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35 लाख से मेडिकल कॉलेज में लगेगा आरएनए स्ट्रक्टर
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अयोध्या। राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज में स्थापित वीएसएल-2 लैब की कोविड जांच क्षमता को बढ़ाया जाएगा। इसके बाद लैब में हर दिन चार हजार लोगों की कोरोना जांच हो सकेगी। वर्तमान में जांच का स्तर डेढ़ हजार तक सिमटा है।
इसके लिए लैब में जल्दी ही 35 लाख की लागत से आरएनए स्ट्रक्टर स्थापित किया जाएगा। इसकी खरीद को क्रय आदेश जारी कर दिया गया है। अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक नयी मशीन के क्रियाशील होने की उम्मीद जताई जा रही है।
इस मशीन का संचालन शुरू हो जाने का सीधा लाभ अयोध्या सहित आसपास के जिलों के सैकड़ों लोगों को मिलेगा। राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज गंजा में संचालित वीएसएल-2 लैब में बीते वर्ष अगस्त माह से कोरोना वायरस का आरटी-पीसीआर टेस्ट सहित अन्य वायरस जनित रोगों की जांच शुरू हुई थी।
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इस वायरस की जांच के लिए लोगों के गले से निकाले गए नमूनों में आरएनए (राइबो न्यूक्लिक एसिड) को अलग करके फिर जांच के लिए मशीन में डाला जाता है। आरएनए को अलग करने के लिए अब तक होने वाली प्रक्रिया मैन्युअल होती थी, जिसमें काफी समय लगता था।
कोरोना की संभावित दूसरी लहर से निपटने को जांच का दायरा और क्षमता बढ़ाने को लैब को अपग्रेड कर आरएनए स्ट्रक्टर मशीन लगवाने का कार्य किया जा रहा है।
इस मशीन की उपलब्धता से एक घंटे में 96 लोगों का आरएनए आसानी से अलग किया जा सके, वर्तमान में इस कार्य को करने में ढाई से तीन घंटा लगता था। जिसका लाभ अयोध्या सहित मंडल के अन्य जनपदों को मिलेगा।
राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ विजय कुमार ने बताया कि वीएसएल-2 लैब में 35 लाख की लागत से ऑटोमेटेड आरएनए स्ट्रक्टर स्थापित करने की तैयारी अंतिम दौर में है।
इससे नमूनों से आरएनए अलग करने में तेजी आने से कोविड जांच का दायरा दो गुना तक बढ़ेगा। इस मशीन के अप्रैल माह के पहले सप्ताह में क्रियाशील होने की उम्मीद है।
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इसके लिए लैब में जल्दी ही 35 लाख की लागत से आरएनए स्ट्रक्टर स्थापित किया जाएगा। इसकी खरीद को क्रय आदेश जारी कर दिया गया है। अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक नयी मशीन के क्रियाशील होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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इस मशीन का संचालन शुरू हो जाने का सीधा लाभ अयोध्या सहित आसपास के जिलों के सैकड़ों लोगों को मिलेगा। राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज गंजा में संचालित वीएसएल-2 लैब में बीते वर्ष अगस्त माह से कोरोना वायरस का आरटी-पीसीआर टेस्ट सहित अन्य वायरस जनित रोगों की जांच शुरू हुई थी।
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इस वायरस की जांच के लिए लोगों के गले से निकाले गए नमूनों में आरएनए (राइबो न्यूक्लिक एसिड) को अलग करके फिर जांच के लिए मशीन में डाला जाता है। आरएनए को अलग करने के लिए अब तक होने वाली प्रक्रिया मैन्युअल होती थी, जिसमें काफी समय लगता था।
कोरोना की संभावित दूसरी लहर से निपटने को जांच का दायरा और क्षमता बढ़ाने को लैब को अपग्रेड कर आरएनए स्ट्रक्टर मशीन लगवाने का कार्य किया जा रहा है।
इस मशीन की उपलब्धता से एक घंटे में 96 लोगों का आरएनए आसानी से अलग किया जा सके, वर्तमान में इस कार्य को करने में ढाई से तीन घंटा लगता था। जिसका लाभ अयोध्या सहित मंडल के अन्य जनपदों को मिलेगा।
राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ विजय कुमार ने बताया कि वीएसएल-2 लैब में 35 लाख की लागत से ऑटोमेटेड आरएनए स्ट्रक्टर स्थापित करने की तैयारी अंतिम दौर में है।
इससे नमूनों से आरएनए अलग करने में तेजी आने से कोविड जांच का दायरा दो गुना तक बढ़ेगा। इस मशीन के अप्रैल माह के पहले सप्ताह में क्रियाशील होने की उम्मीद है।