{"_id":"64d9216e0a426075a20ff196","slug":"ram-temple-faizabad-news-c-97-1-ayo1002-1162-2023-08-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ayodhya News: राम राज्याभिषेक में गूंजीं मानस की चौपाइयां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ayodhya News: राम राज्याभिषेक में गूंजीं मानस की चौपाइयां
Mon, 14 Aug 2023 12:01 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Mon, 14 Aug 2023 12:01 AM IST
विज्ञापन
अयोध्या। राम की पैड़ी परिसर स्थित नागेश्वरनाथ मंदिर से सटे प्राचीन कालेराम मंदिर में नौ दिवसीय नवाह पारायण व अन्य अनुष्ठानों का रविवार को भव्य समापन हुआ। आयोजन की कड़ी में भगवान राम के अयोध्या लौटने के बाद उनका रामराज्याभिषेक किया गया।
संतों व वैदिक आचार्यों ने रामचरित मानस में वर्णित रामराज्याभिषेक के पदों को गुनगुनाया तो माहौल भक्तिमय हो उठा। मंदिर के व्यवस्थापक राघवेंद्र देश पांडेय ने बताया कि हर साल मंदिर में सावन मास में प्रेम पाठ होता है। यह प्राचीन परंपरा है, पहले इस परंपरा का निर्वहन साधु-संत सरयू के घाटों के किनारे करते रहे, लेकिन अब इस परंपरा का निर्वहन कालेराम मंदिर में अनुष्ठानों के मध्य होता है। इस दौरान नौ दिनों तक विभिन्न अनुष्ठान होते हैं, प्रेम पाठ कर भगवान के चरणों में श्रद्धा अर्पित की जाती है।
मंदिर के गोपाल राव देश पांडेय ने बताया कि समापन कार्यक्रम में जगद्गुरू रामदिनेशाचार्य, महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी, महंत रामशरण दास रामायणी, महंत रामदास नाका, महंत गिरीश दास सहित अन्य संतों की भी मौजूदगी रही। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
संतों व वैदिक आचार्यों ने रामचरित मानस में वर्णित रामराज्याभिषेक के पदों को गुनगुनाया तो माहौल भक्तिमय हो उठा। मंदिर के व्यवस्थापक राघवेंद्र देश पांडेय ने बताया कि हर साल मंदिर में सावन मास में प्रेम पाठ होता है। यह प्राचीन परंपरा है, पहले इस परंपरा का निर्वहन साधु-संत सरयू के घाटों के किनारे करते रहे, लेकिन अब इस परंपरा का निर्वहन कालेराम मंदिर में अनुष्ठानों के मध्य होता है। इस दौरान नौ दिनों तक विभिन्न अनुष्ठान होते हैं, प्रेम पाठ कर भगवान के चरणों में श्रद्धा अर्पित की जाती है।
विज्ञापन
मंदिर के गोपाल राव देश पांडेय ने बताया कि समापन कार्यक्रम में जगद्गुरू रामदिनेशाचार्य, महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी, महंत रामशरण दास रामायणी, महंत रामदास नाका, महंत गिरीश दास सहित अन्य संतों की भी मौजूदगी रही। संवाद
विज्ञापन