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भारत बंद रहा बेअसर, ट्रैक्टर जुलूस निकाल रहे 50 किसान हिरासत में लिए
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अयोध्या-अपनी मांगो को लेकर प्रदर्शन करते संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारी
- फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा द्वारा भारत बंद सोमवार को जिले में बेअसर साबित हुआ। शहर से लेकर देहात तक सभी इलाकों में लगभग सभी प्रतिष्ठान पूर्व की भांति खुले रहे।
वहीं, नारेबाजी करते हुए ट्रैक्टर जुलूस निकाल रहे 50 किसानों को शहर के रीडगंज पर पुलिस ने हिरासत में ले लिया। बाद में उन्हें पुलिस लाइंस से रिहा कर दिया गया। छिटपुट प्रदर्शन के साथ दिन भर विभिन्न इलाकों में गहमा-गहमी का माहौल देखा गया।
कृषि कानूनों की वापसी, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कृषि उपज को खरीदने की गारंटी का कानून बनाने, गन्ना मूल्य पांच सौ रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित करने, जिले में भूमि अधिग्रहण व ध्वस्त किए जा रहे दुकान/मकानों का उचित मुआवजा दिलाने, भाकियू जिला उपाध्यक्ष अरविंद यादव पर लगाए गए गुंडा एक्ट को समाप्त करने सहित अन्य मांगों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा व भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय नेतृत्व के आह्वान पर सोमवार को भारत बंद का एलान किया गया था।
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जिसके तहत कार्यकर्ताओं ने दुकानें बंद कराने का प्रयास किया, लेकिन वह फलीभूत नहीं हो सका। अधिकांश दुकानें व प्रतिष्ठान शहर से लेकर देहात तक खुले रहे और आमजन पर इसका खासा असर नहीं पड़ा।
हालांकि, कुछ इलाकों में प्रदर्शन करके कुछ समय के लिए कहीं-कहीं मार्ग जाम किया गया। जिसे पहले से मुस्तैद पुलिस बल ने खोलवा दिया। इससे कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ।
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय सचिव घनश्याम वर्मा के नेतृत्व में शंकरगढ़ बाजार में इकट्ठा होकर किसानों ने ट्रैक्टर, मोटरसाइकिल व चार पहिया वाहनों पर सवार होकर सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया।
जुलूस देवकाली बाईपास से चौक होते हुए सिविल लाइंस स्थित गांधी पार्क तक पहुंचाने की रणनीति थी। प्रदर्शनकारी रीडगंज चौराहे पर पहुंचे जिला व पुलिस प्रशासन ने भारी पुलिस बल के साथ रीडगंज चौराहे के पास बैरीकेटिंग करके प्रदर्शनकारियों को रोक लिया।
इस बीच प्रदर्शनकारियों व पुलिस के बीच नोंकझोंक और धक्का-मुक्की भी हुई। बाद में सख्ती बरतते हुए पुलिस ने किसान संघर्ष मोर्चा के जिला अध्यक्ष मायाराम वर्मा, कमला प्रसाद बागी, रालोद जिलाध्यक्ष चौधरी राम सिंह पटेल, अवध राम यादव, अखिलेश चतुर्वेदी, काशीराम यादव, अशोक यादव, घनश्याम वर्मा, सूर्यनाथ वर्मा, अरविंद यादव, भागीरथी वर्मा, शोभाराम यादव सहित 50 किसानों को हिरासत में ले लिया और उन्हें पुलिस लाइंस लाया गया।
जहां से शाम को सभी को छोड़ दिया गया। पुलिस लाइंस में वक्ताओं ने कहा कि केंद्र की सरकार किसान विरोधी व जन विरोधी है। सरकार तानाशाही करके किसानों की आवाज दबा रही है और उन्हें बोलने से रोका जा रहा है।
चौधरी राम सिंह पटेल ने कहा कि जिस तरीके से रविवार सुबह से ही पुलिस अधिकारी आंदोलन को कमजोर करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे थे, कार्यकर्ताओं को घर पर ही नजरबंद कर दिया गया है, यह निंदनीय है।
वहीं, अरकुना चौराहे पर भारतीय किसान यूनियन के नेताओं ने धरना-प्रदर्शन किया। पुलिस की सतर्कता से हाईवे जाम करने की रणनीति फेल हो गई। सीओ सदर आरके चतुर्वेदी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को रोक लिया।
मौके पर पहुंचीं एसडीएम सोहावल जयजीत कौर मिश्रा को जिलाध्यक्ष सूर्यनाथ वर्मा के नेतृत्व में राष्ट्रपति को संबोधित पांच सूत्री ज्ञापन सौंपा। मीडिया प्रभारी फरीद अहमद ने बताया कि ज्ञापन के जरिए किसानों की उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने, उसे खरीदने का कानून बनाने सहित अन्य मांग की गई।
