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20 जनवरी के बाद शुरू होगा प्लिंथ निर्माण
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अयोध्या। राममंदिर निर्माण का काम जोरों पर चल रहा है। नींव के ऊपर डेढ़ मीटर की राफ्ट की ढलाई हो चुकी है। अभी राफ्ट को प्राकृतिक रूप से सुखाया जा रहा है। राफ्ट तीस ब्लॉक में ढाली गई है, सभी ब्लॉक जब सूख जाएंगे तब प्लिंथ का निर्माण शुरू होगा। राममंदिर ट्रस्ट का कहना है कि 20 जनवरी के बाद नींव के ऊपर प्लिंथ ढालने का काम भी शुरू कर दिया जाएगा। छह मीटर ऊंची प्लिंथ से राममंदिर की नींव को और अधिक मजबूती मिलेगी। प्लिंथ में लगने वाले पत्थरों की आपूर्ति भी तेजी से हो रही है।
श्रीराममंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दिसंबर 2023 तक भव्य गर्भगृह में रामलला को विराजित करने का लक्ष्य तय कर रखा है। नींव निर्माण के दूसरे चरण के तहत अब प्लिंथ का निर्माण शुरू होगा। 20 जनवरी के बाद प्लिंथ का काम शुरू होने की पूरी उम्मीद है। प्लिंथ छह मीटर ऊंची होगी। प्लिंथ में किनारे-किनारे जोधुपर के पत्थर और बीच में ग्रेनाइट लगाए जाएंगे।
प्लिंथ में करीब 20 हजार पत्थर लगने हैं जिनकी आपूर्ति तेजी से की जा रही है। प्लिंथ के ऊपर ही राममंदिर का गर्भगृह आकार लेगा। प्लिंथ निर्माण का कार्य अप्रैल तक पूरा करने का लक्ष्य है। प्लिंथ में चार गुणा दो फीट लंबे-चौड़े अलग-अलग करीब 20 हजार ब्लॉक का प्रयोग किया जाएगा। अब तक करीब तीन हजार पत्थरों के ब्लॉक रामजन्मभूमि में पहुंच चुके हैं।
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वहीं दूसरी तरफ राममंदिर के तीन तरफ बनने वाली रिटेनिंग वॉल का निर्माण कार्य भी चल रहा है। अभी पश्चिमी दिशा में काम हो रहा है। ट्रस्ट सूत्रों ने बताया कि रिटेनिंग वॉल के निर्माण का काम पूरा होने में कम से कम छह माह लग जाएंगे। इसके बाद राममंदिर के परकोटे का काम शुरू होगा।
राममंदिर के आर्किटेक्ट आशीष सोमपुरा बताते हैं कि तीन महीने से राजस्थान के बंशीपहाड़पुर के गुलाबी पत्थर तराशे जा रहे हैं। इसके लिए दो हजार से ज्यादा कारीगर लगे हैं। नक्काशी का काम अयोध्या की एक कार्यशाला के साथ ही राजस्थान के सिरोही की तीन कार्यशालाओं में हो रहा है। पत्थर तराशने का ज्यादातर काम कारीगर कर रहे हैं। मशीनों का प्रयोग 10 फीसदी से भी कम ही है। राममंदिर के पत्थर तराश कर रामजन्मभूमि राजस्थान से सीधे लाए जाएंगे, इन्हें बस जोड़ना रहेगा।
श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि राममंदिर की नींव को मजबूती प्रदान करने के लिए ही प्लिंथ का निर्माण किया जाना है। यह काम 20 जनवरी के बाद शुरू हो जाएगा, इसकी पूरी संभावना है। अभी नींव के ऊपर ढाली गई राफ्ट को प्राकृतिक रूप से सुखाया जा रहा है। फिल्ड मटेरियल जितनी सूखेगी, उतना ही नींव को मजबूती मिलेगी।
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श्रीराममंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दिसंबर 2023 तक भव्य गर्भगृह में रामलला को विराजित करने का लक्ष्य तय कर रखा है। नींव निर्माण के दूसरे चरण के तहत अब प्लिंथ का निर्माण शुरू होगा। 20 जनवरी के बाद प्लिंथ का काम शुरू होने की पूरी उम्मीद है। प्लिंथ छह मीटर ऊंची होगी। प्लिंथ में किनारे-किनारे जोधुपर के पत्थर और बीच में ग्रेनाइट लगाए जाएंगे।
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प्लिंथ में करीब 20 हजार पत्थर लगने हैं जिनकी आपूर्ति तेजी से की जा रही है। प्लिंथ के ऊपर ही राममंदिर का गर्भगृह आकार लेगा। प्लिंथ निर्माण का कार्य अप्रैल तक पूरा करने का लक्ष्य है। प्लिंथ में चार गुणा दो फीट लंबे-चौड़े अलग-अलग करीब 20 हजार ब्लॉक का प्रयोग किया जाएगा। अब तक करीब तीन हजार पत्थरों के ब्लॉक रामजन्मभूमि में पहुंच चुके हैं।
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वहीं दूसरी तरफ राममंदिर के तीन तरफ बनने वाली रिटेनिंग वॉल का निर्माण कार्य भी चल रहा है। अभी पश्चिमी दिशा में काम हो रहा है। ट्रस्ट सूत्रों ने बताया कि रिटेनिंग वॉल के निर्माण का काम पूरा होने में कम से कम छह माह लग जाएंगे। इसके बाद राममंदिर के परकोटे का काम शुरू होगा।
राममंदिर के आर्किटेक्ट आशीष सोमपुरा बताते हैं कि तीन महीने से राजस्थान के बंशीपहाड़पुर के गुलाबी पत्थर तराशे जा रहे हैं। इसके लिए दो हजार से ज्यादा कारीगर लगे हैं। नक्काशी का काम अयोध्या की एक कार्यशाला के साथ ही राजस्थान के सिरोही की तीन कार्यशालाओं में हो रहा है। पत्थर तराशने का ज्यादातर काम कारीगर कर रहे हैं। मशीनों का प्रयोग 10 फीसदी से भी कम ही है। राममंदिर के पत्थर तराश कर रामजन्मभूमि राजस्थान से सीधे लाए जाएंगे, इन्हें बस जोड़ना रहेगा।
श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि राममंदिर की नींव को मजबूती प्रदान करने के लिए ही प्लिंथ का निर्माण किया जाना है। यह काम 20 जनवरी के बाद शुरू हो जाएगा, इसकी पूरी संभावना है। अभी नींव के ऊपर ढाली गई राफ्ट को प्राकृतिक रूप से सुखाया जा रहा है। फिल्ड मटेरियल जितनी सूखेगी, उतना ही नींव को मजबूती मिलेगी।