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मान गए धर्मदास, भूमि पूजन में होंगे शामिल
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अयोध्या। रामलला का पुजारी न बनाए जाने से व्यथित होकर प्रधानमंत्री कार्यालय को कानूनी नोटिस देने वाले निर्वाणी अनी अखाड़े के श्रीमहंत धर्मदास अब मान गए हैं। वे श्रीरामजन्मभूमि मंदिर के भूमि पूजन कार्यक्रम में शामिल होंगे।
महंत धर्मदास श्रीरामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में हिंदू पक्षकार थे। उनका दावा था कि गुरु अभिरामदास ने ही रामलला का प्राकट्योत्सव देखा और पूजन अर्चन शुरू किया। वे बाल्यकाल से ही गुरु महाराज के सानिध्य में रामलला का पूजन करते रहे।
बाबरी विध्वंस के दौरान भी रामलला के विग्रह को अपने कब्जे में लेकर आश्रम में रखे थे। बाद में फिर स्थापित किया। सुप्रीम कोर्ट से फैसले के बाद बने श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बतौर पुजारी महंत धर्मदास को कोई स्थान नहीं दिया।
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इन्हीं बातों से व्यथित होकर उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय को बीते दिनों लीगल नोटिस भेजा था। इसी परिप्रेक्ष्य में उन्हें मनाने बृहस्पतिवार को विहिप के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक दिनेश चंद्र हनुमानगढ़ी स्थित उनके आश्रम पहुंचे और बंद कमरे में वार्ता की। महंत धर्मदास ने कहा कि वे राममंदिर के भूमि पूजन कार्यक्रम में शामिल होंगे। उनका भूमि पूजन से कोई विरोध नहीं है। उधर, विहिप की ओर से दावा किया गया कि दिनेश जी से वार्ता के बाद महंत धर्मदास मान गए हैं।
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महंत धर्मदास श्रीरामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में हिंदू पक्षकार थे। उनका दावा था कि गुरु अभिरामदास ने ही रामलला का प्राकट्योत्सव देखा और पूजन अर्चन शुरू किया। वे बाल्यकाल से ही गुरु महाराज के सानिध्य में रामलला का पूजन करते रहे।
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बाबरी विध्वंस के दौरान भी रामलला के विग्रह को अपने कब्जे में लेकर आश्रम में रखे थे। बाद में फिर स्थापित किया। सुप्रीम कोर्ट से फैसले के बाद बने श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बतौर पुजारी महंत धर्मदास को कोई स्थान नहीं दिया।
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इन्हीं बातों से व्यथित होकर उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय को बीते दिनों लीगल नोटिस भेजा था। इसी परिप्रेक्ष्य में उन्हें मनाने बृहस्पतिवार को विहिप के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक दिनेश चंद्र हनुमानगढ़ी स्थित उनके आश्रम पहुंचे और बंद कमरे में वार्ता की। महंत धर्मदास ने कहा कि वे राममंदिर के भूमि पूजन कार्यक्रम में शामिल होंगे। उनका भूमि पूजन से कोई विरोध नहीं है। उधर, विहिप की ओर से दावा किया गया कि दिनेश जी से वार्ता के बाद महंत धर्मदास मान गए हैं।