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श्रीराम मंदिर के साथ दूर तक फैल जाएगा अयोध्या का वैभव
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अयोध्या। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से श्रीराम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया। अब अयोध्या नई उड़ान के लिए तैयार है। इस उड़ान में अयोध्या के साथ अवध का बड़ा भूूभाग शामिल होगा। आसपास के कई जिलों के लोग शामिल होंगे। इस क्षेत्र के सामाजिक, आध्यात्मिक के बड़ी संख्या में लोगों का आर्थिक विकास भी होगा।
चौरासी कोसी परिक्रमा पथ के जरिए इसे आधार दिया जा चुका है। रामनगरी के बाहर रामायणकालीन ऋषि-महर्षियों की तपस्थलियां आने वाले श्रद्धालु-पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र होंगी। श्रीराम मंदिर के साथ अयोध्या का वैभव बढ़ने वाला है। यह रामनगरी तक सीमित नहीं रहेगा। सर्वे भवन्ति सुखिन: यहां के सूत्र वाक्य में निहित है।
अयोध्या अपनी इस परंपरा को नई उड़ान में भी शामिल करेगी। आभा मंडल में रामनगरी के साथ ही इर्दगिर्द के अवध का बड़ा भूभाग गोंडा, बस्ती, अंबेडकरनगर, बाराबंकी भी शामिल होगा। इसको पुख्ता आधार अयोध्या की चौरासी कोसी परिक्रमा पथ के जरिए पहले ही दिया जा चुका है।
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श्रीराम मंदिर आंदोलन में शामिल रहे यहां के वर्तमान सांसद लल्लू सिंह के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार ने चौरासी कोसी परिक्रमा पथ को फोरलेन किए जाने को स्वीकृति दे दी है। लगभग 275 किमी लंबे इस पथ पर लगभग तीन हजार करोड़ रुपये खर्च का अनुमान है।
श्रीराम मंदिर के साथ यह होंगे विशेष आकर्षण का केंद्र
अयोध्या आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए श्री राम मंदिर के साथ यहां पहुंच कुछ नया होगा। यह केवल मार्ग भर नहीं होगा। इसी चौरासी कोस की परिधि में रामायणकाल के पूर्व अयोध्या में श्रीराम के अवतरण के लिए सकारात्मक ऊर्जा सृजित की गई थी।
इस ऊर्जा का सृजन करने वाले ऋषि गौतम, यमदग्नि, च्यवन, अष्टावक्र, गौतम, शौनक, ऋंगी, तुंदिल, आस्तीक जैसे ऋषियों की तपस्थलियां आकर्षण का केंद्र होंगी तो योगिराज भरत की तपस्थली नंदीग्राम अयोध्या, भगवान श्रीराम का पुंसवन स्थल मखभूमि और रामरेखा बस्ती, भगवान वाराह का मंदिर परसपुर, वाराही देवी मंदिर रगडग़ंज संत तुलसी दास और बाबा नरहरि दास की जन्मस्थली गोंडा, छोटी देवकाली, भगवान राम की कुल देवी माता बड़ी देवकाली, जालपा देवी, सीताकुंड बीकापुर, श्री दुर्गा सप्तसती के प्रणयन स्थल मां कामाख्या भवानी सैदपुर रुदौली स्थल अयोध्या जैसे आध्यात्मिक स्थल यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण केंद्र होंगे। अयोध्या के इर्दगिर्द ऐसे लगभग डेढ़ सौ स्थान हैं।
नई उड़ान के लिए पहले ही खींच गया था खाका
यह महज संयोग कहा जाए या फिर नियति का खेल। श्रीराम मंदिर का फैसला आने के पहले ही अयोध्या के आभा मंडल और वैभव का खाका खिंच गया था। सांसद ने 84 कोसी परिक्रमा पथ के निर्माण के साथ ही इन आध्यात्मिक स्थलों को विकसित और सौंदर्यीकरण के लिए केेंद्र सरकार को प्रस्ताव दिया तो प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसमें एक कड़ी और जोड़ते हुए प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक स्थल को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किए जाने की परियोजना स्वीकृति कर दी।
इसी के तहत लगभग 29 करोड़ रुपये की लागत से मां कामाख्या भवानी का सौंदर्यीकरण का काम होगा। इसी तरह 84 कोस के कई स्थल का विकास इसी के जरिए हो जाएगा।
यह भी हैं अयोध्या के वैभव बढ़ने का आधार
श्रीराम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ होने के पहले अयोध्या के वैभव में श्रीवृद्धि की और इबारत बननी शुरू हो गई थी। अयोध्या पहुंचने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाएं शुरू कर दी गई।
