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श्वेत क्रांति की वाहक बनीं रजपती
फैजाबाद
Updated Sat, 04 Mar 2017 11:58 PM IST
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शनिवार को मिल्कीपुर के धमथुआ गांव में गोशाला में काम करतीं राजपती देवी।
- फोटो : अमर उजाला
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तमाम समाजिक बेड़ियों और विपरीत हालात के बावजूद महिलाएं लगातार आगे बढ़ नई इबारत गढ़ रही हैं। राजपती खुद दस्तखत नहीं कर पाती पर मिल्कीपुर क्षेत्र में हौसले की लंबी लकीर खींच दी है। दो दुधारू पशुओं के जरिए काम शुरू किया। धमथुआ में एक डेढ़ दशक पहले एक दीया जला जो अब दीयों की लड़ी बन आर्थिक स्वावलंबन की रोशनी बिखेर रही है।
मिल्कीपुर तहसील के धमथुआ गांव की रजपता ग्रामीण क्षेत्र में सफेद क्रांति की लौ जलाए हुए महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनीं हुई हैं। दो गायों से कारोबार शुरू किया जो अब एक बड़ी डेयरी के रूप में हो गई है। राजपती को तहसील, जिला और राजधानी स्तर से कई सम्मान मिल चुके हैं।
राजपती ने गायों को सहलाते हुए कहा कि इन्हीं गायाें के बीच में मेरा मन लगता है। गायों को चारा कोई भी डाले, लेकिन गायें चारा खाई या नहीं इसका निरीक्षण वह स्वयं करती हैं। राजपती यादव को पशुपालन में प्रथम महिला पुरस्कार के साथ ही प्रदेश में प्रथम दुग्ध उत्पादक का खिताब सहित दर्जनों पुरस्कार भी मिल चुका है। वह किसानों एवं दुग्ध उत्पादकों के लिए प्रेरणास्रोेत हैं।
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अपनी दो बेटियों के साथ करीब 70 गाय-भैंस की डेयरी चलाने वाली राजपती कहती हैं कि शुरुआती दौर में यह काम बड़ा कठिन लग रहा था। लेकिन पशुपालन करके कुछ कर दिखाने का संकल्प ही हमको इस मुकाम तक पहुंचाया है। कहा कि वर्ष 2000 से अब तक इस कार्य में कई उतार चढ़ाव आये, लेकिन हिम्मत नहीं हारी।
दो वर्ष पहले एक दर्जन गायों की मौत हो गई, पर हौसला नहीं टूटा। कहा कि कई बार गोकुल सम्मान मिला। वर्ष 2015 में मुख्यमंत्री से एग्री हाईटेक एवं इंटरनेशनल एक्जीविशन आन एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी पुरस्कार मिल चुका है।
राजपती ने कहा कि जब काम शुरू किया तो लोग हंसी और ताने देते थे लेकिन अब मेरी सुन रहे हैं। मेरी डेयरी से औसतन पांच सौ लीटर प्रतिदिन दूध का उत्पादन हो रहा है। इस कार्य से प्रेरित होकर आसपास के क्षेत्र में दर्जनों लोगों ने डेयरी उद्योग लगाकर गांव में ही रोजगार का सृजन किया है।
यही नहीं, उनके गांव धमथुआ में आज प्रत्येक परिवार में दो- तीन गाय-भैंसे पाली गई हैं। राजपती कहती हैं कि दुग्ध डेयरी की आमदनी से बच्चों की पढ़ाई के साथ उन्होंने करीब तीस बीघा जमीन के साथ ही मकान दुकान व वाहनों की व्यवस्था की है।
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मिल्कीपुर तहसील के धमथुआ गांव की रजपता ग्रामीण क्षेत्र में सफेद क्रांति की लौ जलाए हुए महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनीं हुई हैं। दो गायों से कारोबार शुरू किया जो अब एक बड़ी डेयरी के रूप में हो गई है। राजपती को तहसील, जिला और राजधानी स्तर से कई सम्मान मिल चुके हैं।
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राजपती ने गायों को सहलाते हुए कहा कि इन्हीं गायाें के बीच में मेरा मन लगता है। गायों को चारा कोई भी डाले, लेकिन गायें चारा खाई या नहीं इसका निरीक्षण वह स्वयं करती हैं। राजपती यादव को पशुपालन में प्रथम महिला पुरस्कार के साथ ही प्रदेश में प्रथम दुग्ध उत्पादक का खिताब सहित दर्जनों पुरस्कार भी मिल चुका है। वह किसानों एवं दुग्ध उत्पादकों के लिए प्रेरणास्रोेत हैं।
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अपनी दो बेटियों के साथ करीब 70 गाय-भैंस की डेयरी चलाने वाली राजपती कहती हैं कि शुरुआती दौर में यह काम बड़ा कठिन लग रहा था। लेकिन पशुपालन करके कुछ कर दिखाने का संकल्प ही हमको इस मुकाम तक पहुंचाया है। कहा कि वर्ष 2000 से अब तक इस कार्य में कई उतार चढ़ाव आये, लेकिन हिम्मत नहीं हारी।
दो वर्ष पहले एक दर्जन गायों की मौत हो गई, पर हौसला नहीं टूटा। कहा कि कई बार गोकुल सम्मान मिला। वर्ष 2015 में मुख्यमंत्री से एग्री हाईटेक एवं इंटरनेशनल एक्जीविशन आन एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी पुरस्कार मिल चुका है।
राजपती ने कहा कि जब काम शुरू किया तो लोग हंसी और ताने देते थे लेकिन अब मेरी सुन रहे हैं। मेरी डेयरी से औसतन पांच सौ लीटर प्रतिदिन दूध का उत्पादन हो रहा है। इस कार्य से प्रेरित होकर आसपास के क्षेत्र में दर्जनों लोगों ने डेयरी उद्योग लगाकर गांव में ही रोजगार का सृजन किया है।
यही नहीं, उनके गांव धमथुआ में आज प्रत्येक परिवार में दो- तीन गाय-भैंसे पाली गई हैं। राजपती कहती हैं कि दुग्ध डेयरी की आमदनी से बच्चों की पढ़ाई के साथ उन्होंने करीब तीस बीघा जमीन के साथ ही मकान दुकान व वाहनों की व्यवस्था की है।