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गोद में मरीज, कंधे पर स्ट्रेचर

Sat, 24 Sep 2022 11:42 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 24 Sep 2022 11:42 PM IST
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patient in lap, strechar on shoulder, mis management in hospital
अयोध्या। जिम्मेदारों की लापरवाही का आलम देखना हो तो जिला अस्पताल आइए। आधी-अधूरी तैयारियों के बीच महिला अस्पताल व क्षेत्रीय निदान केंद्र जाने के रास्ते को अवरुद्ध दिया गया है। अब जांच कराने के लिए मरीजों को उनके तीमारदार गोद में उठाकर और कंधे पर स्ट्रेचर रखकर ले जाते नजर आ रहे हैं। इस कसरत में मरीजों का दर्द तो बढ़ ही रहा है, उनकी जान भी जोखिम में पड़ रही है।
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जिला अस्पताल की ओपीडी प्रतिदिन करीब 1500 के निकट रहती है। इन दिनों वायरल बुखार का सीजन चल रहा है। ओपीडी में प्रतिदिन करीब 60 फीसदी मरीज सर्दी, जुकाम, बुखार आदि से संबंधित आ रहे हैं। इन मरीजों के चिकित्सीय परामर्श व भर्ती करके इलाज करने की सुविधा तो इसी परिसर में है, लेकिन रक्त से संबंधित समस्त जांचें महिला अस्पताल के पीछे स्थित क्षेत्रीय निदान केंद्र में होती है।
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भर्ती मरीजों के खून की जांच तो उनके बेड से ही होती है, लेकिन ओपीडी में आए गंभीर मरीजों को केंद्र तक जाना पड़ता है। मारपीट व अन्य मामलों में मेडिकोलीगल भी वहीं ही होता है। अभी तक लोग महिला अस्पताल से होकर केंद्र में सेवाएं ले रहे थे, लेकिन कुछ दिनों से लोगों को जांच आदि के लिए नाकों चने चबाने पड़ रहे हैं।
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जिला अस्पताल के जनरल वार्ड के सामने बने ऑक्सीजन प्लांट के बीच बची जगह से होकर लोग केंद्र व महिला अस्पताल की तरफ जाते हैं। लेकिन दोनों के बीच के रास्ते को अस्पताल प्रशासन ने जानबूझकर अवरुद्ध कर दिया है। बीच में एक पिलर लगा दिया गया है, जिसकी वजह से सामान्य व्यक्ति पैदल तो जा सकता है, लेकिन स्ट्रेचर पर मरीजों को ले जाना संभव नहीं है। इसके पहले जनरेटर कक्ष के पास एक चैनल लगा है, वहां से भी लोगों का आवागमन होता है, लेकिन उसमें भी ताला बंद कर दिया गया है।
इनायतनगर थाना क्षेत्र के पलिया लोहानी निवासी ज्योति (17) पुत्री रामसुंदर को शनिवार को मेडिकोलीगल के लिए एक्सरे कराना था। इसके लिए परिजन स्ट्रेचर पर लादकर उसे केंद्र तक ले जा रहे थे। पहले गेट पर ताला खुलवाने के लिए तीमारदार घंटों संघर्ष करते रहे, लेकिन जब ताला नहीं खुला तो जनरल वार्ड के सामने के रास्ते से मरीज को गोदी में उठाकर व स्ट्रेचर को कंधे पर लादकर किसी तरह उस पार पहुंचे। ज्योति की कमर में पहले से चोट लगी थी, गोदी में उठाने के कारण उसकी पीड़ा और बढ़ गई। जांच कराकर जब वापस लौटे तो फिर वही तरीका अस्पताल में प्रवेश के लिए अपनाना पड़ा।

इन दिनों यह दुर्गति तमाम मरीजों की प्रतिदिन हो रही है। लेकिन न तो पोल हटाया जा रहा है और न ही कोई दूसरी व्यवस्था की जा रही है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. सीबीएन त्रिपाठी ने बताया कि जनरल वार्ड के सामने से लोग वाहन लेकर गुजरते थे। मरीजों की सुविधा को देखते हुए वहां पर पिलर लगा दिया गया है। अब भर्ती मरीजों का मेडिको लीगल इसी परिसर में करने की व्यवस्था की जा रही है।
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