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ढहाया जाने लगा दर्शननगर गेट
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
Updated Thu, 23 Jun 2016 12:03 AM IST
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दर्शननगर गेट ढहाती जेसीबी।
- फोटो : अमर उजाला
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फैजाबाद-आजमगढ़ मार्ग पर शहर मुख्यालय से आठ किमी. दूर दर्शननगर बाजार में ऐतिहासिक महत्व वाले गेट का अस्तित्व मिटना शुरू हो गया है। इसे जेसीबी से ढहाया जा रहा है। प्रस्तावित फोरलेन निर्माण की राह में दर्शननगर का गेट बाधक होने के साथ ही वर्षों से यहां जाम की समस्या भी रहती थी।
अयोध्या के राजा दर्शन सिंह ने तकरीबन पांच सौ साल पहले दर्शननगर को बसाया था। इस जगह को सुरक्षित रखने के लिए दीवार और गेट भी बनवाया था। अब दर्शननगर कस्बे के मध्य से ही फोरलेन रोड प्रस्तावित है जो कि आजमगढ़ की ओर जाएगी।
यहीं पर तकरीबन एक किमी. लंबा उपरिगामी पुल भी प्रस्तावित है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आठ माह पहले एसडीएम सदर दीपा अग्रवाल ने पुरातत्व विभाग से दर्शननगर गेट के बाबत राय मांगी थी। विभाग ने उन्हें पत्र के जरिए सूचित कर दिया गया कि दर्शननगर गेट पुरातात्विक दृष्टि से संरक्षित इमारत नहीं है। इसके बाद से ही गेट के वजूद मिटने का रास्ता साफ हो गया।
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गेट के आसपास के दुकानदारों को इस जगह को शीघ्र खाली करने का प्रशासन से नोटिस भी भेजा जा चुका था। उधर, गुलाबबाड़ी स्थित पुरातत्व विभाग कार्यालय के अफसर डीके जायसवाल ने कहा कि दर्शननगर का गेट ऐतिहासिक भले हो लेकिन वह पुरातत्व विभाग की ओर से संरक्षित नहीं था।
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अयोध्या के राजा दर्शन सिंह ने तकरीबन पांच सौ साल पहले दर्शननगर को बसाया था। इस जगह को सुरक्षित रखने के लिए दीवार और गेट भी बनवाया था। अब दर्शननगर कस्बे के मध्य से ही फोरलेन रोड प्रस्तावित है जो कि आजमगढ़ की ओर जाएगी।
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यहीं पर तकरीबन एक किमी. लंबा उपरिगामी पुल भी प्रस्तावित है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आठ माह पहले एसडीएम सदर दीपा अग्रवाल ने पुरातत्व विभाग से दर्शननगर गेट के बाबत राय मांगी थी। विभाग ने उन्हें पत्र के जरिए सूचित कर दिया गया कि दर्शननगर गेट पुरातात्विक दृष्टि से संरक्षित इमारत नहीं है। इसके बाद से ही गेट के वजूद मिटने का रास्ता साफ हो गया।
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गेट के आसपास के दुकानदारों को इस जगह को शीघ्र खाली करने का प्रशासन से नोटिस भी भेजा जा चुका था। उधर, गुलाबबाड़ी स्थित पुरातत्व विभाग कार्यालय के अफसर डीके जायसवाल ने कहा कि दर्शननगर का गेट ऐतिहासिक भले हो लेकिन वह पुरातत्व विभाग की ओर से संरक्षित नहीं था।