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राजधानी नहीं तीर्थ की तरह हो अयोध्या का विकास

Thu, 11 Mar 2021 11:41 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 11 Mar 2021 11:41 PM IST
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Development of Ayodhya should be like a pilgrimage, not a capital
अयोध्या। अयोध्या के विकास में स्कंद पुराण में वर्णित तीर्थ शब्द की व्याख्या की पूरी अवधारणा समाहित होगी। ग्लोबल विकास का विजन डाक्यूमेंट बना रही कनाडा की कंपनी को आध्यात्मिक पर्यटन मेगा सिटी के साथ तीर्थ क्षेत्र की सभी सुविधाएं व परिकल्पनाएं साकार करनी होंगी।
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अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दोबारा 20 मार्च को तीर्थ क्षेत्र के नए विजन डाक्यूमेंट का प्रजेंटेशन देखेंगे। मुख्यमंत्री ने विजन डाक्यूमेंट तैयार करने की डेडलाइन छह माह से घटाकर दो माह करने के निर्देश भी दिए हैं।
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लखनऊ में बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से समीक्षा के दौरान के दिए गए निर्देशों को विजन डाक्यूमेंट में शामिल करने में एलईए एसोसिएट्स, सीपी कुकरेजा व एलएंडटी के इंजीनियरों समेत अयोध्या विकास प्राधिकरण व पर्यटन विभाग की टीम जुट गई है।
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मुख्यमंत्री ने तीर्थ की अवधारणा को आधार मानते हुए विकास करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही अयोध्या विकास प्राधिकरण समेत ग्लोबल कंपनी से कहा गया है कि डेढ़ से दो माह में विजन डाक्यूमेंट तैयार कर लें।
अब संत-धर्माचार्यों के सहयोग से तीर्थ की अवधारणा को विजन डाक्यूमेंट में शामिल करने की रणनीति बन रही है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में अयोध्या में विकास कार्य तेजी से करने के लिए विजन डाक्यूमेंट जल्दी से तैयार होना जरूरी है।
इसके लिए अयोध्या विकास प्राधिकरण अगले आठ दिनों में समस्त विभागों के प्रोजेक्ट जमा कर लेगा। इसमें कार्य शुरू होने व खत्म होने की तिथि भी अंकित होगी। प्राधिकरण अपने प्रस्ताव को भी इसमें शामिल करेगा।
समस्त विकास कार्यों का विजन डाक्यूमेंट बनाकर अपने पुराने प्रजेंटेशन में मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में बदलाव करेगा। यह दोनों संयुक्त प्रजेंटेशन मुख्यमंत्री के सामने 20 मार्च को रखे जाएंगे। इसके बाद विकास कार्यों की समीक्षा होगी।
पंचमुखी महादेव मंदिर, गुप्तार घाट के महंत मिथिलेश नंदनी शरण बताते हैं कि अयोध्या के दो स्वरूप हैैं। एक राजधानी का और दूसरा तीर्थ का। राजधानी से तात्पर्य इतिहास से है और तीर्थ का संबंध पुराणों से है।
वह बताते हैं कि अयोध्या के इतिहास की बात की जाए तो इसका आधार वाल्मीकि रामायण है। यहीं से रामराज्य की अवधारणा विकसित होती है। लेकिन अगर अयोध्या के आध्यात्म व धर्मनगरी को जानना है तो इसे पुराणों व अन्य धार्मिक ग्रंथों से जाना जा सकता है।
अयोध्या के बहुत से ऐसे स्थान हैं जो इतिहास से नहीं बल्कि, पुराणों से जाने जाते हैं। इसलिए जरूरी है कि अयोध्या का विकास तीर्थ की अवधारणा पर हो, जिसमें इतिहास तो शामिल हो, साथ ही पुराणों व अन्य धार्मिक ग्रंथों में चिह्नित प्रमुख स्थलों को विकास क्षेत्र में शामिल किया जाए।
अयोध्या के विकास का जो विजन डाक्यूमेंट तैयार हो रहा है इसमें एयरपोर्ट के निकट होटल व पंचकोसी परिक्रमा मार्ग पर धर्मशालाएं बनाने की बात कही गई है। इस कार्य को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सराहा है। मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग व आवास विभाग के कार्यों की धीमी गति पर फटकार भी लगाई है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या के विकास के तीर्थ की अवधारणा पर विजन डाक्यूमेंट बनाने का निर्देश दिया है। इसके साथ विजन डाक्यूमेंट के लिए समय सीमा छह माह से घटाकर डेढ़ से दो माह कर दी है।- विशाल सिंह, उपाध्यक्ष, अयोध्या विकास प्राधिकरण
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