्रमोद कांबले ने सोमवार को अमर उजाला को बताया कि यह उनके लिए गौरवशाली क्षण है। राममंदिर निर्माण में उन्हें भी अपना छोटा सा योगदान देने का अवसर मिल रहा है। बताया कि वे शिरडी साईं बाबा की मूर्ति भी बना चुके हैं। अक्षरधाम, ज्ञानेश्वर मंदिर सहित कई बड़े मंदिरों में उन्हें काम का अवसर मिला है। महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर के लिए भी उन्होंने कई भव्य चित्र, मूर्ति बनाई है।
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बताया कि परकोटे में वंशीपहाड़पुर के पत्थरों पर रामकथा का प्रसंग मूर्ति के रूप में ढाला जाएगा। ये मूर्तियां भारतीय मंदिर शैली में बनाई जाएंगी। यह शैली भारतीय कला की पहचान है। रामकथा के प्रसंग रामायण आधारित होंगे। प्रसंगों का रामायण में जो वर्णन किया गया है, बिल्कुल उसी तरह से इन्हें मूर्ति में उतारने का प्रयास किया जाएगा।
कांबले के अनुसार प्रख्यात मूर्तिकार वासुदेव कामत द्वारा इन प्रसंगों को फाइनल किया जाएगा। कामत सबसे पहले कागज पर हाथ से स्केच बनाएंगे। उसके बाद कांबले मिट्टी का मॉडल बनाएंगे, फिर यह मॉडल फाइबर में बनाया जाएगा। उसके बाद पत्थरों पर यह चित्र उकेरा जाएगा। एक प्रसंग में तीन-चार मूर्तियां बनेंगी, इससे ज्यादा भी हो सकती हैं। बताया कि शनिवार को हुई श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में उन्होंने एक मॉडल सबके समक्ष पेश किया था।
होली के बाद होगा अचल मूर्ति के लिए पत्थर का चयन
होली के बाद रामलला की अचल मूर्ति के स्वरूप पर सहमति बन सकती है। ट्रस्ट के अनुसार रामलला की अचल मूर्ति के लिए अब तक छह शिलाखंड आ चुके हैं। दो शिलाखंड नेपाल की गंडकी नदी के हैं, जबकि दो कर्नाटक के मैसूर व दो राजस्थान से आए हैं।
राजस्थान से जल्द ही एक शिलाखंड और आने की संभावना है। दक्षिण भारत से एक शिलाखंड भी मिलने की उम्मीद है। बताया कि मूर्तिकारों की एक बैठक होली के बाद बुलाई जाएगी जिसमें सभी मूर्तिकार अपनी राय देंगे। उसके बाद रामलला की अचल मूर्ति के लिए उपयुक्त पत्थर का चयन होगा।
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राममंदिर के परकोटे को आकार देने का काम शुरू हो चुका है। राममंदिर का परकोटा 14 फीट चौड़ा होगा। परकोटे में वंशीपहाड़पुर के पत्थरों पर रामकथा के 100 प्रसंग उकेरे जाएंगे। इससे रामजन्मभूमि परिसर में प्रवेश करते ही राममय अनुभूति भक्तों को होगी। इसके लिए महाराष्ट्र के प्रख्यात चित्रकार, मूर्तिकार, प्रमोद कांबले का चयन श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने किया है।
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प्रमोद कांबले ने सोमवार को अमर उजाला को बताया कि यह उनके लिए गौरवशाली क्षण है। राममंदिर निर्माण में उन्हें भी अपना छोटा सा योगदान देने का अवसर मिल रहा है। बताया कि वे शिरडी साईं बाबा की मूर्ति भी बना चुके हैं। अक्षरधाम, ज्ञानेश्वर मंदिर सहित कई बड़े मंदिरों में उन्हें काम का अवसर मिला है। महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर के लिए भी उन्होंने कई भव्य चित्र, मूर्ति बनाई है।
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बताया कि परकोटे में वंशीपहाड़पुर के पत्थरों पर रामकथा का प्रसंग मूर्ति के रूप में ढाला जाएगा। ये मूर्तियां भारतीय मंदिर शैली में बनाई जाएंगी। यह शैली भारतीय कला की पहचान है। रामकथा के प्रसंग रामायण आधारित होंगे। प्रसंगों का रामायण में जो वर्णन किया गया है, बिल्कुल उसी तरह से इन्हें मूर्ति में उतारने का प्रयास किया जाएगा।
कांबले के अनुसार प्रख्यात मूर्तिकार वासुदेव कामत द्वारा इन प्रसंगों को फाइनल किया जाएगा। कामत सबसे पहले कागज पर हाथ से स्केच बनाएंगे। उसके बाद कांबले मिट्टी का मॉडल बनाएंगे, फिर यह मॉडल फाइबर में बनाया जाएगा। उसके बाद पत्थरों पर यह चित्र उकेरा जाएगा। एक प्रसंग में तीन-चार मूर्तियां बनेंगी, इससे ज्यादा भी हो सकती हैं। बताया कि शनिवार को हुई श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में उन्होंने एक मॉडल सबके समक्ष पेश किया था।
होली के बाद होगा अचल मूर्ति के लिए पत्थर का चयन
होली के बाद रामलला की अचल मूर्ति के स्वरूप पर सहमति बन सकती है। ट्रस्ट के अनुसार रामलला की अचल मूर्ति के लिए अब तक छह शिलाखंड आ चुके हैं। दो शिलाखंड नेपाल की गंडकी नदी के हैं, जबकि दो कर्नाटक के मैसूर व दो राजस्थान से आए हैं।
राजस्थान से जल्द ही एक शिलाखंड और आने की संभावना है। दक्षिण भारत से एक शिलाखंड भी मिलने की उम्मीद है। बताया कि मूर्तिकारों की एक बैठक होली के बाद बुलाई जाएगी जिसमें सभी मूर्तिकार अपनी राय देंगे। उसके बाद रामलला की अचल मूर्ति के लिए उपयुक्त पत्थर का चयन होगा।