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Ayodhya News: रागी की खेती कर किसानों के लिए बने मिसाल

Tue, 26 Sep 2023 12:18 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या Updated Tue, 26 Sep 2023 12:18 AM IST
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milets agriculture crop
रागी की फसल देखते कृ​षि अ​धिकारी।
मनोज पांडेय
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तारुन, अयोध्या। प्राकृतिक खेती के साथ मोटा अनाज रागी की खेती कर किसानों के लिए बाहरपुर निवासी प्रगतिशील किसान सुरेंद्र प्रताप सिंह मिसाल बन गए हैं। सरकार की ओर से श्रीअन्न को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मिलेट्स की फसलों का प्रचार-प्रसार किया गया था। उन्होंने श्रीअन्न रागी को एक एकड़ फसल में लगाया है।
इसकी फसल का बीज उन्हें कृषि विभाग से निशुल्क मिला था। उन्होंने गत 12 जून को इसकी नर्सरी डाली थी। फिर आठ जुलाई को रोपाई की गई। सुरेंद्र ने बताया कि फसल लगाने में ज्यादा खर्चा नहीं हुआ, कम लागत में फसल अच्छी हुई है। फसल पकने पर गांव के ही लोग (पशुपालक) इसका ऊपरी हिस्सा दाने वाला काटकर हमें दे देते हैं, शेष भाग को काटकर अपने पशुओं को खिला देते हैं। इस फसल को बेचने के लिए कोई दिक्कत भी नहीं होती। पहले से ही बहुत डिमांड है।
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किसान सुरेंद्र सिंह ने बताया कि पिछले पांच वर्षों से लगातार रागी व मड़ुआ की रोपाई कर रहे हैं। इसकी रोपाई करवाने पर तीन क्विंटल की उपज प्रति बीघा है, जबकि छिटुआ बुवाई करने के बाद ढाई क्विंटल की उपज मिलती है। इसमें किसी भी प्रकार की रासायनिक दवाओं का इस्तेमाल नहीं होता है। उप निदेशक कृषि डॉ. एस के त्रिपाठी ने बताया कि उत्तर प्रदेश मिलेट्स पुनरुद्धार कार्यक्रम के अंतर्गत श्रीअन्न को बढ़ावा देने के लिए किसानों में रागी, सांवा कोदो के बीज की मिनी किट निशुल्क उपलब्ध कराई गई थी। वर्तमान परिवेश में श्रीअन्न की खेती से हम अपने स्वास्थ्य के साथ आर्थिक रूप से भी मजबूत हो रहे हैं। संवाद
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पौष्टिक गुणों की खान है रागी

मंडूवा (रागी) में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, मिनरल्स और फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है। यह मधुमेह, उच्च रक्तचाप, एनीमिया, कैंसर, हड्डी रोगों में विशेष लाभकारी है। इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है। वजन कम करने में सहायक है, कुपोषण से लड़ने में कारगर है। शुष्क व कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी अच्छी उपज होती है, इसके मूल्य वर्धित उत्पाद की मांग बढ़ती जा रही है।
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