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दो बच्चियों संग घर से निकाली गई महिला को घर में रखने का दिया आदेश
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अयोध्या। राज्य महिला आयोग की सदस्य इंद्रवास सिंह शुक्रवार को एक पीड़ित महिला की व्यथा सुनने उसके घर पहुंच गई। पीड़ित महिला का आरोप था कि उसको विवेकानंदपुरम कॉलोनी स्थित घर से गुरुवार को एसडीएम सदर ने जबरिया बाहर करा दिया।
वह अपनी दो बेटियों और सामान के साथ सड़क पर आ गई। उन्होंने उसको घर में रखवाए जाने का निर्देश दिया। लेकिन शाम तक उसे घर में प्रवेश नहीं मिला था। हालांकि प्रशासन के अफसरों ने आयोग को उसका सामान घर में रखवाने की बात बताई है।
पीड़ित देवकाली के विवेकानंद पुरम कॉलोनी के रहने वाली शिप्रा शुक्ल पत्नी दिवंगत मनीष कुमार शुक्ल ने राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष को भेजे गए पत्र में बताया कि 17 जून को एसडीएम सदर ज्योति सिंह ने बिना किसी पूर्व नोटिस या न्यायिक आदेश व पूर्व सूचना के बलपूर्वक उसे, देवर आशीष कुमार शुक्ल साथ दो बेटियों तरुनिका(11), जाह्नवी(06) को सामान सहित घर से निकालकर दिया।
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एसडीएम से निवेदन किया रात में बारिश के समय उसको घर से न निकाला जाए लेकिन सामान बाहर फेंक दिया गया। पीड़िता ने सामान सहित घर में वापसी और एसडीएम के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की।
इस पर शुक्रवार को यहां पहुंची आयोग की सदस्य इंद्रवास सिंह उसके घर पहुंची। व्यथा सुनी। उन्होंने कहा कि बगैर किसी न्यायालय या सक्षम आदेश के महिला को उसके बच्चों को एसडीएम सदर ने बाहर करवाया है। यह कत्तई उचित नहीं है।
मैं वहां गई थी। मैंने महिला और उसका सामान घर के अंदर करवाने के लिए कहा है, लेकिन पता चल रहा है कि अब तक महिला के साथ उसका सामान घर के अंदर नहीं करवाया गया।
आयोग ने डीएम और एसएसपी को महिला को सामान सहित घर के अंदर करवाने का आदेश भेजा है। यहां से महिला और सामान को कल शाम ही अंदर कराने की सूचना भेज दी गई। किस स्तर पर यह मैनेज हो रहा है, समझ नहीं आ रहा। मैं आयोग की अध्यक्ष और मुख्यमंत्री से बात करने की कोशिश कर रही हूं।
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वह अपनी दो बेटियों और सामान के साथ सड़क पर आ गई। उन्होंने उसको घर में रखवाए जाने का निर्देश दिया। लेकिन शाम तक उसे घर में प्रवेश नहीं मिला था। हालांकि प्रशासन के अफसरों ने आयोग को उसका सामान घर में रखवाने की बात बताई है।
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पीड़ित देवकाली के विवेकानंद पुरम कॉलोनी के रहने वाली शिप्रा शुक्ल पत्नी दिवंगत मनीष कुमार शुक्ल ने राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष को भेजे गए पत्र में बताया कि 17 जून को एसडीएम सदर ज्योति सिंह ने बिना किसी पूर्व नोटिस या न्यायिक आदेश व पूर्व सूचना के बलपूर्वक उसे, देवर आशीष कुमार शुक्ल साथ दो बेटियों तरुनिका(11), जाह्नवी(06) को सामान सहित घर से निकालकर दिया।
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एसडीएम से निवेदन किया रात में बारिश के समय उसको घर से न निकाला जाए लेकिन सामान बाहर फेंक दिया गया। पीड़िता ने सामान सहित घर में वापसी और एसडीएम के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की।
इस पर शुक्रवार को यहां पहुंची आयोग की सदस्य इंद्रवास सिंह उसके घर पहुंची। व्यथा सुनी। उन्होंने कहा कि बगैर किसी न्यायालय या सक्षम आदेश के महिला को उसके बच्चों को एसडीएम सदर ने बाहर करवाया है। यह कत्तई उचित नहीं है।
मैं वहां गई थी। मैंने महिला और उसका सामान घर के अंदर करवाने के लिए कहा है, लेकिन पता चल रहा है कि अब तक महिला के साथ उसका सामान घर के अंदर नहीं करवाया गया।
आयोग ने डीएम और एसएसपी को महिला को सामान सहित घर के अंदर करवाने का आदेश भेजा है। यहां से महिला और सामान को कल शाम ही अंदर कराने की सूचना भेज दी गई। किस स्तर पर यह मैनेज हो रहा है, समझ नहीं आ रहा। मैं आयोग की अध्यक्ष और मुख्यमंत्री से बात करने की कोशिश कर रही हूं।