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वहीं, नारेबाजी करते हुए ट्रैक्टर जुलूस निकाल रहे 50 किसानों को शहर के रीडगंज पर पुलिस ने हिरासत में ले लिया। बाद में उन्हें पुलिस लाइंस से रिहा कर दिया गया। छिटपुट प्रदर्शन के साथ दिन भर विभिन्न इलाकों में गहमा-गहमी का माहौल देखा गया।
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कृषि कानूनों की वापसी, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कृषि उपज को खरीदने की गारंटी का कानून बनाने, गन्ना मूल्य पांच सौ रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित करने, जिले में भूमि अधिग्रहण व ध्वस्त किए जा रहे दुकान/मकानों का उचित मुआवजा दिलाने, भाकियू जिला उपाध्यक्ष अरविंद यादव पर लगाए गए गुंडा एक्ट को समाप्त करने सहित अन्य मांगों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा व भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय नेतृत्व के आह्वान पर सोमवार को भारत बंद का एलान किया गया था।
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जिसके तहत कार्यकर्ताओं ने दुकानें बंद कराने का प्रयास किया, लेकिन वह फलीभूत नहीं हो सका। अधिकांश दुकानें व प्रतिष्ठान शहर से लेकर देहात तक खुले रहे और आमजन पर इसका खासा असर नहीं पड़ा।
हालांकि, कुछ इलाकों में प्रदर्शन करके कुछ समय के लिए कहीं-कहीं मार्ग जाम किया गया। जिसे पहले से मुस्तैद पुलिस बल ने खोलवा दिया। इससे कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ।
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय सचिव घनश्याम वर्मा के नेतृत्व में शंकरगढ़ बाजार में इकट्ठा होकर किसानों ने ट्रैक्टर, मोटरसाइकिल व चार पहिया वाहनों पर सवार होकर सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया।
जुलूस देवकाली बाईपास से चौक होते हुए सिविल लाइंस स्थित गांधी पार्क तक पहुंचाने की रणनीति थी। प्रदर्शनकारी रीडगंज चौराहे पर पहुंचे जिला व पुलिस प्रशासन ने भारी पुलिस बल के साथ रीडगंज चौराहे के पास बैरीकेटिंग करके प्रदर्शनकारियों को रोक लिया।
इस बीच प्रदर्शनकारियों व पुलिस के बीच नोंकझोंक और धक्का-मुक्की भी हुई। बाद में सख्ती बरतते हुए पुलिस ने किसान संघर्ष मोर्चा के जिला अध्यक्ष मायाराम वर्मा, कमला प्रसाद बागी, रालोद जिलाध्यक्ष चौधरी राम सिंह पटेल, अवध राम यादव, अखिलेश चतुर्वेदी, काशीराम यादव, अशोक यादव, घनश्याम वर्मा, सूर्यनाथ वर्मा, अरविंद यादव, भागीरथी वर्मा, शोभाराम यादव सहित 50 किसानों को हिरासत में ले लिया और उन्हें पुलिस लाइंस लाया गया।
जहां से शाम को सभी को छोड़ दिया गया। पुलिस लाइंस में वक्ताओं ने कहा कि केंद्र की सरकार किसान विरोधी व जन विरोधी है। सरकार तानाशाही करके किसानों की आवाज दबा रही है और उन्हें बोलने से रोका जा रहा है।
चौधरी राम सिंह पटेल ने कहा कि जिस तरीके से रविवार सुबह से ही पुलिस अधिकारी आंदोलन को कमजोर करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे थे, कार्यकर्ताओं को घर पर ही नजरबंद कर दिया गया है, यह निंदनीय है।
वहीं, अरकुना चौराहे पर भारतीय किसान यूनियन के नेताओं ने धरना-प्रदर्शन किया। पुलिस की सतर्कता से हाईवे जाम करने की रणनीति फेल हो गई। सीओ सदर आरके चतुर्वेदी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को रोक लिया।
मौके पर पहुंचीं एसडीएम सोहावल जयजीत कौर मिश्रा को जिलाध्यक्ष सूर्यनाथ वर्मा के नेतृत्व में राष्ट्रपति को संबोधित पांच सूत्री ज्ञापन सौंपा। मीडिया प्रभारी फरीद अहमद ने बताया कि ज्ञापन के जरिए किसानों की उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने, उसे खरीदने का कानून बनाने सहित अन्य मांग की गई।

अयोध्या-अपनी मांगो को लेकर ट्रैक्टर जुलूस निकाल कर प्रदर्शन कर रहे भाकियू कार्यकर्ताओं को रोकत?- फोटो : FAIZABAD