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अयोध्या के साथ जुड़ने पर गौरव की अनुभूति: योगी
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अयोध्या-महर्षि वेद विज्ञान विद्यापीठ के कार्यक्रम में महायज्ञ के पूर्णाहुति में शामिल मुख्यमं?
- फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। अयोध्या सूर्यवंश की राजधानी है, भगवान राम की जन्मभूमि है। भगवान श्रीराम ने सम-विषम परिस्थितियों में मर्यादा का पालन किया। संपूर्ण मानवता के आगे उन्होंने अपने मानवीय चरित्र से मर्यादा प्रस्तुत की। आज हर एक व्यक्ति अयोध्या की परंपरा से जुड़ना चाहता है।
विश्व मानवता भी आज अयोध्या के साथ जुड़ने पर गौरव की अनुभूति करता है। दुनिया आज अयोध्या के साथ जुड़ रही है, आत्मीय संवाद बना रही है। सप्तपुरियों में से एक पुरी के रूप में रामनगरी ऊंचाइयों को छूती हुई दिख रही है।
उक्त बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महर्षि आश्रम अयोध्या में श्रीविष्णु सर्व अद्भुत शांति महायज्ञ के समापन कार्यक्रम को संबोधित करते हुई कहीं। योगी ने कहा कि दीपोत्सव के जरिए विदेशों तक रामलीला संस्कृति का प्रसार हुआ।
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यहां तक कि मुस्लिम देश इंडोनेशिया में राम के प्रति श्रद्धा है। 2017 में जब इंडोनेशियों के कलाकारों ने अयोध्या में रामलीला की तो उन्हें मुख्यमंत्री आवास पर बुलाकर मैंने सम्मानित किया।
कलाकारों ने कहा कि हम सिर्फ कलाकार ही नहीं हैं बल्कि राम के साथ हमारा आत्मीय संबंध है। राम हमारे लिए सिर्फ नाट्य मंचन नहीं है, आस्था के प्रतीक हैं, पूर्वज हैं।
हमारे पूर्वजों ने भले ही उपासना बदल ली हो लेकिन इससे पूर्वज नहीं बदलते। विश्व मानवता भी आज अयोध्या के साथ जुड़कर गौरव की अनुभूति करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने रामो विग्रहवान धर्म:...के जरिए एक लाइन में सब कुछ कह दिया। राम धर्म हैं, राम और धर्म एक दूसरे के पूरक हैं। हम राम की मर्यादा या धर्म दोनों में किसी एक को अपना लें वही धर्म है, वही राम हैं।
इससे पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 12:39 बजे महर्षि आश्रम पहुंचे। सबसे पहले उन्होंने परिसर में बने यज्ञमंडप में पहुंचकर 101 पुरोहितों के द्वारा कराए जा रहे मंत्रोच्चार के बीच हवन एवं आरती कर यज्ञ की पूर्णाहुति की।
कार्यक्रम का संचालन महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ इंफॉर्मेशन एंड टेक्नोलॉजी के निदेशक दिनेश पाठक ने किया। महर्षि विद्यापीठ के मुख्य ट्रस्टी अजय प्रकाश श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री को ट्रस्ट की अवधारणाओं से अवगत कराते हुए महर्षि महेश योगी के योगदानों को रेखांकित किया।
बताया कि महर्षि रामायण विश्वविद्यालय के स्थापना के लिए सरकार से अनुमति मिल गई है, शीघ्र ही काम शुरू होगा। महर्षि महेश योगी पर आधारित तीन मिनट की लघु फिल्म का भी प्रस्तुुतीकरण किया गया।
मुख्य ट्रस्टी ने मुख्यमंत्री को अंगवस्त्र व गो माता का स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी, नगर विधायक वेदप्रकाश गुप्ता, महापौर ऋषिकेश उपाध्याय, विधायक रामचंद्र यादव, विधायक शोभा सिंह चौहान, जिलाध्यक्ष संजीव सिंह, महानगर अध्यक्ष अभिषेक मिश्र, समाजसेवी विकास श्रीवास्तव, श्रद्धानंद श्रीवास्तव सहित अन्य मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने महर्षि महेश योगी के योगदान को अद्भुत बताया। उन्होंने कहा कि 1998 में संवाद का अवसर प्राप्त हुआ था। 1950-60 के दशक में महर्षि ने भारत और भारतीयता को विश्व पटल पर प्रस्तुत करने का कार्य किया।
जब दुनिया ने हमारे बारे में गलत धारण बना ली थी। तब उन्होंने भारत के वेदों की परंपरा को हर एक व्यक्ति से जोड़ा। वेदों के बारे में दुष्प्रचार हुआ है।
उसके बावजूद दुनिया के मंचों पर बेधड़क वेदों की बातें, रामायण के प्रसंग, महाभारत के उद्धरणों को प्रस्तुत कर वेद, योग की परंपरा को मजबूती के साथ दुनिया के सामने रखा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या ने पांच सौ वर्षों तक संघर्ष झेला। गौरी से लेकर मसूद गाजी तक ने मंदिर को अपवित्र करने का काम किया। समय-समय पर हमले होते रहे। हमारी भावना को कुंद करने का प्रयास किया, लेकिन अयोध्या चुपचाप नहीं बैठी रही।
राम ने न अन्याय किया और न अन्याय सहा। अधर्म नहीं करेंगे, अधर्म नहीं सहेंगे यही अयोध्या ने किया। अत्याचार, अनाचार का जवाब देने के लिए अयोध्या हमेशा खड़ी रहेगी।
उन्होंने कहा कि 5 अगस्त 2020 को पीएम नरेंद्र मोदी ने राममंदिर निर्माण का शुभारंभ भी कर दिया है। अब संदेह नहीं है, जिनको स्वयं पर संदेह होगा, वहीं राममंदिर निर्माण में संदेह व्यक्त करेंगे।
मुख्यमंत्री ने महाभारत ग्रंथ का उदाहरण देते हुए कहा कि एक समय ऐसा चला जब हमारी संस्कृति पर आघात किया गया। साजिश चली कि महाभारत जैसे ग्रंथघर में नहीं रखे जाएं।
उसी महाभारत ग्रंथ का एक हिस्सा श्रीमद्भागवत गीता भी है, जिसे देश ने राष्ट्रीय ग्रंथ माना है न्याय की अदालत में उसकी कसम खाई जाती है। इन तथ्यों से अनभिज्ञ करने के लिए दुष्प्रचार चलाया गया।
कहा कि समय-समय पर धर्म का परिमार्जन जरूरी है। हर काल खंड में परिमार्जन होना चाहिए। समाज को कमजारे करने वाले पाखंडियों, विधर्मियों, रूढ़िवादी तत्वों को दूर करना होगा।
जोड़ने के बजाय जब-जब तोड़ने वाली कड़ियां मजबूत हुईं तब-तब हमले हुए, देश पराधीन हुआ। जब कड़ियां जुड़ी हैं देश ने एकजुटता का परिचय दिया है तब दुनिया की कोई ताकत भारत के सामने नहीं टिक पाई है।
सीएम योगी ने मोदी नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि आज देश के दो सौ देश योग की परंपरा से जुड़े हैं। यह तभी संभव हो पाया है जब देश में मजबूत नेेतृत्य है। योग को अमेरिका ने पेटेंट कराने का प्रयास किया था।
जब पुरजोर विरोध हुआ तो निरस्त हो गया। 21 जून को विश्व योग दिवस मनाया जाता है, दुनिया का कल्याण चाहते हो तो योग दिवस मनाओ। कहा कि चीन जैसा देश भी योगासन के साथ जुड़ता है।
कुंभ की चर्चा करते हुए कहा कि स्वच्छता, सुरक्षा व सुव्यवस्था का उच्च मानक प्रयागराज कुंभ ने प्रस्तुत किया है। 2019 में यूनेस्को ने इसे विश्व की अमूर्त धरोहर भी घोषित किया है।
उन्होंने पूर्व पीएम पर निशाना साधते हुए कहा कि एक्सीडेंटल मान लेगें तो एक्सीडेंट के शिकार हो जाएंगे। श्री विष्णु सर्व अद्भुत शांति महायज्ञ के कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि पहुंचे भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता व राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने मुख्यमंत्री योगी को धर्म व कर्म का प्रतिनिधि बताते हुए कहा कि राममंदिर निर्माण के साथ ही अयोध्या की उत्कर्ष यात्रा भी शुरू हो गई है।
कहा कि रामजन्मभूमि का विषय जब आता है तो यह कहना होगा कि राममंदिर कोई इमारत नहीं है, भारत के वैभव, स्वाभिमान का प्रतीक है। राम काज कीन्हो बिनु मोहि कहां विश्राम...के जरिए उन्होंने योगी को कर्मयोगी बताते हुए कहा कि कौन कर्म पथ पर तत्पर है सबको दिखता है।
योगी के रूप में विराट, प्रखर चेतना सामने आ रही है, कुछ निसाचर ऐसा नहीं चाहते। कालनेमि कौन है यह सबको पता है। कहा कि योगी जी ने कर्म का मार्ग प्रशस्त किया है।
