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आपत्ति के बाद श्री राम मंदिर ट्रस्ट ने जारी किया नया लोगो
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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा जारी किया गया लोगो
- फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। हनुमान जयंती पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा जारी किए गये लोगो को लेकर खड़े हुए विवाद के बाद ट्रस्ट ने गुरुवार को सुबह गलती सुधार कर नया लोगो जारी कर दिया। लोगो में एक हलंत न लगने से अर्थ का अनर्थ हो गया था, इसे लेकर विहिप से जुड़े विश्वेषतीर्थ और गोविंद गिरी महराज ने भी आपत्ति जताई थी।
मामले में रामालय ट्रस्ट के सचिव स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने ट्रस्ट के अध्यक्ष को पत्र लिखकर यहां तक आरोप लगाया कि राम को अधर्म का विग्रह बताने वाले ट्रस्टियों को बर्खास्त कर देना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि लोगो में सुधार नहीं किया गया तो संत आंदोलन को बाध्य होंगे।
रामालय ट्रस्ट के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का आरोप था कि लोगो में रामजी को अधर्म का साक्षात विग्रह बताया गया है। यह अत्यंत आपत्तिजनक है।
लोगो तत्काल वापस लिया जाए। देश से ट्रस्टी और सरकार माफी मांगें। राम साक्षात धर्म हैं अधर्म नहीं। स्वामी ने बताया कि लोगो के मध्य लिखे गये वाक्य में ‘रामो विग्रहवान धर्म:’ लिखा है जो कि संस्कृत भाषा में है। जिसका संस्कृत भाषा में विग्रह करने पर ‘राम: विग्रहवान् अधर्म:’ होता है। जो कि अत्यन्त आपत्तिजनक ही नहीं अपितु निन्दनीय है।
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लोगों में हनुमान जी के दो चित्र पर भी उठाई आपत्ति
राम मंदिर ट्रस्ट के लोगो में हनुमान जी के दो चित्र बने हुए हैं। इसे लेकर भी रामालय ट्रस्ट के सचिव ने आपत्ति उठाई है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का तर्क है कि हनुमान जी प्रभु राम के अनन्य भक्त हैं। उनका बड़ा महत्व है, यह सब सही है, लेकिन राम जन्मभूमि में जन्म का जहां प्रसंग है, वहां हनुमान जी का चित्र लोगों में रखने का कोई औचित्य नहीं समझ में आता। यदि रखना भी है तो एक हनुमानजी का एक चित्र रखना चाहिए जबकि लोगो में दो-दो हनुमान जी के चित्र दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने सवाल किया है कि क्या ट्रस्ट दो हनुमान को मान्यता देना चाहता है? उधर, श्रीराम जन्मभूमि के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास कहते हैं कि लोगों में हनुमानजी के दो चित्र पर सवाल खड़ा करना बेवजह की बात है। यह कहां लिखा है कि हनुमानजी के दो चित्र नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि जो सवाल खड़ा कर रहे हैं वह आगे आकर शास्त्रीय प्रमाण देकर इसे गलत साबित करें।
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मामले में रामालय ट्रस्ट के सचिव स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने ट्रस्ट के अध्यक्ष को पत्र लिखकर यहां तक आरोप लगाया कि राम को अधर्म का विग्रह बताने वाले ट्रस्टियों को बर्खास्त कर देना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि लोगो में सुधार नहीं किया गया तो संत आंदोलन को बाध्य होंगे।
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रामालय ट्रस्ट के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का आरोप था कि लोगो में रामजी को अधर्म का साक्षात विग्रह बताया गया है। यह अत्यंत आपत्तिजनक है।
लोगो तत्काल वापस लिया जाए। देश से ट्रस्टी और सरकार माफी मांगें। राम साक्षात धर्म हैं अधर्म नहीं। स्वामी ने बताया कि लोगो के मध्य लिखे गये वाक्य में ‘रामो विग्रहवान धर्म:’ लिखा है जो कि संस्कृत भाषा में है। जिसका संस्कृत भाषा में विग्रह करने पर ‘राम: विग्रहवान् अधर्म:’ होता है। जो कि अत्यन्त आपत्तिजनक ही नहीं अपितु निन्दनीय है।
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लोगों में हनुमान जी के दो चित्र पर भी उठाई आपत्ति
राम मंदिर ट्रस्ट के लोगो में हनुमान जी के दो चित्र बने हुए हैं। इसे लेकर भी रामालय ट्रस्ट के सचिव ने आपत्ति उठाई है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का तर्क है कि हनुमान जी प्रभु राम के अनन्य भक्त हैं। उनका बड़ा महत्व है, यह सब सही है, लेकिन राम जन्मभूमि में जन्म का जहां प्रसंग है, वहां हनुमान जी का चित्र लोगों में रखने का कोई औचित्य नहीं समझ में आता। यदि रखना भी है तो एक हनुमानजी का एक चित्र रखना चाहिए जबकि लोगो में दो-दो हनुमान जी के चित्र दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने सवाल किया है कि क्या ट्रस्ट दो हनुमान को मान्यता देना चाहता है? उधर, श्रीराम जन्मभूमि के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास कहते हैं कि लोगों में हनुमानजी के दो चित्र पर सवाल खड़ा करना बेवजह की बात है। यह कहां लिखा है कि हनुमानजी के दो चित्र नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि जो सवाल खड़ा कर रहे हैं वह आगे आकर शास्त्रीय प्रमाण देकर इसे गलत साबित करें।