फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   Four teeth were safe for DNA test

डीएनए जांच के लिए सुरक्षित चार दांत मिले

Fri, 18 Mar 2016 11:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद Updated Fri, 18 Mar 2016 11:40 PM IST
विज्ञापन
Four teeth were safe for DNA test
गुमनामी बाबा के बक्सों से निकली मेडिकल सामग्री - फोटो : अमर उजाला
गुमनामी बाबा के सामान की फेहरिस्त तैयार करने के आखिरी दिन नेताजी सुभाषचंद्र बोस की मौत की जांच करने वाले मनोज मुखर्जी आयोग की ओर से सील किए गए कई अहम दस्तावेज और सामग्री मिली है। दांत के वे चार टुकड़े भी मिले, जिसकी आयोग ने डीएनए जांच की बात की थी।
विज्ञापन


नेताजी की मृत्यु के रहस्यों की जांच के लिए बने खोसला आयोग के उस सम्मन की मूल प्रति गुमनामी बाबा के बक्से में निकली  जिसे नेताजी के भाई सुरेशचंद्र बोस को भेजा गया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के पालन में अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय में गुमनामी बाबा के 27 बक्सों में 2760 सामानों की सूची शुक्रवार को बना ली गई।
विज्ञापन


आखिरी दिन करीब 50 सामानों में गुमनामी बाबा का रहस्य समेटे कई नितांत गोपनीय वस्तुएं मिली हैं। इन सामानों की मुखर्जी आयोग ने गुमनामी बाबा उर्फ भगवन जी उर्फ स्वामी जी के नेताजी होने की पुष्टि के लिए डीएनए व फोरेंसिक जांच की सिफारिश की थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


एक डिब्बी में चार दांत के टुकड़े मिले हैं। मुखर्जी आयोग की रिपोर्ट इस बाबत बता चुकी है कि दांतों की डीएनए जांच कराई गई थी, मगर लैब से पहचान की रिपोर्ट निगेटिव आई थी। वह ब्लड सैंपल टेस्ट ट्यूब भी मिला है, जिसे परिवार के किसी सदस्य का होना कहा जाता है, जिससे दांतों के डीएनए जांच का मिलान हुआ था।

साथ ही कोलकाता लैब की फोरेंसिक जांच की रसीद, मेगास्लिम आइमेंट, विदेशी माचिस की डिब्बी, थर्मस समेत कई पत्र भी मिले हैं। लेकिन किसी भी जांच की रिपोर्ट कहीं नहीं दिखी। सबसे ज्यादा चौंकाने वाला था 4 अगस्त 1972 को नेताजी के भाई सुरेशचंद्र बोस को खोसला आयोग से भेजे गए सम्मन की मूल कॉपी का मिलना।

सवाल उठता है कि गुमनामी बाबा के पास सम्मन की मूल प्रति कैसे पहुंची? इस सम्मन के जरिए आयोग ने सुरेशचंद्र को नेताजी के जीवित होने संबंधी सुबूत व तथ्य देने के लिए उपस्थित होने के लिए कहा था। अमेरिकी दूतावास से स्वामीजी सीतापुर के नाम कुछ पत्र भी मिले हैं।


एक पत्र 10 जनवरी 1959 का है, जिसे अमेरिकी दूतावास से स्वामी जी को भेजा गया है। सूची बनाने वाली टीम में शामिल शक्ति सिंह कहते हैं कि कुल 2760 सामानों की सूची बना ली गई है। अब आगे का कार्य टेक्निकल विभाग का है जो सामानों को रासायनिक विधि से संरक्षित करेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed