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Ayodhya News: नगर निगम ने कंपनी को सौंप दिया कचरा कलेक्शन का ठेका
Wed, 08 Feb 2023 08:00 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Wed, 08 Feb 2023 08:00 PM IST
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अयोध्या। नगर निगम संचालन के लिए शासन ने जिलाधिकारी की अध्यक्षता में भले ही तीन सदस्यीय कमेटी बनाई हो, लेकिन उसे नीतिगत फैसले लेने का अधिकार नहीं सौंपा। बावजूद इसके नगर निगम के अधिकारियों ने शहर के विस्तारित क्षेत्र में कचरा उठाने का ठेका एक नई कंपनी को दे दिया है।
इसका टेंडर कब हुआ और अनुबंध कब हुआ। इसकी कानोंकान भनक पूर्व महापौर से लेकर बोर्ड के पुराने सदस्यों तक को नहीं लगी है। इस नए निर्णय को लेकर पूर्व पार्षदों में भारी सुगबुगाहट है और इसका विरोध भी हो सकता है।
अपर नगर आयुक्त अरुण कुमार गुप्ता के अनुसार शहर के विस्तारित क्षेत्र यानी नए शामिल किए गए 21 गांवों के क्षेत्र में अब पृथ्वी एग्रो नाम की कंपनी डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन का काम करेगी। यह कंपनी सरचार्ज के रूप में नागरिकों से 50 रुपये प्रतिमाह भी वसूल करेगी।
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जबकि अभी पूरे शहर में यह व्यवस्था लागू नहीं है। इस नई व्यवस्था के कितने फायदे-कितने नुकसान होंगे, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन जिस तरह से यह व्यवस्था लागू की गई है, उससे कई सवाल उठ रहे हैं।
नगर निगम जब भी इस तरह की व्यवस्था करता है तो उसके लिए बाकायदा टेंडर मांगे जाते हैं। टेंडर की प्रक्रिया के दौरान कम से कम तीन फर्मों के पूर्व अनुभवों और उनकी क्षमता को देखते हुए ही टेंडर फाइनल किए जाते हैं। हालांकि अपर नगर आयुक्त अरुण कुमार गुप्ता के अनुसार सब कुछ नियमानुसार किया गया है, लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर यह सब हुआ कब?
क्योंकि 23 जनवरी से तीन सदस्यीय कमेटी ने पदभार संभाला। उसके चंद रोज बाद ही शिक्षक स्नातक चुनाव को लेकर आचार संहिता प्रभावी हो गई। जो चार फरवरी तक कायम रही। ऐसे में इस दौरान कोई टेंडर नहीं हो सकते थे।
पहले से काम कर रही कंपनी क्यों हुई दरकिनार
शहर में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के लिए ओम इंटरप्राइजेज नाम की एक कंपनी पहले से काम कर रही है। इस कंपनी को शहर में काम करने का कई साल का अनुभव भी है। ऐसे में इस कंपनी को ही यह काम क्यों नहीं मिल पाया? यह सवाल भी सियासी गलियारों में गूंज रहा है।
विरोध की भी सुगबुगाहट
शहर के विस्तारित क्षेत्रों में नगर निगम अभी तक कोई व्यवस्था नहीं दे पाया है। ऐसे में वहां शुरूआत में ही कचरा उठाने का सरचार्ज लगाने का विरोध भी हो सकता है। पार्षद चुनाव की तैयारी में जुटे नेताओं में भी भीतरखाने इस बात को लेकर नाराजगी है।
तीन सदस्यीय कमेटी नीतिगत निर्णय नहीं ले सकती, लेकिन निर्माण के व अन्य कार्य हो सकते हैं। हालांकि किसी नए अनुबंध संबंधी फाइल मेरे पास नहीं आई है। इस बारे में नगर आयुक्त बेहतर जानकारी दे सकेंगे।
-नितीश कुमार, जिलाधिकारी
