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पूर्णिमा स्नान कल, धर्मनगरी में उमड़े श्रद्धालु
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 27 Aug 2015 11:12 PM IST
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मठ-मंदिरों में देर शाम से रात तक चलने वाले धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आकर्षण श्रद्धालुओं के सिर चढ़कर बोलने लगा है। मुख्य पर्व के नजदीक आने के साथ रामनगरी जश्न में डूब गई है।
श्रावणी तीज के साथ शुरू हुआ सावन झूला मेला पूर्णिमा पर्व के करीब आने के साथ ही परवान चढ़ने लगा है। मेले का मुख्य पर्व श्रावण पूर्णिमा 29 अगस्त शनिवार को है।
मेले के अंतिम पर्व पर दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती जा रही है। धर्मनगरी में शाम होते ही मंदिरों में तबले की थाप व हारमोनियम की धुनों के बीच आयोजित कार्यक्रम श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र हैं।
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रसिक उपासना के मुख्य पर्व झूलनोत्सव पर मठ-मंदिरों में भगवान को हृदयरूपी पालने में बैठाकर अपने ईष्ट को संत-धर्माचार्य से श्रद्धालु भक्त झूला झुला रहे हैं।
जगमोहन में सजने वाली सांस्कृतिक संध्या की सज रही महफिलों में गीत, संगीत व नृत्य की त्रिवेणी से आराध्य की भक्ति रस में डूब रहे हैं।
रामहर्षण कुंज, श्रीराम बल्लभाकुंज, हनुमानगढ़ी, कनक भवन, सद्गुरु सदन, विअहुति भवन, लक्ष्मण किला, लवकुश मंदिर, बड़ा स्थान, श्रीकालेराम, पत्थर मंदिर, हनुमानबाग, श्रीराज मंदिर, अशर्फी भवन, राजगोपाल मंदिर, कौशलेश सदन, अशर्फी भवन, सियाराम किला, हनुमत निवास, हनुमत सदन, सदगुरु बधाई भवन, रामसखी मंदिर, बावन मंदिर, दिव्यकला कुंज, रुपकला कुंज, रामहर्षण कुंज, जानकी महल ट्रस्ट, बिड़ला मंदिर आदि मठ-मंदिरों में आयोजित झूलनोत्सव कार्यक्रमों के साथ ही श्रद्धालु भगवान के झूला दरबार के दर्शन-पूजन का आनंद उठा रहे हैं।
मेले में अब अव्यवस्थाएं श्रद्धालुओं पर भारी पड़ रही हैं। भीड़ बढ़ने के साथ ही पुलिस व प्रशासनिक स्तर पर की गई व्यवस्थाएं मुश्किल खड़ी कर रही हैं।
पुलिस के यातायात प्रतिबंधों से लोगों में खासी नाराजगी देखी जा रही है। सवारी व यात्री वाहनों को अयोध्या से बाहर ही रोके जाने के कारण श्रद्धालुओं को कड़ी धूप में कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है। इन प्रतिबंधों से श्रद्धालु भक्तों के साथ ही स्थानीय लोगों को भी परेशान होना पड़ रहा है।
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श्रावणी तीज के साथ शुरू हुआ सावन झूला मेला पूर्णिमा पर्व के करीब आने के साथ ही परवान चढ़ने लगा है। मेले का मुख्य पर्व श्रावण पूर्णिमा 29 अगस्त शनिवार को है।
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मेले के अंतिम पर्व पर दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती जा रही है। धर्मनगरी में शाम होते ही मंदिरों में तबले की थाप व हारमोनियम की धुनों के बीच आयोजित कार्यक्रम श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र हैं।
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रसिक उपासना के मुख्य पर्व झूलनोत्सव पर मठ-मंदिरों में भगवान को हृदयरूपी पालने में बैठाकर अपने ईष्ट को संत-धर्माचार्य से श्रद्धालु भक्त झूला झुला रहे हैं।
जगमोहन में सजने वाली सांस्कृतिक संध्या की सज रही महफिलों में गीत, संगीत व नृत्य की त्रिवेणी से आराध्य की भक्ति रस में डूब रहे हैं।
रामहर्षण कुंज, श्रीराम बल्लभाकुंज, हनुमानगढ़ी, कनक भवन, सद्गुरु सदन, विअहुति भवन, लक्ष्मण किला, लवकुश मंदिर, बड़ा स्थान, श्रीकालेराम, पत्थर मंदिर, हनुमानबाग, श्रीराज मंदिर, अशर्फी भवन, राजगोपाल मंदिर, कौशलेश सदन, अशर्फी भवन, सियाराम किला, हनुमत निवास, हनुमत सदन, सदगुरु बधाई भवन, रामसखी मंदिर, बावन मंदिर, दिव्यकला कुंज, रुपकला कुंज, रामहर्षण कुंज, जानकी महल ट्रस्ट, बिड़ला मंदिर आदि मठ-मंदिरों में आयोजित झूलनोत्सव कार्यक्रमों के साथ ही श्रद्धालु भगवान के झूला दरबार के दर्शन-पूजन का आनंद उठा रहे हैं।
मेले में अब अव्यवस्थाएं श्रद्धालुओं पर भारी पड़ रही हैं। भीड़ बढ़ने के साथ ही पुलिस व प्रशासनिक स्तर पर की गई व्यवस्थाएं मुश्किल खड़ी कर रही हैं।
पुलिस के यातायात प्रतिबंधों से लोगों में खासी नाराजगी देखी जा रही है। सवारी व यात्री वाहनों को अयोध्या से बाहर ही रोके जाने के कारण श्रद्धालुओं को कड़ी धूप में कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है। इन प्रतिबंधों से श्रद्धालु भक्तों के साथ ही स्थानीय लोगों को भी परेशान होना पड़ रहा है।