फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   ram nagri

रामनगरी में लावारिस लाशों के वारिस हैं...चाचा शरीफ

Fri, 12 Jun 2020 10:45 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 12 Jun 2020 10:45 PM IST
विज्ञापन
ram nagri
अयोध्या। बलरामपुर में कूड़े की गाड़ी पर शव को लेकर जाने जैसी संवेदनहीनता रामनगरी में नहीं हो सकती है। कारण कि यहां चाचा शरीफ हैं। इन्हें लोग लावारिस लाशों का मसीहा कहते हैं। जिसकी सोच ‘न कोई हिंदू न कोई मुसलमान मेरी नजर में सब इंसान’ से शुरू होती है। मोदी सरकार ने चाचा मोहम्मद शरीफ को हाल ही में पद्म श्री अवार्ड से नवाजा है। बलरामपुर की घटना से चाचा शरीफ बेहद दुखद और द्रवित है।
विज्ञापन

दरअसल प्रदेश के बलरामपुर जनपद में एक कूड़े की गाड़ी में लावारिस लाश को लादकर ले जाने के मामले की फोटो वायरल हुई है। इस पर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ी कार्रवाई कर कर्मचारियों व अधिकारियों को निलंबित किया है लेकिन अयोध्या जनपद 27 साल से इस प्रकार की घटनाओं से महफूज है।
विज्ञापन

27 साल से फैजाबाद शहर के खिड़की अली बेग निवासी मो. शरीफ लावारिस लाशों को जलाने व दफनाने का कार्य अनवरत कर रहे हैं। कोई हिंदू या मुसलमान शव हो, वो पूरी धार्मिक रीति से शवों को अपना समझ कर अंतिम संस्कार करते हैं। पिछले 27 सालों में वो साढ़े सात हजार लावारिस शवों को जला व दफना चुके हैं। इनमें 3 हजार से अधिक शव हिंदुओं के व ढाई हजार से अधिक शव मुस्लिमों के हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

हिंदू समुदाय के लावारिस शवों को जलाने के लिए तो उन्होंने जिले के लोगों के सहयोग से एक अलग घाट बनवा दिया है। वहां पर एक आदमी बराबर मिलता है। यही नहीं जिलेवासियों के सहयोग से उन्होंने लावारिस लाशों को पूरे सम्मान से नियत स्थान तक पहुचाने के लिए चार रिक्शे लगा रहे हैं। जो शहर के पोस्टमार्टम हाउस, रेलवे स्टेशन, जिला अस्पताल व एक उनके घर पर हमेशा खड़ा रहता है।
इन्हीं रिक्शों की मदद से लावारिस लाशों को शमशान घाट व कब्रगाह तक पहुंचाया जाता है। मुस्लिम समुदाय की लावारिस लाशों का अंतिम क्रियाकर्म यानी की गुस्ल, नमाज व दफनाने का कार्य वह स्वत: करते हैं जबकि हिंदू समुदाय के लावारिस शवों को जलाने में वह संतोष नामक व्यक्ति का सहयोग लेते हैं। सभी कार्यों का खर्चा वह लोगों के सहयोग से स्वत: उठाते हैं।
लड़के का शव न मिलने से मिली थी प्रेरणा
लावारिस लाशों के मसीहा पद्मश्री मोहम्मद शरीफ बताते हैं कि आज से लगभग 27 वर्ष पूर्व उनका बड़ा लड़का मोहम्मद रईस पड़ोसी जनपद सुल्तानपुर गया था। वहां पर किसी ने उनके लड़के को मार कर फेंक दिया। उनको जानकारी होने पर एक महीने तक खोजबीन जारी रही लेकिन शव नहीं मिला। बाद में शहर के सिलाई की दुकान के स्टीकर से पता कि शव का अंतिम संस्कार नहीं हो सका। इस घटना ने उनको इतना आहत किया कि तब से लेकर आज तक लावारिस लाशों के अंतिम संस्कार में जुट गए और आज तक इस कार्य में लगे हैं। वह बताते हैं कि शुरुआती दिनों में बहुत दिक्कतें आयीं। साइकिल व कंधों पर वो लावारिस लाशों को लादकर अंतिम क्रियाकर्म करते थे। वह बताते हैं कि शुरुआती दौर में लोग लावारिस लाशों को जलाने व दफनाने के लिए उनको पागल व सनकी कहते थे। बाद के दिनों में शहर के कुछ लोगों ने उनका सहयोग करना शुरू किया। तब से ये सिलसिला चल पड़ा।
आसान नहीं है लावारिस शवों को जलाना या दफनाना
कहने में तो बहुत अच्छा लगता है कि लावारिस शवों को जलाना व दफनाना लेकिन वास्तव में ये काम बहुत कठिन है। दरअसल अधिकांश लावारिस शव पुलिस के माध्यम से मिलते हैं। नियमानुसार शवों को कम से कम चार दिन रखना पड़ता है। इसके बाद शव पोस्टमार्टम के लिए जाते हैं। पोस्टमार्टम के बाद लावारिस शवों का अंतिम संस्कार किया जाता हैं। मोहम्मद शरीफ बताते हैं कि अक्सर शवों से दुर्गंध आने लगती है। कई बार तो बहुत छत-विछत शव आते हैं लेकिन सभी का अंतिम संस्कार पूरे धार्मिक तरीके से किया जाता है।

कोरोना काल में भी नहीं हारी हिम्मत
कोरोना काल में देश दुनिया से परिजनों का शव न लेने न जलाने व दफनाने की खबरें आ रहीं हैं। कई जगहों पर परिजन शक में शव छोड़ कर ही भाग जाने की बात सामने आई है लेकिन, इससे इतर मोहम्मद शरीफ अपने कार्यों में लगे हैं। वह बताते हैं गुरुवार को दो हिंदू समुदाय के लावारिस शवों का अंतिम संस्कार किया है। वह बताते हैं कि कोरोना काल में इतनी सावधानी जरूर बरती जा रही है कि हाथ पर पूरा ग्लब्स व मुंह व सिर पर मोटा कपड़ा बांधकर खिदमत को अंजाम दिया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed