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पहली बार यूरेशियन कर्ल्यू ने अयोध्या में बनाया आशियाना
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अयोध्या। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी सर्दी शुरू होते ही सुदूर ठंडे देशों से अपने शीतकालीन प्रवास के लिए आए पक्षियों ने अयोध्या के चारों ओर अपना डेरा डाल दिया है। इस बार भी काफी संख्या में अंतर्राष्ट्रीय एवं अंतर्राज्यीय प्रवासी पक्षी आए हुए हैं। इस बार के प्रवासी पक्षियों में यूरेशियन कर्ल्यू (बड़ा गुलिंदा, कुकरी जलरंक) ने पहली बार अयोध्या को अपना आशियाना बनाया है। इसे सरयू नदी के पास के छिछले पानी की शांत जगहों पर शिकार करते देखा जा सकता है।
बर्ड मैन के नाम से विख्यात पक्षी विशेषज्ञ आजाद सिंह ने बताया कि आने वाले प्रमुख पक्षियों में ऑस्प्रे (मछलीमार गरुड़), सवन, सुरखाब, पेंटेड स्टार्क, महा जलकाक, मुसमार गरुड़, पिंगट गरुड़, तीरंदाज (स्नेक बर्ड), ग्रे-हेरोन (नारी बगुला), ब्लू थ्रोट व शिव हंस आदि प्रमुख हैं। ये पक्षी हमारे यहां रहकर यहां के कीट, पतंगों, चूहों, छिपकलियों, सांप के बच्चों व खरपतवार को खाकर यहां के पर्यावरण को सहेजने में अपना योगदान देंगे।
उन्होंने बताया कि इधर इजिप्शियन वल्चर (सफेद गिद्ध) अब पहले से ज्यादा दिखाई पड़ने लगे हैं। इनके द्वारा मृत पशुओं को खाकर हमारी सरयू की सफाई करने का कार्य सतत जारी है। इन्हें नदी और सर्युवेवेट लैंड व समदा झील के आसपास देखा जा सकता है।
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बताया कि पिछले दो वर्षों में जलवायु परिवर्तन के कारण पक्षियों को अब कई और छोटे-छोटे नए आश्रय स्थल मिले हैं। इससे इनकी संख्या एक स्थान पर तो कम दिखती है पर वास्तव में इन्होंने अब पहले से ज्यादा जगहों को चुना है। बताया कि हम सभी का यह कर्तव्य है की इन सुंदर पक्षियों को हर तरह से संरक्षण प्रदान करें जिससे इनकी संख्या में वृद्धि होती रहे।
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बर्ड मैन के नाम से विख्यात पक्षी विशेषज्ञ आजाद सिंह ने बताया कि आने वाले प्रमुख पक्षियों में ऑस्प्रे (मछलीमार गरुड़), सवन, सुरखाब, पेंटेड स्टार्क, महा जलकाक, मुसमार गरुड़, पिंगट गरुड़, तीरंदाज (स्नेक बर्ड), ग्रे-हेरोन (नारी बगुला), ब्लू थ्रोट व शिव हंस आदि प्रमुख हैं। ये पक्षी हमारे यहां रहकर यहां के कीट, पतंगों, चूहों, छिपकलियों, सांप के बच्चों व खरपतवार को खाकर यहां के पर्यावरण को सहेजने में अपना योगदान देंगे।
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उन्होंने बताया कि इधर इजिप्शियन वल्चर (सफेद गिद्ध) अब पहले से ज्यादा दिखाई पड़ने लगे हैं। इनके द्वारा मृत पशुओं को खाकर हमारी सरयू की सफाई करने का कार्य सतत जारी है। इन्हें नदी और सर्युवेवेट लैंड व समदा झील के आसपास देखा जा सकता है।
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बताया कि पिछले दो वर्षों में जलवायु परिवर्तन के कारण पक्षियों को अब कई और छोटे-छोटे नए आश्रय स्थल मिले हैं। इससे इनकी संख्या एक स्थान पर तो कम दिखती है पर वास्तव में इन्होंने अब पहले से ज्यादा जगहों को चुना है। बताया कि हम सभी का यह कर्तव्य है की इन सुंदर पक्षियों को हर तरह से संरक्षण प्रदान करें जिससे इनकी संख्या में वृद्धि होती रहे।