इनके नेतृत्व में विज्ञान का भी मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने अटल जी की कविता हिंदू तन तन, हिंदू जीवन, रग-रग हिंदू मेरा परिचय..के जरिए अपनी बात समाप्त की।
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विश्व मानवता भी आज अयोध्या के साथ जुड़ने पर गौरव की अनुभूति करता है। दुनिया आज अयोध्या के साथ जुड़ रही है, आत्मीय संवाद बना रही है। सप्तपुरियों में से एक पुरी के रूप में रामनगरी ऊंचाइयों को छूती हुई दिख रही है।
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उक्त बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महर्षि आश्रम अयोध्या में श्रीविष्णु सर्व अद्भुत शांति महायज्ञ के समापन कार्यक्रम को संबोधित करते हुई कहीं। योगी ने कहा कि दीपोत्सव के जरिए विदेशों तक रामलीला संस्कृति का प्रसार हुआ।
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यहां तक कि मुस्लिम देश इंडोनेशिया में राम के प्रति श्रद्धा है। 2017 में जब इंडोनेशियों के कलाकारों ने अयोध्या में रामलीला की तो उन्हें मुख्यमंत्री आवास पर बुलाकर मैंने सम्मानित किया।
कलाकारों ने कहा कि हम सिर्फ कलाकार ही नहीं हैं बल्कि राम के साथ हमारा आत्मीय संबंध है। राम हमारे लिए सिर्फ नाट्य मंचन नहीं है, आस्था के प्रतीक हैं, पूर्वज हैं।
हमारे पूर्वजों ने भले ही उपासना बदल ली हो लेकिन इससे पूर्वज नहीं बदलते। विश्व मानवता भी आज अयोध्या के साथ जुड़कर गौरव की अनुभूति करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने रामो विग्रहवान धर्म:...के जरिए एक लाइन में सब कुछ कह दिया। राम धर्म हैं, राम और धर्म एक दूसरे के पूरक हैं। हम राम की मर्यादा या धर्म दोनों में किसी एक को अपना लें वही धर्म है, वही राम हैं।
इससे पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 12:39 बजे महर्षि आश्रम पहुंचे। सबसे पहले उन्होंने परिसर में बने यज्ञमंडप में पहुंचकर 101 पुरोहितों के द्वारा कराए जा रहे मंत्रोच्चार के बीच हवन एवं आरती कर यज्ञ की पूर्णाहुति की।
कार्यक्रम का संचालन महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ इंफॉर्मेशन एंड टेक्नोलॉजी के निदेशक दिनेश पाठक ने किया। महर्षि विद्यापीठ के मुख्य ट्रस्टी अजय प्रकाश श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री को ट्रस्ट की अवधारणाओं से अवगत कराते हुए महर्षि महेश योगी के योगदानों को रेखांकित किया।
बताया कि महर्षि रामायण विश्वविद्यालय के स्थापना के लिए सरकार से अनुमति मिल गई है, शीघ्र ही काम शुरू होगा। महर्षि महेश योगी पर आधारित तीन मिनट की लघु फिल्म का भी प्रस्तुुतीकरण किया गया।
मुख्य ट्रस्टी ने मुख्यमंत्री को अंगवस्त्र व गो माता का स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी, नगर विधायक वेदप्रकाश गुप्ता, महापौर ऋषिकेश उपाध्याय, विधायक रामचंद्र यादव, विधायक शोभा सिंह चौहान, जिलाध्यक्ष संजीव सिंह, महानगर अध्यक्ष अभिषेक मिश्र, समाजसेवी विकास श्रीवास्तव, श्रद्धानंद श्रीवास्तव सहित अन्य मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने महर्षि महेश योगी के योगदान को अद्भुत बताया। उन्होंने कहा कि 1998 में संवाद का अवसर प्राप्त हुआ था। 1950-60 के दशक में महर्षि ने भारत और भारतीयता को विश्व पटल पर प्रस्तुत करने का कार्य किया।
जब दुनिया ने हमारे बारे में गलत धारण बना ली थी। तब उन्होंने भारत के वेदों की परंपरा को हर एक व्यक्ति से जोड़ा। वेदों के बारे में दुष्प्रचार हुआ है।