जब तक नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल था, उस दौरान विस्तारित क्षेत्र के लिए इस तरह सफाई का ठेका दिए जाने का कोई निर्णय बोर्ड ने नहीं लिया। न ही इस बारे में मेरी जानकारी में कभी कुछ आया है।
-ऋषिकेश उपाध्याय, पूर्व महापौर
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इसका टेंडर कब हुआ और अनुबंध कब हुआ। इसकी कानोंकान भनक पूर्व महापौर से लेकर बोर्ड के पुराने सदस्यों तक को नहीं लगी है। इस नए निर्णय को लेकर पूर्व पार्षदों में भारी सुगबुगाहट है और इसका विरोध भी हो सकता है।
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अपर नगर आयुक्त अरुण कुमार गुप्ता के अनुसार शहर के विस्तारित क्षेत्र यानी नए शामिल किए गए 21 गांवों के क्षेत्र में अब पृथ्वी एग्रो नाम की कंपनी डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन का काम करेगी। यह कंपनी सरचार्ज के रूप में नागरिकों से 50 रुपये प्रतिमाह भी वसूल करेगी।
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जबकि अभी पूरे शहर में यह व्यवस्था लागू नहीं है। इस नई व्यवस्था के कितने फायदे-कितने नुकसान होंगे, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन जिस तरह से यह व्यवस्था लागू की गई है, उससे कई सवाल उठ रहे हैं।
नगर निगम जब भी इस तरह की व्यवस्था करता है तो उसके लिए बाकायदा टेंडर मांगे जाते हैं। टेंडर की प्रक्रिया के दौरान कम से कम तीन फर्मों के पूर्व अनुभवों और उनकी क्षमता को देखते हुए ही टेंडर फाइनल किए जाते हैं। हालांकि अपर नगर आयुक्त अरुण कुमार गुप्ता के अनुसार सब कुछ नियमानुसार किया गया है, लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर यह सब हुआ कब?
क्योंकि 23 जनवरी से तीन सदस्यीय कमेटी ने पदभार संभाला। उसके चंद रोज बाद ही शिक्षक स्नातक चुनाव को लेकर आचार संहिता प्रभावी हो गई। जो चार फरवरी तक कायम रही। ऐसे में इस दौरान कोई टेंडर नहीं हो सकते थे।
पहले से काम कर रही कंपनी क्यों हुई दरकिनार
शहर में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के लिए ओम इंटरप्राइजेज नाम की एक कंपनी पहले से काम कर रही है। इस कंपनी को शहर में काम करने का कई साल का अनुभव भी है। ऐसे में इस कंपनी को ही यह काम क्यों नहीं मिल पाया? यह सवाल भी सियासी गलियारों में गूंज रहा है।
विरोध की भी सुगबुगाहट
शहर के विस्तारित क्षेत्रों में नगर निगम अभी तक कोई व्यवस्था नहीं दे पाया है। ऐसे में वहां शुरूआत में ही कचरा उठाने का सरचार्ज लगाने का विरोध भी हो सकता है। पार्षद चुनाव की तैयारी में जुटे नेताओं में भी भीतरखाने इस बात को लेकर नाराजगी है।
तीन सदस्यीय कमेटी नीतिगत निर्णय नहीं ले सकती, लेकिन निर्माण के व अन्य कार्य हो सकते हैं। हालांकि किसी नए अनुबंध संबंधी फाइल मेरे पास नहीं आई है। इस बारे में नगर आयुक्त बेहतर जानकारी दे सकेंगे।
-नितीश कुमार, जिलाधिकारी
जब तक नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल था, उस दौरान विस्तारित क्षेत्र के लिए इस तरह सफाई का ठेका दिए जाने का कोई निर्णय बोर्ड ने नहीं लिया। न ही इस बारे में मेरी जानकारी में कभी कुछ आया है।
-ऋषिकेश उपाध्याय, पूर्व महापौर