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रामानंद संप्रदाय के मुकुटमणि थे ज.गु.हयाचार्य: देवेंद्रप्रसादाचार्य
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अयोध्या। ज.गु.हयाचार्य की 13वीं पुण्यतिथि के अवसर पर श्रीहरिधामगोपाल पीठ में श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया। ज.गु.रामदिनेशाचार्य के संयोजन में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में संत-धर्माचार्यों ने हर्याचार्य जी महाराज को नमन करते हुए उन्हें साधुता की प्रतिमूर्ति बताया।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में दशरथ महल बड़ास्थान के महंत बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य ने कहा कि हर्याचार्य जी महाराज रामानंद संप्रदाय के मुकुटमणि थे। वे संत परंपरा के संवाहक रहे, संत समाज सदैव उनसे प्रेरणा लेता रहेगा। नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास ने कहा कि हर्याचार्य जी महाराज सनातन संस्कृति के संपोषक थे।
उनके सामीप्य का जो अनुभव रहा है वह शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने कहा कि हर्याचार्य जी उच्चकोटि के संत थे, उनकी साधुता, विनम्रता व विद्वतता एक क्षण में ही सबको आकर्षित कर लेती थी। उनके सानिध्य का अवसर मिला हम सौभाग्यशाली हैं। ज.गु.रामदिनेशाचार्य ने गुरू को स्मरण करते हुए कहा कि साधुसेवा, समाज सेवा और अभ्यागत सेवा उनकी स्वस्थ साधना का सुखद पक्ष रहा है। उन्होंने नि:स्वार्थ सेवा के परमादर्शों को बखूबी निभाते हुए जीवन जीया। उनके द्वारा स्थापित परंपराओं, नियमों का सम्यक निवर्हन ही हमारी प्रतिबद्घता है।
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श्रद्घांजलि कार्यक्रम में मणिरामदास की छावनी के महंत कमलनयन दास, ज.गु. डॉ.राघवाचार्य, श्रीराम बल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास,महंत डॉ.रामानंद दास, महंत बृजमोहन दास, महंत वैदेही वल्लभशरण,आचार्य रत्नेश, संत रामभूषण दास कृपालु महाराज, महंत रामकुमार दास, महंत बलरामदास, महंत रामदास करतलिया आश्रम, पार्षद रमेश दास, पूर्व मंत्री तेजनारायण पांडेय, एसपीसिटी विजयपाल सिंह, सीओ अयोध्या अमर सिंह, पार्षद अनुज दास, संत गौरव दास, संत अभिषेक दास, संत एमबीदास, जानकी महल ट्रस्ट के प्रबंधक आदित्य सुल्तानिया सहित अन्य शिष्यों, भक्तों ने श्रद्घांजलि अर्पित की।
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श्रद्धांजलि कार्यक्रम में दशरथ महल बड़ास्थान के महंत बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य ने कहा कि हर्याचार्य जी महाराज रामानंद संप्रदाय के मुकुटमणि थे। वे संत परंपरा के संवाहक रहे, संत समाज सदैव उनसे प्रेरणा लेता रहेगा। नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास ने कहा कि हर्याचार्य जी महाराज सनातन संस्कृति के संपोषक थे।
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उनके सामीप्य का जो अनुभव रहा है वह शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने कहा कि हर्याचार्य जी उच्चकोटि के संत थे, उनकी साधुता, विनम्रता व विद्वतता एक क्षण में ही सबको आकर्षित कर लेती थी। उनके सानिध्य का अवसर मिला हम सौभाग्यशाली हैं। ज.गु.रामदिनेशाचार्य ने गुरू को स्मरण करते हुए कहा कि साधुसेवा, समाज सेवा और अभ्यागत सेवा उनकी स्वस्थ साधना का सुखद पक्ष रहा है। उन्होंने नि:स्वार्थ सेवा के परमादर्शों को बखूबी निभाते हुए जीवन जीया। उनके द्वारा स्थापित परंपराओं, नियमों का सम्यक निवर्हन ही हमारी प्रतिबद्घता है।
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श्रद्घांजलि कार्यक्रम में मणिरामदास की छावनी के महंत कमलनयन दास, ज.गु. डॉ.राघवाचार्य, श्रीराम बल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास,महंत डॉ.रामानंद दास, महंत बृजमोहन दास, महंत वैदेही वल्लभशरण,आचार्य रत्नेश, संत रामभूषण दास कृपालु महाराज, महंत रामकुमार दास, महंत बलरामदास, महंत रामदास करतलिया आश्रम, पार्षद रमेश दास, पूर्व मंत्री तेजनारायण पांडेय, एसपीसिटी विजयपाल सिंह, सीओ अयोध्या अमर सिंह, पार्षद अनुज दास, संत गौरव दास, संत अभिषेक दास, संत एमबीदास, जानकी महल ट्रस्ट के प्रबंधक आदित्य सुल्तानिया सहित अन्य शिष्यों, भक्तों ने श्रद्घांजलि अर्पित की।