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वशिष्ठ सम्मान से सम्मानित हुए पूर्व प्राचार्य ब्रह्मानंद पाठक
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अयोध्या। पं. श्री उमापति त्रिपाठी की स्मृति में रविवार को एकाग्र संगोष्ठी, सम्मान समारोह एवं भजन संध्या का आयोजन अयोध्या के राजकीय तुलसी उद्यान में किया गया। कार्यक्रम में सनातन संस्कृति उत्थान के क्षेत्र में वशिष्ठ सम्मान ब्रह्मानंद पाठक जी (पूर्व प्राचार्य राजगोपाल, संस्कृत महाविद्यालय) को तथा सामाजिक सेवा के क्षेत्र में बृजनंदन ब्रह्मचारी सम्मान आत्मप्रकाश मिश्र (दूरदर्शन लखनऊ) को दिया गया। सम्मान स्वरूप दोनों विभूतियों को अंग वस्त्र व 21 हजार रुपये की नगद धनराशि दी गई।
इससे पूर्व कार्यक्रम का उद्घाटन अवध विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित ने दीप जलाकर किया। कार्यक्रम के संयोजक तिवारी मंदिर के महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने बताया कि पंडित उमा पति त्रिपाठी की गणना रामनगरी के सिद्ध संतों में होती रही। उन्हें वशिष्ठा अवतार माना जाता है।
मान्यता है कि वह भगवान राम को अपने शिष्य के रूप में पूजते थे । वह प्रतिदिन कनक बिहारी सरकार का दर्शन करने जाते थे। एक दिन जब वह पहुंचे तो कनक बिहारी का मुकुट उनके सम्मान में झुक गया। यहां पर मौजूद संत एवं श्रद्धालु आश्चर्यचकित रह गए। इसी के बाद संतों ने उन्हें वशिष्ठा अवतार के गौरव से विभूषित किया।
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कार्यक्रम में अवध विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित ने कहा कि रामनगरी संतों की साधना स्थली रही है। पंडित उमापति जैसे संतों ने रामनगरी का गौरव बढ़ाने का काम किया है।
कार्यक्रम में भजन संध्या का भी आयोजन किया गया। जिसमें राइजिंग स्टार उपविजेता मैथिली ठाकुर के लोक गीतों पर सभी भावविभोर हो उठे। समारोह में सांसद लल्लू सिंह, श्री राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास, श्रीराम वल्लभा कुंज के अधिकारी राजकुमार दास, नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास, जगद्गुरु डॉक्टर राघवाचार्य, महंत मिथलेश नंदनी शरण, साहित्यकार यतींद्र मिश्र, महंत शशिकांत दास आचार्य गुनाडा शास्त्री संत रविदास सहित बड़ी संख्या में संत-महंत आदि मौजूद रहे।
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इससे पूर्व कार्यक्रम का उद्घाटन अवध विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित ने दीप जलाकर किया। कार्यक्रम के संयोजक तिवारी मंदिर के महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने बताया कि पंडित उमा पति त्रिपाठी की गणना रामनगरी के सिद्ध संतों में होती रही। उन्हें वशिष्ठा अवतार माना जाता है।
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मान्यता है कि वह भगवान राम को अपने शिष्य के रूप में पूजते थे । वह प्रतिदिन कनक बिहारी सरकार का दर्शन करने जाते थे। एक दिन जब वह पहुंचे तो कनक बिहारी का मुकुट उनके सम्मान में झुक गया। यहां पर मौजूद संत एवं श्रद्धालु आश्चर्यचकित रह गए। इसी के बाद संतों ने उन्हें वशिष्ठा अवतार के गौरव से विभूषित किया।
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कार्यक्रम में अवध विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित ने कहा कि रामनगरी संतों की साधना स्थली रही है। पंडित उमापति जैसे संतों ने रामनगरी का गौरव बढ़ाने का काम किया है।
कार्यक्रम में भजन संध्या का भी आयोजन किया गया। जिसमें राइजिंग स्टार उपविजेता मैथिली ठाकुर के लोक गीतों पर सभी भावविभोर हो उठे। समारोह में सांसद लल्लू सिंह, श्री राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास, श्रीराम वल्लभा कुंज के अधिकारी राजकुमार दास, नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास, जगद्गुरु डॉक्टर राघवाचार्य, महंत मिथलेश नंदनी शरण, साहित्यकार यतींद्र मिश्र, महंत शशिकांत दास आचार्य गुनाडा शास्त्री संत रविदास सहित बड़ी संख्या में संत-महंत आदि मौजूद रहे।