मिथिला की ओर जाने वाला रामजानकी मार्ग, अयोध्या से चित्रकूट फोरलेन, अयोध्या से जगदीशपुर हाइवे, लगभग एक हजार करोड़ की लागत वाला प्रस्तावित श्रीराम एयरपोर्ट सहित अन्य हैं।
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चौरासी कोसी परिक्रमा पथ के जरिए इसे आधार दिया जा चुका है। रामनगरी के बाहर रामायणकालीन ऋषि-महर्षियों की तपस्थलियां आने वाले श्रद्धालु-पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र होंगी। श्रीराम मंदिर के साथ अयोध्या का वैभव बढ़ने वाला है। यह रामनगरी तक सीमित नहीं रहेगा। सर्वे भवन्ति सुखिन: यहां के सूत्र वाक्य में निहित है।
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अयोध्या अपनी इस परंपरा को नई उड़ान में भी शामिल करेगी। आभा मंडल में रामनगरी के साथ ही इर्दगिर्द के अवध का बड़ा भूभाग गोंडा, बस्ती, अंबेडकरनगर, बाराबंकी भी शामिल होगा। इसको पुख्ता आधार अयोध्या की चौरासी कोसी परिक्रमा पथ के जरिए पहले ही दिया जा चुका है।
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श्रीराम मंदिर आंदोलन में शामिल रहे यहां के वर्तमान सांसद लल्लू सिंह के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार ने चौरासी कोसी परिक्रमा पथ को फोरलेन किए जाने को स्वीकृति दे दी है। लगभग 275 किमी लंबे इस पथ पर लगभग तीन हजार करोड़ रुपये खर्च का अनुमान है।
श्रीराम मंदिर के साथ यह होंगे विशेष आकर्षण का केंद्र
अयोध्या आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए श्री राम मंदिर के साथ यहां पहुंच कुछ नया होगा। यह केवल मार्ग भर नहीं होगा। इसी चौरासी कोस की परिधि में रामायणकाल के पूर्व अयोध्या में श्रीराम के अवतरण के लिए सकारात्मक ऊर्जा सृजित की गई थी।
इस ऊर्जा का सृजन करने वाले ऋषि गौतम, यमदग्नि, च्यवन, अष्टावक्र, गौतम, शौनक, ऋंगी, तुंदिल, आस्तीक जैसे ऋषियों की तपस्थलियां आकर्षण का केंद्र होंगी तो योगिराज भरत की तपस्थली नंदीग्राम अयोध्या, भगवान श्रीराम का पुंसवन स्थल मखभूमि और रामरेखा बस्ती, भगवान वाराह का मंदिर परसपुर, वाराही देवी मंदिर रगडग़ंज संत तुलसी दास और बाबा नरहरि दास की जन्मस्थली गोंडा, छोटी देवकाली, भगवान राम की कुल देवी माता बड़ी देवकाली, जालपा देवी, सीताकुंड बीकापुर, श्री दुर्गा सप्तसती के प्रणयन स्थल मां कामाख्या भवानी सैदपुर रुदौली स्थल अयोध्या जैसे आध्यात्मिक स्थल यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण केंद्र होंगे। अयोध्या के इर्दगिर्द ऐसे लगभग डेढ़ सौ स्थान हैं।
नई उड़ान के लिए पहले ही खींच गया था खाका
यह महज संयोग कहा जाए या फिर नियति का खेल। श्रीराम मंदिर का फैसला आने के पहले ही अयोध्या के आभा मंडल और वैभव का खाका खिंच गया था। सांसद ने 84 कोसी परिक्रमा पथ के निर्माण के साथ ही इन आध्यात्मिक स्थलों को विकसित और सौंदर्यीकरण के लिए केेंद्र सरकार को प्रस्ताव दिया तो प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसमें एक कड़ी और जोड़ते हुए प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक स्थल को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किए जाने की परियोजना स्वीकृति कर दी।
इसी के तहत लगभग 29 करोड़ रुपये की लागत से मां कामाख्या भवानी का सौंदर्यीकरण का काम होगा। इसी तरह 84 कोस के कई स्थल का विकास इसी के जरिए हो जाएगा।
यह भी हैं अयोध्या के वैभव बढ़ने का आधार
श्रीराम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ होने के पहले अयोध्या के वैभव में श्रीवृद्धि की और इबारत बननी शुरू हो गई थी। अयोध्या पहुंचने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाएं शुरू कर दी गई।
मिथिला की ओर जाने वाला रामजानकी मार्ग, अयोध्या से चित्रकूट फोरलेन, अयोध्या से जगदीशपुर हाइवे, लगभग एक हजार करोड़ की लागत वाला प्रस्तावित श्रीराम एयरपोर्ट सहित अन्य हैं।