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गुमनामी बाबा जांच आयोग ने दर्ज किये दो के बयान
फैजाबाद
Updated Sat, 15 Oct 2016 10:35 PM IST
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फैजाबाद में शनिवार को जिला सैनिक भवन में गुमनामी बाबा जांच आयोग की टीम के अध्यक्ष जस्टिस विष्णु सहाय के समक्ष बयान देतीं रीता बनर्जी।
- फोटो : अमर उजाला
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गुमनामी बाबा उर्फ भगवान जी उर्फ नेताजी सुभाषचंद्र बोस का रहस्य उजागर करने के लिए जस्टिस विष्णु सहाय आयोग ने शनिवार को कैंप कार्यालय में गवाहों के बयान दर्ज करना शुरू कर दिया है। आयोग के समक्ष गुमनामी बाबा से जुड़े रहने का दावा करने वाले दो लोगों ने लिखित व मौखिक बयान दर्ज कराए। अब आयोग 25 अक्तूबर को अन्य गवाहों के बयान दर्ज करेगा।
गौरतलब है कि गुमनामी बाबा उर्फ भगवान जी अयोध्या व फैजाबाद के विभिन्न स्थानों पर कुछ वर्षों तक साधुवेश में रहे थे। उनका अंतिम समय सिविल लाइंस स्थित राम भवन में बीता। 18 सितंबर 1985 को निधन के बाद कैंट स्थित सरयू नदी तट के पास उनका अंतिम संस्कार किया गया था।
स्थानीय लोग गुमनामी बाबा के बक्सों में रखे सामान से उनकी पहचान नेताजी सुभाषचंद्र बोस के रूप में करने लगे। उसके बाद सक्रिय हुए शासन-प्रशासन ने गुमनामी बाबा के सामान को जिला कोषागार में सुरक्षित रखवा दिया।
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सुभाषचंद्र बोस राष्ट्रीय विचार केंद्र इस मामले को कोर्ट तक ले गया। कोर्ट ने मामले की जांच का आदेश देते हुए उनके सामान को अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय में संरक्षित करने का आदेश दिया। कोर्ट के आदेश पर जस्टिस विष्णु सहाय की अध्यक्षता में जांच आयोग गठित किया गया।
शनिवार को आयोग के अध्यक्ष और हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश विष्णु सहाय के समक्ष डॉ. डीएस तोमर व रीता बनर्जी ने मौखिक एवं लिखित रूप से अपने बयान दर्ज कराए हैं। इस दौरान आयोग के सचिव दिलीप कुमार श्रीवास्तव मौजूद रहे। सुभाषचंद्र बोस राष्ट्रीय विचार केंद्र के अध्यक्ष शक्ति सिंह ने बताया कि आयोग अब 25 अक्तूबर को अन्य गवाहों के बयान दर्ज करेगा।
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गौरतलब है कि गुमनामी बाबा उर्फ भगवान जी अयोध्या व फैजाबाद के विभिन्न स्थानों पर कुछ वर्षों तक साधुवेश में रहे थे। उनका अंतिम समय सिविल लाइंस स्थित राम भवन में बीता। 18 सितंबर 1985 को निधन के बाद कैंट स्थित सरयू नदी तट के पास उनका अंतिम संस्कार किया गया था।
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स्थानीय लोग गुमनामी बाबा के बक्सों में रखे सामान से उनकी पहचान नेताजी सुभाषचंद्र बोस के रूप में करने लगे। उसके बाद सक्रिय हुए शासन-प्रशासन ने गुमनामी बाबा के सामान को जिला कोषागार में सुरक्षित रखवा दिया।
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सुभाषचंद्र बोस राष्ट्रीय विचार केंद्र इस मामले को कोर्ट तक ले गया। कोर्ट ने मामले की जांच का आदेश देते हुए उनके सामान को अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय में संरक्षित करने का आदेश दिया। कोर्ट के आदेश पर जस्टिस विष्णु सहाय की अध्यक्षता में जांच आयोग गठित किया गया।
शनिवार को आयोग के अध्यक्ष और हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश विष्णु सहाय के समक्ष डॉ. डीएस तोमर व रीता बनर्जी ने मौखिक एवं लिखित रूप से अपने बयान दर्ज कराए हैं। इस दौरान आयोग के सचिव दिलीप कुमार श्रीवास्तव मौजूद रहे। सुभाषचंद्र बोस राष्ट्रीय विचार केंद्र के अध्यक्ष शक्ति सिंह ने बताया कि आयोग अब 25 अक्तूबर को अन्य गवाहों के बयान दर्ज करेगा।