उसके बावजूद दुनिया के मंचों पर बेधड़क वेदों की बातें, रामायण के प्रसंग, महाभारत के उद्धरणों को प्रस्तुत कर वेद, योग की परंपरा को मजबूती के साथ दुनिया के सामने रखा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या ने पांच सौ वर्षों तक संघर्ष झेला। गौरी से लेकर मसूद गाजी तक ने मंदिर को अपवित्र करने का काम किया। समय-समय पर हमले होते रहे। हमारी भावना को कुंद करने का प्रयास किया, लेकिन अयोध्या चुपचाप नहीं बैठी रही।
राम ने न अन्याय किया और न अन्याय सहा। अधर्म नहीं करेंगे, अधर्म नहीं सहेंगे यही अयोध्या ने किया। अत्याचार, अनाचार का जवाब देने के लिए अयोध्या हमेशा खड़ी रहेगी।
उन्होंने कहा कि 5 अगस्त 2020 को पीएम नरेंद्र मोदी ने राममंदिर निर्माण का शुभारंभ भी कर दिया है। अब संदेह नहीं है, जिनको स्वयं पर संदेह होगा, वहीं राममंदिर निर्माण में संदेह व्यक्त करेंगे।
मुख्यमंत्री ने महाभारत ग्रंथ का उदाहरण देते हुए कहा कि एक समय ऐसा चला जब हमारी संस्कृति पर आघात किया गया। साजिश चली कि महाभारत जैसे ग्रंथघर में नहीं रखे जाएं।
उसी महाभारत ग्रंथ का एक हिस्सा श्रीमद्भागवत गीता भी है, जिसे देश ने राष्ट्रीय ग्रंथ माना है न्याय की अदालत में उसकी कसम खाई जाती है। इन तथ्यों से अनभिज्ञ करने के लिए दुष्प्रचार चलाया गया।
कहा कि समय-समय पर धर्म का परिमार्जन जरूरी है। हर काल खंड में परिमार्जन होना चाहिए। समाज को कमजारे करने वाले पाखंडियों, विधर्मियों, रूढ़िवादी तत्वों को दूर करना होगा।
जोड़ने के बजाय जब-जब तोड़ने वाली कड़ियां मजबूत हुईं तब-तब हमले हुए, देश पराधीन हुआ। जब कड़ियां जुड़ी हैं देश ने एकजुटता का परिचय दिया है तब दुनिया की कोई ताकत भारत के सामने नहीं टिक पाई है।
सीएम योगी ने मोदी नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि आज देश के दो सौ देश योग की परंपरा से जुड़े हैं। यह तभी संभव हो पाया है जब देश में मजबूत नेेतृत्य है। योग को अमेरिका ने पेटेंट कराने का प्रयास किया था।
जब पुरजोर विरोध हुआ तो निरस्त हो गया। 21 जून को विश्व योग दिवस मनाया जाता है, दुनिया का कल्याण चाहते हो तो योग दिवस मनाओ। कहा कि चीन जैसा देश भी योगासन के साथ जुड़ता है।
कुंभ की चर्चा करते हुए कहा कि स्वच्छता, सुरक्षा व सुव्यवस्था का उच्च मानक प्रयागराज कुंभ ने प्रस्तुत किया है। 2019 में यूनेस्को ने इसे विश्व की अमूर्त धरोहर भी घोषित किया है।
उन्होंने पूर्व पीएम पर निशाना साधते हुए कहा कि एक्सीडेंटल मान लेगें तो एक्सीडेंट के शिकार हो जाएंगे। श्री विष्णु सर्व अद्भुत शांति महायज्ञ के कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि पहुंचे भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता व राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने मुख्यमंत्री योगी को धर्म व कर्म का प्रतिनिधि बताते हुए कहा कि राममंदिर निर्माण के साथ ही अयोध्या की उत्कर्ष यात्रा भी शुरू हो गई है।
कहा कि रामजन्मभूमि का विषय जब आता है तो यह कहना होगा कि राममंदिर कोई इमारत नहीं है, भारत के वैभव, स्वाभिमान का प्रतीक है। राम काज कीन्हो बिनु मोहि कहां विश्राम...के जरिए उन्होंने योगी को कर्मयोगी बताते हुए कहा कि कौन कर्म पथ पर तत्पर है सबको दिखता है।
योगी के रूप में विराट, प्रखर चेतना सामने आ रही है, कुछ निसाचर ऐसा नहीं चाहते। कालनेमि कौन है यह सबको पता है। कहा कि योगी जी ने कर्म का मार्ग प्रशस्त किया है।
इनके नेतृत्व में विज्ञान का भी मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने अटल जी की कविता हिंदू तन तन, हिंदू जीवन, रग-रग हिंदू मेरा परिचय..के जरिए अपनी बात समाप्त की।

अयोध्या-महर्षि वेद विज्ञान विद्यापीठ में महायज्ञ के पूर्णाहुति में आयोजित कार्यक्रम को संबोधि?- फोटो : FAIZABAD

37-अयोध्या-महर्षि वेद विज्ञान विद्यापीठ में महायज्ञ के पूर्णाहुति में आयोजित कार्यक्रम को संबोध?- फोटो : FAIZABAD